मिस यूनिवर्स महाराष्ट्र में जजिंग का नया प्रयोग, बदल रही है सौंदर्य प्रतियोगिताओं की तस्वीर..
नवी मुंबई में 5 मई को आयोजित मिस यूनिवर्स महाराष्ट्र 2026 के भव्य फिनाले में तेजस्विनी श्रीवास्तव ने विजेता का ताज अपने नाम किया. सरस्वती धर्माधिकारी प्रथम उपविजेता रहीं, जबकि आर्या को द्वितीय उपविजेता घोषित किया गया. मंच पर सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन इस बार प्रतियोगिता के परिणामों के पीछे एक ऐसा प्रयोग था जिसने भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिता जगत में नई बहस को जन्म दे दिया है. इस प्रतियोगिता में निर्णायकों ने प्रतिभागियों के मूल्यांकन के लिए “एम.आई.आर.एस” नाम की एक विशेष प्रणाली का उपयोग किया. इसका पूरा नाम “द मल्टिडायमेंशनल इंटीग्रिटी एंड रिप्रेज़ेंटेशन स्टैंडर्ड” है.
संरचित मूल्यांकन पद्धति
यह एक संरचित मूल्यांकन पद्धति है, जिसे भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिता विशेषज्ञ डॉ. अक्षता अभय प्रभु ने विकसित किया है. मिस यूनिवर्स महाराष्ट्र के राज्य निदेशक अरविंद शुक्ला और अभिषेक शुक्ला पिछले दो वर्षों से इस प्रणाली को प्रतियोगिता की चयन प्रक्रिया में शामिल कर रहे हैं.
इस बार डॉ. प्रभु स्वयं भी निर्णायक मंडल का हिस्सा थीं. उनके साथ मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 माणिका विश्वकर्मा, मिस यूनिवर्स इंडिया संगठन के राष्ट्रीय निदेशक निखिल आनंद और मिस्टर यूनिवर्स 2025 बिशन मदप्पा भी मौजूद थे. इस अवसर पर मिस टीन यूनिवर्स इंडिया 2025 कैरिसा बोपन्ना और मिस्टर यूनिवर्स 2025 के उपविजेता समर्थ चौधरी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे. कार्यक्रम में मिस यूनिवर्स इंडिया संगठन के राज्य फ्रेंचाइज़ी निदेशक अमजद खान तथा शिकारा हॉस्पिटैलिटी के स्वामी अशोक मेहरा की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही.
कैसे होता है मूल्यांकन
भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में वर्षों से प्रतिभागियों का मूल्यांकन मुख्य रूप से अनुभवी निर्णायकों की व्यक्तिगत समझ और मंच पर दिखाई देने वाले प्रभाव के आधार पर होता आया है. कई पारंपरिक विशेषज्ञ मानते हैं कि तय मानकों पर आधारित अंक प्रणाली प्रतियोगिता की स्वाभाविकता और कलात्मकता को कम कर सकती है.
पारदर्शिता की मांग भी तेज
वहीं दूसरी ओर, इस नई व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि बिना स्पष्ट और दर्ज मूल्यांकन प्रक्रिया के किसी भी परिणाम को निष्पक्ष साबित करना कठिन होता जा रहा है. आज प्रतियोगिताओं में पुरस्कार राशि, प्रतिष्ठा और पेशेवर भागीदारी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में पारदर्शिता की मांग भी तेज हो रही है.
प्रतिभागी को अलग-अलग अंक देते हैं
डॉ. अक्षता प्रभु का कहना है कि यह प्रणाली निर्णायकों की स्वतंत्र सोच को सीमित नहीं करती, बल्कि उसे व्यवस्थित करती है. उनके अनुसार अक्सर ऐसा होता है कि दो निर्णायक एक ही प्रतिभागी को अलग-अलग अंक देते हैं, लेकिन उसके पीछे का स्पष्ट कारण नहीं बता पाते. एम.आई.आर.एस इसी अंतर को कम करने का प्रयास करता है. उन्होंने कहा कि यह कोई नई सोच नहीं है, बल्कि अनुभवी निर्णायक जो मूल्यांकन वर्षों से अपने अनुभव के आधार पर करते आए हैं, उसी प्रक्रिया को एक समान और औपचारिक ढांचे में प्रस्तुत किया गया है.
डॉ. प्रभु वर्ष 2021 की “मिस इंटरनेशनल वर्ल्ड” विजेता भी रह चुकी हैं. उनकी संस्था “द इंटरनेशनल ग्लैमर प्रोजेक्ट” ने कई अंतरराष्ट्रीय विजेताओं को प्रशिक्षण दिया है. उनकी प्रशिक्षित प्रतिभागियों ने मेक्सिको में आयोजित “मिस वर्ल्ड यूनिवर्सल 2024” और अमेरिका में आयोजित “मिस कॉसमॉस इंटरनेशनल 2022” जैसी प्रतियोगिताओं में मुख्य खिताब जीते हैं.
मुख्य मूल्यांकन अधिकारी भी नियुक्त किया गया
अब इस भारतीय प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाया जाने लगा है. अमेरिका स्थित “मिस इंटरनेशनल वर्ल्ड” संगठन ने अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया में एमआईआरएस के कुछ हिस्सों को शामिल किया है. इसके अलावा डॉ. प्रभु को संगठन के नए तीन वर्षीय कार्यक्रम चक्र का रचनात्मक निदेशक और मुख्य मूल्यांकन अधिकारी भी नियुक्त किया गया है. यह कार्यक्रम सितंबर से फ्लोरिडा के पाम बीच में शुरू होगा.
किस प्रणाली को अपनाएगी सौदर्य प्रतियोगिता
डॉ. प्रभु ने इसे भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिता उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि भारतीय पद्धति का किसी अमेरिकी संगठन द्वारा अपनाया जाना अपने आप में बड़ी बात है और इस क्षेत्र में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है. फिलहाल यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि एम.आई.आर.एस आने वाले समय में पूरी सौंदर्य प्रतियोगिता उद्योग का मानक बनेगा या केवल कुछ संस्थाओं तक सीमित रहेगा. लेकिन इतना तय है कि नवी मुंबई में आयोजित this प्रतियोगिता ने जजिंग की पारंपरिक व्यवस्था और आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली के बीच नई बहस जरूर शुरू कर दी है. आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिताएं अनुभव आधारित निर्णयों पर आगे बढ़ेंगी या फिर पारदर्शी और संरचित मूल्यांकन प्रणाली को अपनाएंगी. फिलहाल, मिस यूनिवर्स महाराष्ट्र में शुरू हुआ यह प्रयोग लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है.
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