न्यूजीलैंड के पीएम लक्सन ने जीता विश्वास मत, बने रहेंगे नेशनल पार्टी के नेता
New Zealand PM: न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बुधवार को कॉकस में हुए विश्वास मत में समर्थन हासिल कर लिया। वह सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी के नेता बने रहेंगे। यह फैसला राजधानी वेलिंगटन में कई घंटों तक चली कॉकस बैठक के बाद सामने आया।
लक्सन ने संसद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें अपनी पार्टी के सांसदों का 'पूरा समर्थन' मिला है और वह नेशनल पार्टी के नेता के पद पर बने रहेंगे। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह विश्वास मत न्यूजीलैंड के आम चुनाव से 90 दिन से भी कम समय पहले हुआ है। ऐसे में चुनावी अभियान की तैयारी कर रही सत्तारूढ़ पार्टी के लिए लक्सन के नेतृत्व पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है।
क्यों खास है बैठक?
लक्सन ने यह बैठक उस समय बुलाई जब उनके नेतृत्व को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। हाल के महीनों में उनकी कुछ टिप्पणियों और फैसलों को लेकर विवाद हुए थे। इनमें व्यवसायों को लेकर दिया गया उनका 'माता-पिता और बच्चे' वाला बयान, ऑकलैंड की यात्रा के लिए सैन्य विमान का इस्तेमाल, और दोबारा चुने जाने पर मिश्रित-सदस्य आनुपातिक चुनाव प्रणाली पर जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव शामिल था।
दूसरी बार विश्वास मत का करना पड़ा सामना
प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दूसरा मौका था जब लक्सन को विश्वास मत का सामना करना पड़ा। इससे पहले अप्रैल में भी ऐसा मतदान हुआ था। विश्वास मत में समर्थन मिलने के बाद लक्सन ने कहा कि नेशनल पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य आगामी आम चुनाव में लेबर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को हराना है। न्यूजीलैंड का अगला आम चुनाव 7 नवंबर को होना है।
सर्वे में क्या आया सामने?
सात अगस्त को जारी टैक्सपेयर्स यूनियन-कुरिया सर्वेक्षण के अनुसार, नेशनल पार्टी को 31 प्रतिशत समर्थन मिला, जो पिछले सर्वेक्षण की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया कि नेशनल पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन संसद में मामूली बहुमत बनाए रखने में सफल हो सकता है। वहीं मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी का समर्थन 3.7 प्रतिशत अंक घटकर 27.8 प्रतिशत रह गया।
4 दिनों में हुई रिसर्च
यह सर्वेक्षण करिया मार्केट रिसर्च ने न्यूजीलैंड टैक्सपेयर्स यूनियन के लिए एक अगस्त से चार अगस्त के बीच किया था। इसमें 1,000 योग्य और संभावित मतदाताओं की राय ली गई। टैक्सपेयर्स यूनियन के अनुसार, सर्वेक्षण में त्रुटि की अधिकतम सीमा प्लस या माइनस 3.1 प्रतिशत अंक है। हालांकि, जुलाई में जारी रेडियो न्यूजीलैंड-रीड रिसर्च सर्वेक्षण में नेशनल पार्टी का समर्थन 28.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। यह 2021 में लक्सन के पार्टी नेता बनने के बाद उसका सबसे निचला स्तर था।
(DISCLAIMER: सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
--आईएएनएस
D Y Chandrachud News: रूस ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को सौंपी लीगल बैटल की कमान, यूक्रेन जंग से जुड़े केस में निभाएंगे भूमिका
भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने एक अहम अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन मामले में अपना प्रतिनिधि आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। यह मामला यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक की ओर से रूस के खिलाफ दायर निवेश विवाद से जुड़ा है। इसकी जानकारी ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रही आर्बिट्रेशन कार्यवाही से संबंधित है। ओशचाडबैंक ने यूक्रेन के डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपनी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को हुए नुकसान का दावा किया है।
बैंक का आरोप है कि 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और कारोबार को नुकसान पहुंचा। इसी नुकसान को लेकर रूस के खिलाफ सैकड़ों मिलियन डॉलर का दावा किया गया है।
तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा मामले की सुनवाई
इस विवाद की सुनवाई तीन सदस्यीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल करेगा। कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व व्यापार मंत्री डायाला जिमेनेज को रूस और ओशचाडबैंक ने संयुक्त रूप से ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष चुना है।
वहीं, ग्रीस के आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को ओशचाडबैंक ने नियुक्त किया है। रूस की ओर से पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को चुना गया है।
पहले रूस के प्रस्ताव ठुकरा चुके हैं चंद्रचूड़
इस मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि रूस की ओर से चंद्रचूड़ को आर्बिट्रेटर बनाए जाने का यह पहला प्रस्ताव नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इससे पहले रूस से जुड़े कुछ अन्य निवेश विवादों में आर्बिट्रेटर बनने के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए थे।
इनमें विंटरशॉल डीआ और यूक्रेन की सरकारी पावर ट्रांसमिशन कंपनी उक्रेनर्गो से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं। इस बार चंद्रचूड़ ने रूस की ओर से आर्बिट्रेटर की भूमिका स्वीकार की है।
अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में अहम भूमिका
डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में भारत के चीफ जस्टिस के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह कानूनी और मध्यस्थता से जुड़े मामलों में सक्रिय रहे हैं। अप्रैल 2026 में भी उन्होंने आर्बिट्रेशन में निष्पक्षता और विशेषज्ञता को निवेशकों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण बताया था।
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