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Lakhimpur Kheri में Bus पलटने से 1 श्रद्धालु की मौत, बेतिया से अयोध्या जा रहे 30 अन्य घायल

बिहार के बेतिया से श्रद्धालुओं को अयोध्या लेकर जा रही एक ‘डबल-डेकर’ बस के लखीमपुर खीरी जिले में अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड्ड में पलट जाने से उसमें सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा 30 अन्य लोग घायल हो गए। अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) अमित राय ने बुधवार को बताया कि मंगलवार रात करीब दो बजे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-30 पर तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही एक डबल-डेकर बस बेकाबू होकर सड़क किनारे खड्ड में पलट गई, जिससे एक श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई और बस चालक समेत करीब 30 लोग घायल हो गए। उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान हरि शंकर लाल यादव (50) के रूप में हुई है।

राय ने बताया कि यह हादसा उचौलिया थाना क्षेत्र में एक गुरुद्वारे के पास हुआ। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चालक को झपकी आने के कारण वह बस से नियंत्रण खो बैठा और हादसा हो गया। राय ने बताया कि पुलिस और स्थानीय लोग घायलों को पसगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए तथा बाद में गंभीर रूप से घायल करीब छह यात्रियों को शाहजहांपुर जिला अस्पताल ले जाया गया जबकि बाकी लोगों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही किया जा रहा है।

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Supreme Court ने Karnataka को UAPA विशेष अदालत के लिए ढांचा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि वह गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामलों की रोजाना सुनवाई के लिए एक अतिरिक्त विशेष अदालत के वास्ते बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शाहिद खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। शाहिद खान पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) साजिश मामले में आरोपी है, जिसमें अभियोजन पक्ष 707 गवाहों से पूछताछ करना चाहता है।

प्रधान न्यायाधीश ने आदेश में कहा, ‘‘हम कर्नाटक राज्य को निर्देश देते हैं कि वह तुरंत आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए। इसमें कर्नाटक उच्च न्यायिक सेवा में एक अतिरिक्त पद सृजित करना और उच्च न्यायालय के तय नियमों के अनुसार जरूरी कर्मचारी एवं अन्य संबंधित सुविधाएं देना शामिल है। इसके लिए आवश्यक मंजूरी दो हफ्ते के अंदर दी जाए।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार आवश्यक बुनियादी ढांचा, कर्मचारी और पदों को मंजूरी दे देगी, तो कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एक न्यायिक अधिकारी को विशेष अदालत की अध्यक्षता करने के लिए नियुक्त करेंगे।

यह विशेष अदालत सिर्फ यूएपीए से जुड़े मामलों की रोजाना सुनवाई करेगी। पीठ ने आदेश दिया, ‘‘यह मामला भी विशेष अदालत को सौंपा जाएगा। पीठासीन अधिकारी सबसे पहले तीन सुरक्षित गवाहों और उसके बाद अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अभियोजन पक्ष के लिए जरूरी सबूत तीन महीने के भीतर रिकॉर्ड में शामिल हो जाएं।’’ पीठ ने विशेष अदालत पर काम के मौजूदा बोझ पर भी ध्यान दिया।

राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि मौजूदा अदालत में लगभग 97 मुकदमों की सुनवाई लंबित हैं और अलग-अलग आरोपियों की बार-बार अंतरिम जमानत अर्जियों में भी अदालत का काफी समय लग रहा है। पीठ ने कहा कि उसके पहले के आदेश के बाद, कर्नाटक में यूएपीए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित की गई हैं, और प्रत्येक अदालत 12-15 से अधिक मामलों की सुनवाई नहीं करेगा। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘अगर ऐसा नहीं किया गया है, तो हमारे पूर्व के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।

ऐसी स्थिति में, विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह सिर्फ 12-15 मामलों की सुनवाई करेंगे, जिसमें मौजूदा मामला भी शामिल है।’’ पीठ ने विलंब का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘राज्य के पास इस मुकदमे को वर्षों तक खींचने की छूट नहीं हो सकती।

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