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न्यूजनेशन के सवाल को बलूची नेता ने सराहा, एक दिन पहले विदेश मंत्रालय से पूछा था प्रश्न

बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन पर एक दिन पहले न्यूजनेशन ने विदेश मंत्रालय की वीकली ब्रीफिंग में सवाल किया था. न्यूजनेशन के सवाल को बलूच नेता मीर यार बलोच ने सराहा है. विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में सीधे तौर पर बलूचिस्तान का नाम नहीं लिया था लेकिन मंत्रालय ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि उसे मानवाधिकार के मुद्दे पर अभी बहुत कुछ करना होगा.

दरअसल, एक दिन पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित किया. इस दौरान, न्यूजनेशन से उनसे बलूचिस्ता में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर सवाल किया. इस पर जायसवाल ने कहा पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर की हालिया घटनाओं का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वहां लोगों के असंतोष का जवाब कथित तौर पर बल प्रयोग और गोलीबारी से दिया गया. इन घटनाओं में कम से कम 90 लोगों की मौत हो गई. भारत ने कहा कि पाकिस्तान को इन घटनाओं के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. 

11 अगस्त को बलूचिस्तान का मुद्दा क्यों अहम?

बता दें, कल यानी मंगलवार को 11 अगस्त था. बलूच राष्ट्रवादी समूह 11 अगस्त को ही बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं. खास दिन पर बलूचिस्तान के मुद्दे को लेकर भारतीय मीडिया द्वारा एमईए की प्रेस ब्रीफिंग में सवाल किया गया. न्यूजनेशन के सवाल और भारतीय विदेश मंत्रालय के जवाब पर बलूच नेता मीर यार बलूच ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान के आयोजनों को एमईए की प्रेस ब्रीफिंग में प्रमुखता से उठाया.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बलूच ने भारत की ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर जवाबदेही की मांग की सराहना की. उन्होंने बलूच लोगों के लिए सम्मान, न्याय, स्वतंत्रता और अपने भविष्य का फैसला करने के अधिकार की मांग भी दोहराई.

11 अगस्त, 2026

रिपब्लिक ऑफ़ बलूचिस्तान, विदेश मंत्रालय की आज की प्रेस ब्रीफिंग में बलूचिस्तान के 11 अगस्त के स्मरणोत्सव (commemoration) को उजागर करने के लिए भारतीय मीडिया का स्वागत और दिल से सराहना करता है.

हम मानवाधिकारों पर भारत के सैद्धांतिक और सुसंगत रुख की भी सराहना करते हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, श्री रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) और उसके नियंत्रण वाले अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया. हालाँकि प्रवक्ता ने विशेष रूप से बलूचिस्तान का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन हम जवाबदेही और मानवाधिकारों के सम्मान के लिए भारत की व्यापक अपील को महत्व देते हैं.

रिपब्लिक ऑफ़ बलूचिस्तान का मानना ​​है कि अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की यह सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि वह मानवाधिकारों के लिए खड़ा हो और बलूचिस्तान, PoJK, गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के अवैध नियंत्रण वाले अन्य क्षेत्रों में हो रहे उल्लंघनों पर बढ़ती चिंता में शामिल हो.

मानवाधिकारों की कोई सीमा नहीं होती. बलूचिस्तान के लोग सम्मान, आज़ादी, न्याय और अपना भविष्य खुद तय करने के अधिकार के हकदार हैं. हमारा मानना ​​है कि बलोच और कश्मीरी लोगों के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों के हनन और जातीय सफाए (ethnic cleansing) को खत्म करने के लिए निर्णायक अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की ज़रूरत है. इसमें बलूचिस्तान की आज़ादी को मान्यता देना और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हस्तक्षेप करना शामिल है, ताकि उन लाखों कश्मीरियों की जान और मौलिक अधिकारों की रक्षा की जा सके जो पाकिस्तान की सैन्य ताकतों द्वारा गंभीर अत्याचारों का शिकार हो रहे हैं.

हम मानवाधिकारों और जवाबदेही के सिद्धांतों को प्राथमिकता देने के लिए भारत की ईमानदारी से सराहना करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को उन लोगों के लिए आवाज़ उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं जिनकी आवाज़ अनसुनी रह जाती है.

भारत का रुख क्या है?

विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में बलूचिस्तान की स्वतंत्रता का समर्थन या उसे अलग देश के रूप में मान्यता देने की घोषणा नहीं की गई. भारत का आधिकारिक बयान मुख्य रूप से पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर केंद्रित रहा. वहीं, बलूच राष्ट्रवादी नेताओं ने भारत के बयान को अपने आंदोलन के समर्थन के संकेत के तौर पर पेश किया. 

 

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'स्यूटा में अवैध प्रवासियों को वापस भेजा जाएगा मोरक्को', स्पेन के विदेश मंत्री का बड़ा ऐलान

Spanish Foreign Minister: स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने मंगलवार (स्थानीय समय) को स्यूटा दौरे के दौरान कहा है कि जुलाई के आखिर में स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले सभी प्रवासियों को वापस मोरक्को भेजा जाएगा।

स्पेन सरकार के अनुमान के मुताबिक, जुलाई के अंत में पड़ोसी देश मोरक्को से 70,000 से अधिक लोग अवैध रूप से सीमा पार कर इस क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे। स्यूटा के राष्ट्रपति जुआन जीसस विवास ने पिछले गुरुवार को यूरोपीय संसद की नागरिक स्वतंत्रता, न्याय और गृह मामलों की समिति की एक विशेष बैठक में बताया था कि इस बड़े पैमाने पर हुए प्रवासी प्रवेश के दौरान करीब 100 लोगों की मौत हो गई।

दावा- ज्यादातर लोग स्वेच्छा से मोरक्को लौट चुके

विवास ने हाल ही में कहा था कि स्यूटा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले ज्यादातर लोग स्वेच्छा से मोरक्को लौट चुके हैं, लेकिन लगभग दस हजार लोग अब भी वहां मौजूद हैं। स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री अल्बारेस ने कहा कि कुछ प्रवासी ऑनलाइन फैलाई गई गलत जानकारी के प्रभाव में आ गए थे। उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि स्यूटा में प्रवेश करने के बाद उन्हें स्पेन के मुख्य भूभाग या यूरोप के अन्य हिस्सों में जाने का अधिकार मिल जाएगा।

'राजनयिक प्रयास कर रहे हैं'

उन्होंने बताया क‍ि शहर से कोई भी व्यक्ति स्पेन के मुख्य भूभाग में नहीं गया है। अल्बारेस ने कहा क‍ि मोरक्को के साथ हम जो राजनयिक प्रयास कर रहे हैं, उनका उद्देश्य अनियमित तरीके से प्रवेश करने वाले सभी लोगों को वापस भेजना है। इस बीच, 15 अगस्त को एक और बड़े पैमाने पर सीमा पार करने की संभावित योजना से जुड़ी ऑनलाइन रिपोर्टों के बाद स्पेनिश अधिकारियों ने स्यूटा में तैनात सैन्य कर्मियों और सिविल गार्ड के सभी अवकाश रद्द कर दिए हैं।

100 लोगों की हुई थी मौतें

विवास ने यूरोपीय संसद की उसी विशेष बैठक में बताया था कि स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में बड़े पैमाने पर सीमा पार करने की घटना के दौरान लगभग 100 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि करीब 80,000 लोग स्यूटा में दाखिल हुए थे, जिनमें से लगभग 75,000 बाद में स्वेच्छा से लौट गए।

विवास के अनुसार, अभी भी 3,000 से 5,000 प्रवासी स्यूटा में मौजूद हैं। इससे वहां के स्वागत केंद्रों पर भारी दबाव पड़ गया है और गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, प्रवासियों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने और यूरोपीय संघ की एजेंसियों से ज्यादा सहयोग देने की मांग की।

(DISCLAIMER: सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)

 

 

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  Sports

England Test Captain Joe Root ने खिलाड़ियों पर से हटाया 'Night Curfew', कहा- अपनी Responsibility खुद समझें Team Members

इंग्लैंड की टेस्ट टीम में कप्तानी बदलने के साथ ही खिलाड़ियों के लिए नियमों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। नए टेस्ट कप्तान जो रूट ने टीम पर लागू रात का कर्फ्यू हटाने का फैसला किया है। पाकिस्तान के खिलाफ इस महीने शुरू होने वाली टेस्ट श्रृंखला से खिलाड़ियों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। रूट का कहना है कि इंग्लैंड के खिलाड़ी वयस्क हैं और उन्हें अपने फैसलों की जिम्मेदारी खुद समझनी चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कर्फ्यू की व्यवस्था न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के पिछले दौरों में शराब से जुड़े विवादों के बाद लागू की गई थी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को देर रात तक बाहर रहने और ऐसी गतिविधियों से रोकना था, जिनका असर अगले दिन के मुकाबले पर पड़ सकता है। हालांकि, रूट अब मानते हैं कि केवल समय की पाबंदी लगाना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

रूट ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कर्फ्यू लगाने से खिलाड़ियों की आदतों में जरूरी बदलाव आता है। उनका मानना है कि अगर खिलाड़ियों से मैदान पर जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है तो उन्हें मैदान के बाहर भी खुद सही और मजबूत फैसले लेने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम को अपने स्तर पर इस व्यवस्था को संभालना और एक-दूसरे पर नजर रखना होगा।

गौरतलब है कि हाल की न्यूजीलैंड श्रृंखला के दौरान पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन कर्फ्यू के नियम का उल्लंघन कर चुके थे। इसके बाद टीम में कई बदलाव देखने को मिले। स्टोक्स दूसरे टेस्ट में नहीं खेल पाए थे और तीसरे टेस्ट में वापसी कर कप्तानी की थी। इसी मुकाबले के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा भी की थी।

इसके बाद इंग्लैंड ने टेस्ट टीम के मुख्य प्रशिक्षक ब्रेंडन मैकुलम को पद से हटा दिया और उनकी जगह स्टीफन फ्लेमिंग को जिम्मेदारी दी गई। फ्लेमिंग के आने के साथ टेस्ट टीम की कप्तानी दोबारा जो रूट को सौंपी गई है। यह रूट का इंग्लैंड की टेस्ट टीम के कप्तान के रूप में दूसरा कार्यकाल है।

बता दें कि रूट के पहले कप्तानी कार्यकाल में भी इंग्लैंड की टीम पर कर्फ्यू लागू था। 2017-18 की एशेज श्रृंखला के दौरान शराब से जुड़े विवाद के बाद 2017 से 2022 के बीच खिलाड़ियों के लिए ऐसी पाबंदियां रखी गई थीं। अब दूसरी बार कप्तानी संभालने के साथ रूट ने इस व्यवस्था को खत्म कर नई सोच के साथ टीम आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

रूट ने खिलाड़ियों से कहा है कि उन्हें याद रखना होगा कि वे इंग्लैंड के लिए खेल रहे हैं और मैदान के बाहर उनके व्यवहार का असर पूरी टीम की छवि पर पड़ता है। उनका कहना है कि टीम की पहचान उसके क्रिकेट और मैदान पर प्रदर्शन से होनी चाहिए, न कि मैदान के बाहर होने वाली घटनाओं से।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कर्फ्यू हटाने का फैसला केवल टेस्ट टीम तक सीमित नहीं रहने वाला है। इंग्लैंड की सीमित ओवरों की टीम के लिए भी इसे हटाए जाने की खबर है। उस टीम की जिम्मेदारी अभी ब्रेंडन मैकुलम के पास है और हैरी ब्रूक कप्तान हैं।

रूट ने खिलाड़ियों से यह भी कहा कि जीत के बाद जश्न मनाना गलत नहीं है, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि कब जश्न मनाना है और कब आराम करना जरूरी है। उन्होंने खिलाड़ियों से एक-दूसरे का ध्यान रखने और टीम के भीतर मजबूत माहौल बनाने की अपील की है। पाकिस्तान के खिलाफ आगामी श्रृंखला से इंग्लैंड की नई व्यवस्था और रूट की नेतृत्व शैली की असली परीक्षा शुरू होने वाली हैं।
Wed, 12 Aug 2026 21:53:16 +0530

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