इलेक्ट्रिक परिवहन मंच युलु ने सीरीज सी वित्त पोषण चक्र के तहत 9.3 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
कंपनी ने बुधवार को बयान में कहा कि उसकी योजना अगले दो साल में अपने इलेक्ट्रिक वाहन के बेड़े को चार गुना बढ़ाकर दो लाख करने, सेवा केंद्र का विस्तार करने, रणनीतिक व्यावसायिक साझेदारियों को और मजबूत करने के साथ ही बाजार में सूचीबद्ध होने की योजनाओं को तेज करने की है।
‘सीरीज-सी’ वित्त पोषण किसी भी स्टार्टअप या कारोबार द्वारा पूंजी जुटाने का चौथा एवं आमतौर पर अंतिम चरण है।
इसके जरिये कंपनी का उद्देश्य बड़े पैमाने पर विस्तार करना, नए बाजारों (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर) में प्रवेश करना या अन्य कंपनियों का अधिग्रहण करना होता है।
युलु के सह संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित गुप्ता ने कहा कि सीरीज सी वित्त पोषण से कंपनी के कारोबारी मॉडल, मांग की व्यापक संभावनाओं, क्रियान्वयन क्षमता और मंच की परिपक्वता की पुष्टि हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ आगामी कुछ तिमाहियों में अपने बेड़े को चार गुना बढ़ाने और अधिक क्षमता वाले वाहनों के मॉडल पेश करने के साथ युलु भारत की शहरी स्थानीय परिवहन गतिविधियों की आधारशिला के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने और शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।’’
कंपनी ने कहा कि बजाज ऑटो और मैग्ना इंटरनेशनल इंक के साथ रणनीतिक साझेदारियों की मदद से युलु ने विशेष रूप से तैयार हार्डवेयर, अपनी प्रौद्योगिकी एवं व्यापक ऊर्जा बुनियादी ढांचे वाला एकीकृत इलेक्ट्रिक वाहन परिवेश तैयार किया है।
इससे वह टिकाऊ शहरी लॉजिस्टिक्स की बढ़ती मांग का लाभ उठाने की स्थिति में है।
युलु ने कहा कि वह संबंधित शहर के भीतर परिवहन क्षेत्र में भी प्रवेश करने की योजना बना रही है। इसके तहत वह ‘युलु एक्सप्रेस’ पेश करेगी। यह ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, बाइक टैक्सी और त्वरित ‘पार्सल डिलीवरी’ के लिए तैयार अधिक भार वहन क्षमता वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर है।
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एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। कंपनी की सालाना आम बैठक 18 अगस्त को होनी है। एक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि मैंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने के बेहद संतोषजनक अवसर के लिए आभारी हूं। चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफ़े के पत्र में कहा कि मैंने टाटा संस बोर्ड को बता दिया है कि 20 फरवरी, 2027 को मेरा कार्यकाल खत्म होने पर मैं दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करूंगा। मैंने बोर्ड से कहा है कि वे उत्तराधिकार के बारे में जल्द फ़ैसला लें ताकि कामकाज का सुचारू रूप से हस्तांतरण हो सके।
चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं। उनके जाने से भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप्स में से एक, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में लीडरशिप में बदलाव होगा। टाटा संस 30 से ज़्यादा कंपनियों को संभालती है, जिनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया शामिल हैं। चंद्रशेखरन के इस्तीफ़े के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई; TCS, टाटा स्टील और टाटा पावर के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 तक चलेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि कार्यकाल खत्म होने के बाद वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है। उनका इस्तीफ़ा शेयरहोल्डर्स के साथ तनाव और चंद्रशेखरन तथा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच मतभेदों के माहौल में आया है। फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा करने के बारे में बात करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का फ़ैसला किया था और इसकी सिफ़ारिश की थी।
यह घटनाक्रम 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक से कुछ दिन पहले हुआ है, जिसमें शेयरहोल्डर डायरेक्टर के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर वोट करेंगे। चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने का मुद्दा पहले से ही ग्रुप के अंदर तनाव की वजह बना हुआ था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा द्वारा चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किए जाने के बाद टाटा संस ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला टाल दिया था।
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