Iran America War Update: Trump के ऑर्डर पर ईरान का पलटवार..| Air Strike | War Breaking | Top | N18G
Iran America War Update: Trump के ऑर्डर पर ईरान का पलटवार..| Air Strike | War Breaking | Top | N18G ईरान से मिले सीज़फ़ायर प्रस्ताव पर ट्रंप भड़के हुए हैं । उन्होंने ईरान को धमकी दी है कि युद्ध में जो नहीं होना चाहिए था अब वही होगा । ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को कचरा कहकर खारिज कर दिया है...इधर ईरान ने ट्रंप के बयान के बाद 12 देशों से बदला लेने का ऐलान कर दिया है...ईरान के कमांडर इब्राहिम रेजाई ने परमाणु हथियार ग्रेड यूरेनियम बनाने की चेतावनी दी है...जिसके बाद अमेरिका ने परमाणु पनडुब्बी को खाड़ी में भेज दिया है । #Iran #America #Israel #MiddleEast #BreakingNews news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|
हरीश राणा के अंगदान पर सुप्रीम कोर्ट ने की परिवार की सराहना, करुणा का बड़ा उदाहरण बताया
नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 31 वर्षीय हरीश राणा के परिवार की सराहना की। अदालत ने कहा कि बेटे की मौत के बाद उसके अंग दान करने का फैसला मानवता और करुणा का बड़ा उदाहरण है।
हरीश राणा को करीब 13 साल तक कोमा जैसी स्थिति में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी थी।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच को बताया गया कि हरीश राणा का 24 मार्च को निधन हो गया। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के आदेश के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल के पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था।
परिवार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि हरीश राणा का डेथ सर्टिफिकेट रिकॉर्ड में जमा कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मौत के बाद हरीश की हार्ट वाल्व और आंखों की कॉर्निया दान की गईं, क्योंकि यही अंग दान के योग्य पाए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिवार ने अपूरणीय दुख सहने के बावजूद अंगदान कर बहुत बड़ा और निस्वार्थ काम किया है। अदालत ने कहा कि हरीश ने प्यार और करुणा के साथ दुनिया को अलविदा कहा और उनके अंगदान से कई लोगों की जिंदगी में रोशनी आएगी।
अदालत ने यह भी कहा कि बिना जरूरत लंबे समय तक मशीनों और ट्यूबों के सहारे जीवन बढ़ाना हमेशा सम्मानजनक देखभाल नहीं माना जा सकता। यह मामला दिखाता है कि चिकित्सा विज्ञान की भी सीमाएं हैं और व्यक्ति की गरिमा व इच्छा का सम्मान जरूरी है।
बेंच ने कहा, इस मामले ने सभी को बहुत कुछ सिखाया है, हमें जज के रूप में भी।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरीश राणा का डेथ सर्टिफिकेट तीन साल तक केस रिकॉर्ड में सुरक्षित रखा जाए। साथ ही एम्स की रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रखने का आदेश दिया।
अदालत ने एम्स के डॉक्टरों, परिवार की ओर से पेश वकील रश्मि नंदकुमार और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की भी सराहना की।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जुलाई तक इस मामले में पहले दिए गए निर्देशों के पालन पर नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
दरअसल, हरीश राणा को 13 साल पहले चौथी मंजिल से गिरने के बाद गंभीर सिर की चोट लगी थी।
मेडिकल बोर्ड ने बताया था कि वह स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे, उन्हें 100 प्रतिशत दिव्यांगता और पूरे शरीर में लकवे जैसी स्थिति थी। सांस लेने और खाना देने के लिए लगातार मेडिकल सपोर्ट की जरूरत थी और ठीक होने की संभावना लगभग नहीं थी।
हरीश के माता-पिता ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पैसिव यूथेनेशिया पर विचार करने के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने की मांग की थी। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां मेडिकल रिपोर्ट और हालत को देखते हुए इलाज हटाने की अनुमति दी गई।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम
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