128 करोड़ के फर्जी GST इनवॉइसिंग रैकेट का भंडाफोड़, EOW ने 6 आरोपियों को किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने फर्जी GST इनवॉइसिंग और शेल कंपनियों के जरिए किए जा रहे बड़े टैक्स फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में करीब ₹128 करोड़ के फर्जी GST लेनदेन और लगभग ₹10 करोड़ के गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम का खुलासा हुआ है.
दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी खड़ी
EOW के अनुसार, यह कार्रवाई FIR नंबर 66/2026 के तहत की गई, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक डिटेल्स का दुरुपयोग कर “M/s R.K. Enterprises” नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई. आरोपियों ने नौकरी दिलाने के बहाने दस्तावेज हासिल किए थे और बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी खड़ी कर दी.
टैक्स राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया
जांच में सामने आया कि सितंबर 2025 में बिना पीड़ित की जानकारी के यह फर्म बनाई गई और इसके जरिए ₹128 करोड़ से अधिक के फर्जी GST लेनदेन किए गए. पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये के टैक्स राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया.
तकनीकी निगरानी, बैंक खातों, GST रिकॉर्ड, ईमेल और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद दिलीप कुमार और राज कुमार दीक्षित को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है. आरोप है कि गिरोह फर्जी कंपनियां बनाकर नकली GST बिल तैयार करता था और बैंकिंग चैनलों के जरिए लेनदेन दिखाकर फर्जी ITC क्लेम करता था.
फर्जी GST इनवॉइस बरामद किए
EOW ने दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में छापेमारी कर 15 मई 2026 को राज कुमार दीक्षित, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को गिरफ्तार किया. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹51.12 लाख नकद, 15 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 2 कारें, फर्जी दस्तावेज, नकली स्टांप, सिम कार्ड और बड़ी संख्या में फर्जी GST इनवॉइस बरामद किए हैं.
50 शेल कंपनियों की पहचान की गई
पुलिस जांच में अब तक करीब 50 शेल कंपनियों की पहचान की गई है, जिनका इस्तेमाल फर्जी लेनदेन और कैश रूटिंग के लिए किया जा रहा था. वहीं मुख्य आरोपी राज कुमार दीक्षित पर लगभग 250 फर्जी कंपनियां संचालित करने का आरोप है. EOW अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है और इस रैकेट से जुड़े अन्य लाभार्थियों, कंपनियों और वित्तीय नेटवर्क की पहचान की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
Punjab News: पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी सहारा, इन मरीजों को बिना आर्थिक बोझ के मिल रहा उपचार
Punjab News: विश्व हाइपरटेंशन दिवस के खास मौके पर पंजाब से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है. राज्य की भगवंत मान सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री सेहत योजना उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर और इससे होने वाली खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ा सहारा बन चुकी है. आज के समय में जब हर उम्र के लोगों में यह बीमारी तेजी से पैर पसार रही है, तब यह सरकारी योजना पंजाब के हजारों परिवारों को समय पर इलाज देने के साथ-साथ उनके घर के बजट को ढहने से भी बचा रही है. अस्पताल के भारी-भरकम बिलों के डर को खत्म कर इस योजना ने स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव ला दिया है.
साइलेंट किलर का हर उम्र पर हमला
हाइपरटेंशन को चिकित्सा की दुनिया में डॉक्टर अक्सर 'साइलेंट किलर' का नाम देते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह बीमारी बिना किसी बड़े लक्षण या स्पष्ट चेतावनी के चुपके से शरीर पर वार करती है. यदि समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या फिर किडनी के फेल होने जैसी जानलेवा समस्याओं का कारण बन जाती है. आज पंजाब के अस्पतालों में हर उम्र के मरीज इस बीमारी की चपेट में दिख रहे हैं. कहीं बुजुर्ग अपनी जांच रिपोर्ट का इंतजार करते नजर आते हैं, तो कहीं महिलाएं अपने पर्स में दवाइयों की पर्चियां संभालती दिखती हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि अब युवा भी इस बीमारी का तेजी से शिकार हो रहे हैं.
डब्ल्यूएचओ की चेतावनी और पंजाब के आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उच्च रक्तचाप का बोझ बहुत तेजी से बढ़ रहा है. खराब खान-पान, मानसिक तनाव, तंबाकू का सेवन, शारीरिक मेहनत की कमी और बिगड़ती जीवनशैली इसके सबसे बड़े कारण हैं. पंजाब राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 40 से लेकर 80 वर्ष की आयु वाले लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. गुरदासपुर में तो 94 वर्ष और एसएएस नगर में 98 वर्ष तक के बुजुर्ग मरीज भी दर्ज किए गए हैं, जो यह दिखाता है कि बुजुर्गों में यह रोग कितना ज्यादा फैला हुआ है. पटियाला, होशियारपुर, जालंधर और फरीदकोट जैसे जिलों में पुरुष और महिलाएं दोनों ही बड़ी संख्या में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. अमृतसर और लुधियाना में 50 से 77 वर्ष की महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है.
युवाओं में बढ़ता हाइपरटेंशन का नया ट्रेंड
सरकारी मेडिकल कॉलेज और राजिंद्रा अस्पताल पटियाला में कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ शर्मा का कहना है कि उच्च रक्तचाप अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है. आधुनिक जीवनशैली ने हर उम्र के इंसान के सामने स्वास्थ्य की नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. आज के समय में किशोरों और 20 से 30 साल के युवाओं में भी हाइपरटेंशन के मामले बहुत ज्यादा सामने आने लगे हैं. मानसिक तनाव, देर रात तक जागना, जंक फूड खाना और कसरत न करना इसका मुख्य कारण है. डॉक्टरों के मुताबिक, अब स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी जटिलताएं बुजुर्गों के मुकाबले बहुत कम उम्र के युवाओं में भी जल्दी देखने को मिल रही हैं.
आर्थिक डर से मिली बड़ी मुक्ति
इस गंभीर स्वास्थ्य संकट के बीच मुख्यमंत्री सेहत योजना मरीजों के लिए एक सच्चा मददगार साबित हुई है. डॉ. शर्मा बताते हैं कि इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह मरीजों को पैसे के डर से इलाज टालने से रोकती है. अक्सर देखा जाता था कि जब किसी मरीज का ब्लड प्रेशर अचानक बहुत बढ़ जाता है, तो परिवार वाले प्राइवेट अस्पतालों के खर्च से डरकर मरीज को घर पर ही रखने की गलती कर बैठते थे. हाइपरटेंशन की इमरजेंसी में इलाज में थोड़ी सी भी देरी जीवन और मौत के बीच का अंतर बन जाती है. अब इस योजना के तहत स्ट्रोक और किडनी की गंभीर बीमारियों का पूरा खर्च सरकार उठा रही है, जिससे मरीजों को समय पर सही इलाज मिल पा रहा है.
आत्मसम्मान के साथ जीने की नई राह
पंजाब के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का असली मकसद सिर्फ मुफ्त दवाइयां देना नहीं, बल्कि सही समय पर मरीज की जान बचाना है. मध्यम वर्गीय परिवारों, पेंशनभोगियों और आम सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सेहत कार्ड एक मजबूत ढाल बन चुका है. इस विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर इस योजना की सबसे बड़ी सफलता केवल मुफ्त इलाज के आंकड़ों में नहीं है, बल्कि उस सम्मान और भरोसे में है जो इसने पंजाब के नागरिकों को दिया है. अब कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय परिवार पैसे की तंगी के कारण अपने मरीज को तड़पते हुए देखने के लिए मजबूर नहीं है, बल्कि वे बिना किसी डर के सीधे अस्पताल जाकर अपना इलाज करवा रहे हैं.
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