रूस-यूक्रेन के बीच एक हजार कैदियों की अदला-बदली की तैयारी तेज: पेस्कोव
मॉस्को, 14 मई (आईएएनएस)। रूस-यूक्रेन एक और कैदियों की अदला-बदली की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए दोनों तरफ से कैदियों की सूची तय की जा रही है। मॉस्को में गुरुवार को राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “लिस्ट को लेकर बातचीत चल रही है। यही इस प्रक्रिया का सबसे मुश्किल हिस्सा है, लेकिन काम काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है।”
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, इससे पहले रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया था कि रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को मान लिया है, जिसमें 9 से 11 मई तक यूक्रेन के साथ युद्धविराम और “1,000 के बदले 1,000” कैदियों की अदला-बदली करने की बात कही गई थी।
यह युद्धविराम सोवियत संघ की द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की 81वीं वर्षगांठ के समारोह से पहले घोषित किया गया था।
उशाकोव ने कहा कि रूस और यूक्रेन की संबंधित एजेंसियां कैदियों की लिस्ट पर लगातार काम कर रही हैं और अगर समझौता हो जाता है तो अदला-बदली शुरू कर दी जाएगी।
11 मई को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने प्रस्तावित कैदी अदला-बदली के लिए 1,000 बंदियों की लिस्ट रूस को सौंप दी है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, जेलेंस्की ने यह भी कहा कि रूस के साथ चल रहे संघर्ष को खत्म किया जाना चाहिए और भरोसेमंद सुरक्षा की गारंटी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अब पुतिन खुद कह रहे हैं कि वे आखिरकार वास्तविक बातचीत के लिए तैयार हैं। हमने उन्हें थोड़ा इस दिशा में आगे बढ़ाया है और हम खुद भी काफी समय से ऐसी बातचीत के लिए तैयार थे। अब बस इसके लिए सही तरीका तय करना है।”
12 मई को रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम खत्म होने के बाद भी रूसी सेना का “स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन” जारी है।
मॉस्को ने यह भी आरोप लगाया कि युद्धविराम के दौरान यूक्रेन ने “स्पेशल ऑपरेशन जोन” में 30,383 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पीयूष गोयल ने भारत-ईयू व्यापार साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए जर्मन नेताओं से मुलाकात की
नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को जर्मनी के वरिष्ठ नेताओं और नीति निर्माताओं के साथ भारत-जर्मनी आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और भारत-ईयू व्यापार साझेदारी को आगे बढ़ाने पर एक सार्थक चर्चा की।
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, चर्चाओं का मुख्य जोर कारोबारी माहौल को मजबूत करने, निवेश के प्रवाह को बढ़ाने और टेक्सटाइल, दवा, रिन्यूएबल एनर्जी, मोबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे अहम सेक्टरों में सहयोग को गहरा करने पर था।
उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने करीबी साझेदारी और मजबूत औद्योगिक जुड़ाव के जरिए व्यापार को बढ़ाने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और मजबूत सप्लाई चेन बनाने की अपार संभावनाओं को स्वीकार किया।
मार्च में, गोयल ने कैमरून में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी14) के दौरान यूरोपीय व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक से मुलाकात की और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हुई प्रगति की समीक्षा की।
दोनों नेताओं ने एमसी14 एजेंडा के तहत अहम प्राथमिकताओं पर चर्चा की और भारत-ईयू एफटीए पर हस्ताक्षर की दिशा में चल रहे काम की प्रगति की समीक्षा की, जिसकी घोषणा पीएम नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जनवरी 2026 में नई दिल्ली में की थी।
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, हमने अपनी द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर भी चर्चा की।
दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह समझौता अब तक के सबसे बड़े व्यापारिक समझौतों में से एक है। असल में, यह सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं है। यह एक व्यापक साझेदारी को दर्शाता है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे अहम सेक्टरों में सहयोग को बढ़ावा देती है। इस एफटीए से भारत के हर क्षेत्र और हर नागरिक को फायदा होगा।
यह एफटीए नियमों पर आधारित व्यापार और आर्थिक नीतियों में स्थिरता सुनिश्चित करता है, जिससे भारत घरेलू और विदेशी निवेश के लिए और भी ज्यादा आकर्षक बन जाता है। इससे छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप और कामगारों के लिए अनगिनत अवसर पैदा होंगे।
भारत ने व्यापारिक मूल्य के हिसाब से ईयू को अपने 99 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात के लिए बाजार तक अभूतपूर्व पहुंच हासिल की है, जिससे मेक इन इंडिया पहल को जबरदस्त मजबूती मिली है। मंत्री ने कहा कि यह एफटीए टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़ा, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान सेक्टरों को निर्णायक बढ़ावा देता है।
--आईएएनएस
एससीएच
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