ग्रेटर नोएडा के शाहेबरी में आग का तांडव, फर्नीचर मार्केट और फैक्ट्री में मची अफरा-तफरी
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सोमवार को आग की दो बड़ी घटनाओं ने लोगों को दहशत में डाल दिया. ग्रेटर नोएडा के शाहेबरी फर्नीचर मार्केट और नोएडा सेक्टर-2 स्थित एक फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया. आग से उठता काला धुआं कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया, जिससे आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. दमकल विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया.
शाहेबरी फर्नीचर मार्केट में मची भगदड़
ग्रेटर नोएडा के शाहेबरी इलाके में स्थित फर्नीचर मार्केट में अचानक आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया. देखते ही देखते आग तेजी से फैलने लगी और कई दुकानें इसकी चपेट में आ गईं. दुकानों में रखे लकड़ी और फर्नीचर के सामान के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में भयावह रूप ले लिया.
आग लगते ही बाजार में मौजूद लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई. आसपास के लोगों ने जब आसमान में धुएं का घना गुबार देखा तो मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. सूचना मिलने के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया.
प्राथमिक जानकारी के अनुसार आग में लाखों रुपये का फर्नीचर और अन्य सामान जलकर राख हो गया. हालांकि, अभी तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है। यह पूरा मामला बिसरख थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है.
सेक्टर-2 की फैक्ट्री में भी लगी भीषण आग
दूसरी घटना नोएडा के सेक्टर-2 स्थित एक फैक्ट्री में सामने आई। थाना फेस-1 क्षेत्र के सी-35 स्थित औद्योगिक इकाई की तीसरी मंजिल पर बने टीन शेड में रखा सामान अचानक आग की चपेट में आ गया. कुछ ही देर में आग ने पूरी मंजिल को अपनी गिरफ्त में ले लिया.
फैक्ट्री से निकलता काला धुआं दूर तक दिखाई देने लगा, जिससे आसपास के लोग घबरा गए. एहतियात के तौर पर पूरी बिल्डिंग को तुरंत खाली कराया गया ताकि किसी तरह की जनहानि न हो.
दमकल विभाग ने समय रहते पाया नियंत्रण
घटना की सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दो फायर टेंडर की मदद से आग बुझाने का काम शुरू किया गया. दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया.
राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है.
आग लगने के कारणों की जांच शुरू
पुलिस और फायर विभाग अब दोनों घटनाओं की जांच में जुट गए हैं. शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की असली वजह सामने आएगी. लगातार हो रही आग की घटनाओं के बाद औद्योगिक और बाजार क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल उठने लगे हैं.
अहमदाबाद सिविल अस्पताल में छह वर्षों में 1,032 अंग और ऊतकों का दान
अहमदाबाद, 15 मई (आईएएनएस)। अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने शुक्रवार को बताया कि पिछले छह वर्षों में उसके अंगदान कार्यक्रम के तहत कुल 1,032 अंग और ऊतकों का दान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह अस्पताल भारत में शव-आधारित अंगदान के प्रमुख केंद्रों में से एक के रूप में उभर रहा है।
ताजा मामले में मेहसाणा जिले के पेशे से ड्राइवर 29 वर्षीय धर्मेंद्र दरबार को 14 मई को ब्रेन डेड घोषित किया गया। वह 4 मई को कड़ी के पास हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
हादसे के बाद से उनका इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा था। मेडिसिन विभाग के डॉ. जीतू पारिख और उनकी टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इसके बाद आम नागरिक पी.एस. पटेल और परिवार के सदस्य महेंद्रभाई झाला तथा लालसिंह झाला की काउंसलिंग के बाद धर्मेंद्र की पत्नी, भाई और बहन ने अंगदान के लिए सहमति दी।
अधिकारियों ने बताया कि परिवार के इस फैसले से लिवर और दो किडनी दान किए गए, जिससे तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा।
सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट राकेश जोशी ने बताया कि पिछले छह वर्षों में अस्पताल में 240 अंगदाताओं ने अंगदान किया है।
उन्होंने कहा, पिछले छह वर्षों में 240 दानदाताओं से 794 अंग प्राप्त हुए। इसके अलावा 194 नेत्रदान और 44 स्किन डोनेशन हुए, जिससे कुल 238 ऊतक प्राप्त हुए। इस तरह कार्यक्रम के तहत कुल 1,032 अंग और ऊतक दान किए गए हैं।
डॉ. जोशी ने बताया कि अब तक अस्पताल में 443 किडनी, 214 लिवर, 76 हृदय, 34 फेफड़े, 19 अग्न्याशय, 6 हाथ और 2 छोटी आंतों का दान किया जा चुका है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए अलग-अलग अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवन रक्षक प्रत्यारोपण संभव हो पाए हैं और मृतक अंगदान को लेकर जागरूकता भी लगातार बढ़ रही है।
एक अन्य फैसले में राज्य सरकार ने सिद्धपुर डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 12,000 रुपए से बढ़ाकर 20,160 रुपए कर दिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि यह फैसला इंटर्नशिप के दौरान युवा डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे काम को सम्मान देने के लिए लिया गया है।
उन्होंने कहा,कॉलेज के डीन और प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और स्वास्थ्य विभाग से सरकारी मानकों के अनुरूप स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की थी, जिसके बाद इस संशोधन को मंजूरी दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, बढ़ा हुआ स्टाइपेंड उन इंटर्न डॉक्टरों को सहयोग देने के लिए है, जो प्रशिक्षण के दौरान लगातार क्लिनिकल ड्यूटी और मरीजों की देखभाल में लगे रहते हैं।
--आईएएनएस
एएमटी/वीसी
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