राजाओं का स्वाद अब आपकी थाली में, जानिए क्यों है रजवाड़ी थाली इतनी खास
राजस्थान की रजवाड़ी थाली सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और शाही मेहमाननवाजी का प्रतीक है. इस थाली में दाल-बाटी-चूरमा, केर-सांगरी, गट्टे की सब्जी, पंचमेल दाल, कढ़ी, बाजरे की रोटी, पापड़, अचार और पारंपरिक मिठाइयों का अनूठा संगम देखने को मिलता है. हर व्यंजन राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों और लोकजीवन की कहानी बयां करता है. घी से सजी बाटी और बार-बार परोसने की परंपरा अतिथि सत्कार की मिसाल मानी जाती है. आज यह शाही थाली देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए राजस्थान के असली स्वाद और विरासत को करीब से जानने का सबसे बड़ा आकर्षण बन चुकी है.
N Chandrasekaran: किसान परिवार से निकले, अप्लाएड साइंस और MCA की पढ़ाई की, कैसे बने टाटा संस के चेयरमैन?
N Chandrasekaran Qualification: तमिलनाडु के एक किसान परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक टाटा ग्रुप की कमान संभालने तक एन. चंद्रशेखरन का सफर काफी दिलचस्प रहा है. उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की.आइए जानते हैं कि TCS में इंटर्न के तौर पर शुरुआत करने वाले चंद्रशेखरन आगे चलकर कैसे टाटा संस के CEO बने और बाद में फिर टाटा सन्स चेयरमैन बने.
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