आज का पंचांग 12 अगस्त 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया, सूर्योदय-सूर्यास्त
आज की तिथि क्या है?: आज श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है, जो रात 11:07 बजे तक रहेगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
- वार: बुधवार
- नक्षत्र: पुष्य-सुबह 7:59 बजे तक, इसके बाद आश्लेषा
- योग: व्यतिपात-दोपहर 3:26 बजे तक, इसके बाद वरियान
- करण: चतुष्पद-दोपहर 12:27 बजे तक, इसके बाद नाग
शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: नहीं
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:23 बजे से 5:06 बजे तक
- अमृत काल: 13 अगस्त को सुबह 4:38 बजे से 6:06 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:38 बजे से 3:31 बजे तक
राहुकाल और अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 12:26 बजे से 2:05 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 7:28 बजे से 9:07 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक
सूर्योदय-सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 5:49 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:03 बजे
- चंद्रोदय: अमावस्या होने के कारण चंद्रोदय नहीं
- चंद्रास्त: शाम के आसपास
आज के व्रत
- श्रावण अमावस्या व्रत
- हरियाली अमावस्या
- दर्श अमावस्या
अमावस्या के दिन स्नान, दान, पितरों का तर्पण और जरूरतमंदों की सहायता करने की धार्मिक मान्यता है। हरियाली अमावस्या पर पेड़-पौधे लगाना और प्रकृति की पूजा करना भी विशेष माना जाता है।
आज का पर्व
हरियाली अमावस्या-12 अगस्त 2026
आज का धार्मिक महत्व
आज श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के स्मरण, तर्पण, दान-पुण्य और आत्मचिंतन के लिए विशेष मानी जाती है। हरियाली अमावस्या पर पेड़-पौधों की पूजा और पौधारोपण करने की परंपरा भी है। माना जाता है कि इस दिन प्रकृति की सेवा और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
आज सुबह 7:59 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। वहीं व्यतिपात योग दोपहर 3:26 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में व्यतिपात योग को नए शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
आज राहुकाल कब है?: आज राहुकाल दोपहर 12:26 बजे से 2:05 बजे तक रहेगा।
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं? यहां जानें सबकुछ
Surya Grahan 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज यानी बुधवार, 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना अपने आप में बेहद खास है और ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सूर्य ग्रहण को लेकर कई तरह के नियम और सावधानियां बताई गई हैं। हालांकि, ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियम परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं, जबकि सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। इसकी पूर्ण अवस्था ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और उत्तरी रूस समेत कुछ क्षेत्रों में दिखाई देगी। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में ग्रहण काल को साधना, मंत्र जाप और आत्मचिंतन के लिए विशेष समय माना जाता है। इस दौरान कुछ कामों से दूरी बनाने की मान्यता भी प्रचलित है।
सूर्य को सीधे देखने से बचें
सूर्य ग्रहण को बिना उचित सुरक्षा के सीधे आंखों से देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। NASA के अनुसार आंशिक ग्रहण के दौरान सूर्य को सीधे देखने के लिए प्रमाणित सोलर-व्यूइंग ग्लास या सुरक्षित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल जरूरी है। सामान्य धूप के चश्मे इसके लिए पर्याप्त नहीं होते।
भोजन को लेकर धार्मिक मान्यता
परंपरागत रूप से ग्रहण काल में भोजन बनाने और खाने से बचने की मान्यता रही है। कई परिवार ग्रहण से पहले भोजन तैयार कर लेते हैं। हालांकि, यह धार्मिक परंपरा है, वैज्ञानिक रूप से ग्रहण के दौरान भोजन के खराब होने की कोई विशेष प्रक्रिया सिद्ध नहीं है।
पूजा-पाठ और मंत्र जाप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट बंद रखने और नियमित पूजा के बजाय मन ही मन भगवान का ध्यान करने की परंपरा है। इस समय मंत्र जाप और ध्यान करने को शुभ माना जाता है।
सुई, कैंची और धारदार वस्तुओं को लेकर मान्यता
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में ग्रहण के दौरान सिलाई-कढ़ाई, सुई में धागा डालने, काटने या छीलने जैसे कामों से बचने की सलाह दी जाती है। इसे धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है, न कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम के रूप में।
गर्भवती महिलाओं के लिए क्या मान्यता है?
भारतीय परंपराओं में ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती रही है। हालांकि, ग्रहण के कारण गर्भावस्था में विशेष नुकसान होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। गर्भवती महिलाओं को सामान्य स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही अपनानी चाहिए।
ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना, घर की साफ-सफाई करना और पूजा स्थल की स्वच्छता करना शुभ माना जाता है। कई लोग घर में गंगाजल का छिड़काव भी करते हैं। ग्रहण के बाद दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य सामग्री दान करने को शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में गाय को हरा चारा खिलाने का भी उल्लेख मिलता है।
क्या भारत में दिखेगा 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण?
पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। NASA के अनुसार इसकी दृश्यता का मुख्य क्षेत्र ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से तक रहेगा। इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर सूर्य ग्रहण देखने या उसके दौरान सूर्य की रोशनी में किसी विशेष बदलाव को देखने का अवसर नहीं होगा।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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