Droupadi Murmu ने Birth and Death Registration बिल को दी मंजूरी, 1 साल बाद DM अनुमति अनिवार्य
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस विधेयक को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिसमें जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाने के प्रावधान हैं। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून बन गया है। इस विधेयक में विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को अधिक कड़े बनाने के लिए 1969 के जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन किया गया है।
विधेयक में कहा गया है कि इससे जन्म और मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना को बढ़ावा मिलेगा। जन्म और मृत्यु का एक साल के अंदर सामान्य प्रक्रिया से पंजीकरण होता है तथा इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो इसका पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी की अनुमति और सत्यापन के बाद ही होगा।
50 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने Delhi Gymkhana Club बेदखली मामले में PM Modi को पत्र लिखा
भारतीय सेना के 50 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ प्रस्तावित बेदखली की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वह प्राधिकारों को इस फैसले पर “फिर से विचार करने”, “रचनात्मक विकल्पों” पर गौर करने और इस ऐतिहासिक प्रतिष्ठान को बचाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दें। मोदी को पत्र लिखने वाले ये सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य हैं।
उन्होंने लिखा है कि एक सदी से भी अधिक पुराना यह क्लब ऐसे सदस्यों को “बेहद कीमती संपर्क नेटवर्क” प्रदान करता है और इसे बंद करने से उस समुदाय पर “गहरा मानवीय असर” पड़ेगा, जिसने देश की सेवा में अपने जीवन के सर्वोत्तम वर्ष समर्पित किए हैं। यह विवाद केंद्र सरकार के 22 मई के उस आदेश से उपजा है, जिसमें जिमखाना क्लब का स्थायी पट्टा रद्द कर दिया गया है और उसे 27.3 एकड़ की संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस जमीन की जरूरत “रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने” और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अन्य जरूरी कामों के लिए है।
इस कदम को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए कहा गया है कि यह मनमाना है और इसमें उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। आठ जुलाई को लिखे पत्र पर थलसेना, वायुसेना और नौसेना में सेवाएं दे चुके 50 सेवानिवृत्त अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
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