AC चलाते वक्त कमरे में क्यों रखी जा रही है पानी की बाल्टी? वजह जानकर आप भी आज से करने लगेंगे ये काम
गर्मी में घंटों एसी चलाने से कमरा ठंडा तो हो जाता है, लेकिन हवा काफी ड्राई भी महसूस होने लगती है. यही वजह है कि इन दिनों कई लोग एसी वाले कमरे में पानी की बाल्टी रखने लगे हैं. माना जाता है कि इससे कमरे में थोड़ी नमी बनी रहती है और गला सूखने या स्किन ड्राई होने जैसी परेशानी कम महसूस हो सकती है.
US-Iran Tension: अमेरिकी संसद में ट्रंप की शक्तियों को सीमित करने का प्रस्ताव पास, 4 रिपब्लिकन सांसदों ने भी दिया विपक्ष का साथ
अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी भारी सैन्य तनाव और युद्ध के हालातों के बीच अमेरिकी राजनीति में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला एक बड़ा और कड़ा प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित कर दिया है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप को संसद की पूर्व अनुमति के बिना ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सीधे सैन्य अभियान या युद्ध की घोषणा करने से रोकना है। इस वोटिंग ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी कानून निर्माता बिना ठोस कूटनीतिक चर्चा के देश को किसी बड़े युद्ध में धकेलने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं।
संसद में 224-194 के बहुमत से पारित हुआ ऐतिहासिक प्रस्ताव
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस अति-संवेदनशील प्रस्ताव पर हुई वोटिंग के दौरान विपक्षी पार्टी डेमोक्रैट्स को एक बड़ी और निर्णायक कूटनीतिक जीत हासिल हुई है। सदन में यह प्रस्ताव 194 के मुकाबले 224 वोटों के भारी बहुमत से पारित किया गया।
इस प्रस्ताव के तहत व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति को यह कड़े निर्देश दिए गए हैं कि यदि अमेरिकी संसद अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ सैन्य बल के इस्तेमाल की लिखित और औपचारिक मंजूरी नहीं देती है, तो राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ जारी सभी सैन्य गतिविधियों और सेनाओं को तुरंत पीछे हटाना होगा।
ट्रंप के ही पार्टी के 4 सांसदों ने बगावत कर खिलाफ मे डाला वोट
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस विधायी प्रक्रिया में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला झटका उनकी खुद की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से आया है। वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार प्रमुख और वरिष्ठ सांसदों- मैट गेट्ज़, थॉमस मैसी, फ्रांसिस रूनी और वॉल्टर जोन्स ने अपनी ही सरकार की नीतियों के खिलाफ बगावत कर दी।
इन चारों सांसदों ने पाला बदलते हुए विपक्षी खेमे द्वारा लाए गए इस युद्ध विरोधी प्रस्ताव के पक्ष में खुलकर मतदान किया। रिपब्लिकन सांसदों की इस बगावत ने साफ कर दिया है कि ईरान नीति और सैन्य कार्रवाई को लेकर खुद ट्रंप प्रशासन के भीतर भी गहरा वैचारिक असंतोष पनप रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप के पास अब भी सुरक्षित है 'वीटो' का विशेष अधिकार
संसद के निचले सदन से इस कड़े प्रस्ताव के पारित होने के बावजूद कूटनीतिक और कानूनी रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अब भी एक बड़ा और अचूक रास्ता बाकी है। अमेरिकी संविधान के नियमों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को पूरी तरह से कानूनी रूप लेने के लिए अभी उच्च सदन से भी पारित होना होगा, जहाँ ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का पहले से ही बहुमत है।
इसके अतिरिक्त, यदि यह प्रस्ताव वहां से भी पास हो जाता है, तो भी राष्ट्रपति ट्रंप के पास अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों के तहत इसे खारिज करने यानी 'वीटो' लगाने का पूरा अधिकार सुरक्षित है। व्हाइट हाउस ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे इस प्रस्ताव को देश की सुरक्षा के खिलाफ मानते हैं।
सुलेमानी की मौत के बाद उपजे युद्ध के हालातों के बीच संसद का बड़ा कदम
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि को देखें तो अमेरिकी संसद ने यह कड़ा कदम ईरान के कुख्यात कमांडर कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में हुई मौत और उसके बाद ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर की गई मिसाइल जवाबी कार्रवाई के बाद उठाया है। प्रतिनिधि सभा की स्पीकर और वरिष्ठ डेमोक्रैट नेता नैन्सी पेलोसी ने प्रस्ताव पारित होने के बाद मीडिया से कहा, "देश के राष्ट्रपति के पास बिना संसद को विश्वास में लिए युद्ध शुरू करने का कोई एकतरफा अधिकार नहीं है।
पिछले दिनों प्रशासन ने बिना किसी कूटनीतिक रणनीति के जो कदम उठाए, उससे हमारे सैनिकों और नागरिकों की जान गंभीर खतरे में पड़ गई थी, जिसे हम और बर्दाश्त नहीं कर सकते।"
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