मुलायम सिंह यादव और साधना की प्रेम कहानी कैसे हुई थी शुरू, ऐसे मिला था प्रतीक को बेटे का दर्जा
Prateek Yadav Death: समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 13 मई 2026 की सुबह निधन हो गया. प्रतीक 38 वर्ष के थे उन्हें बॉडी बिल्डिंग का शौक था. प्रतीक यादव सपा संस्थापक मुलायम यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे. ऐसे में हम आपको आज मुलायम यादव और साधना गुप्ता की प्रेम कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं कि कैसे मुलायम सिंह यादव ने साधना गुप्ता को दो दशक बाद अपनी पत्नी का दर्जा दिया और प्रतीक यादव को अपना बेटा स्वीकार किया. मुलायम और साधना का रिश्ता अस्पताल से शुरू हुआ अंत भी वहीं आकर हुआ.
1982 में हुई थी दोनों की मुलाकात
मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता की मुलाकात 1982 में हुई थी. हालांकि दोनों को शादी के लिए 20 साल तक इंतजार करना पड़ा. दरअसल, मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी थीं. उन्हें लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. जहां साधना गुप्ता बतौर नर्स काम कर रही थीं. इसी दौरान मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता की मुलाकात हुई और उसके बाद नजदीकियां बढ़ने लगीं. साधना गुप्ता की शादी फर्रुखाबाद के चंद्रप्रकाश गुप्ता से हुई थी, हालांकि साल 1987 में वह अपने पति से अलग हो गईं. तब उनका एक बेटा बेटा प्रतीक था.
मां की सेवा करने प्रभावित हुए थे मुलायम
जब लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में मुलायम सिंह यादव की मां का इलाज चल रहा था वहां साधना गुप्ता उनकी दिन-रात सेवा करती. एक दिन अस्पताल में एक नर्स जब मुलायम की मां मूर्ती देवी को इंजेक्शन लगाने में गलती कर रही थी, तो साधना गुप्ता ने उसे टोक दिया. साधना गुप्ता के इस समर्पण ने मुलायम सिंह यादव काफी प्रभावित हुए और उनके दिल में साधना के लिए सम्मान और प्रेम गहरा हो गया. अस्पताल में साधना गुप्ता ने एक बेटी की तरह मूर्ती देवी की सेवा की. ये सब देखकर मुलायम सिंह यादव उन्हें दिल दे बैठे. दिक्कत ये थी कि मुलायम सिंह यादव तब शादीशुदा थे और साधना गुप्ता से 20 साल बढ़े थे. बावजूद इसके मुलायम सिंह और साधना गुप्ता की प्रेम कहानी की चर्चा होने लगी.
मुलायम ने ऐसे दिया प्रतीक को पिता का नाम
वरिष्ठ पत्रकार सुनीता आर्यन ने मुलायम सिंह यादव को लेकर लिखा कि पहली पत्नी के रहते ही मुलायम और साधना का रिश्ता गहरा हो गया था. मुलायम सिंह यादव ने साधना के पहले पति से हुए बेटे प्रतीक को अपना नाम देना शुरू कर दिया था. साल 1994 में प्रतीक के स्कूल फॉर्म में भी पिता का नाम एमएस यादव लिखा गया और पते में मुलायम के दफ्तर का पता था. हालांकि अभी भी प्रतीक सबकी नजरों में मुलायम के बेटे नहीं थे.
2003 में हुआ मुलायम की पहले पत्नी का निधन
बता दें कि मुलायम सिंह यादव की पहली शादी 1957 में मालती देवी से हुई थी. उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 18 वर्ष थी. 1973 में अखिलेश यादव का जन्म हुआ. बेटे के जन्म के बाद मालती देवी बीमार रहने लगीं. लंबी बीमारी के बाद 24 मई 2003 को उनका निधन हो गया.
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साधना गुप्ता को 20 साल बाद दिया पत्नी का दर्जा
मुलायम यादव की पहली पत्नी मालती देवी के निधन के बाद मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक तौर पर साधना को अपनी पत्नी का दर्जा दिया. हालांकि इससे अखिलेश यादव काफी नाराज हुए. वह नहीं चाहते थे कि साधना उनकी मां की जगह लें. साल 2007 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर इस बात को स्वीकार किया कि साधना उनकी पत्नी हैं और प्रतीक उनका बेटा है. उसके बाद उनके रिश्ते पर मुहर लग गई. 9 जुलाई 2022 को साधना गुप्ता का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया. उनके निधन के मात्र तीन महीने बाद 10 अक्टूबर 2022 को मुलायम सिंह यादव ने भी उसी अस्पताल में आखिरी सांस ली.
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NEET विवाद से बढ़ी छात्रों की चिंता, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा पेपर लीक मामला
Neet Paper Leak: देश में हर साल लाखों बच्चे नीट की परीक्षा देते हैं. किसी का सपना डॉक्टर बनने का होता है, तो कोई अपने परिवार की उम्मीद लेकर परीक्षा हॉल तक पहुंचता है. इस परीक्षा के पीछे सिर्फ किताबें और पढ़ाई नहीं होती, बल्कि कई सालों की मेहनत, परिवार का त्याग और बच्चों का संघर्ष भी जुड़ा होता है. छोटे शहरों और गांवों से आने वाले कई छात्र ऐसे होते हैं जो सीमित सुविधाओं में पढ़ाई करते हैं.
माता-पिता अपनी जरूरतें कम करके बच्चों की कोचिंग और पढ़ाई पर खर्च करते हैं. इसलिए जब नीट जैसी परीक्षा को लेकर पेपर लीक की खबर सामने आती है, तो सबसे ज्यादा दुख उन छात्रों को होता है जिन्होंने ईमानदारी से तैयारी की होती है. इस बार भी नीट - यूजी 2026 को लेकर इसी तरह की चर्चा शुरू हुई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. अब हर छात्र और अभिभावक यही जानना चाहता है कि आगे क्या होगा और परीक्षा को लेकर क्या फैसला लिया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. याचिका में दोबारा परीक्षा कराने और पूरी प्रक्रिया को अदालत की निगरानी में करवाने की मांग की गई है. इसके बाद छात्रों की चिंता और बढ़ गई है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने महीनों तक लगातार पढ़ाई की और अब उन्हें डर लग रहा है कि उनकी मेहनत पर असर न पड़ जाए.
मेडिकल की तैयारी करने वाले छात्रों पर पहले से ही काफी दबाव होता है. सुबह से रात तक पढ़ाई, टेस्ट, कोचिंग और लगातार प्रतियोगिता का तनाव उन्हें मानसिक रूप से थका देता है. ऐसे में जब परीक्षा के बाद विवाद सामने आते हैं, तो बच्चों का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है. कई छात्र सोशल मीडिया पर भी अपनी परेशानी बता रहे हैं. कुछ का कहना है कि अगर दोबारा परीक्षा होती है, तो उन्हें फिर से उसी तनाव और दबाव से गुजरना पड़ेगा.
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सिस्टम पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में NTA यानी नेशनल टेस्ट एजेंसी का नाम सबसे ज्यादा सामने आ रहा है, क्योंकि वही परीक्षा आयोजित करती है. देशभर में करोड़ों छात्रों की परीक्षा करवाना आसान काम नहीं है. परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, प्रश्नपत्र की सुरक्षा और रिजल्ट जारी करना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है. लेकिन जब कहीं गड़बड़ी की खबर आती है, तो सवाल पूरे सिस्टम पर उठने लगते हैं. हालांकि जांच एजेंसियां लगातार मामले की जांच कर रही हैं और कई जगहों पर कार्रवाई भी हुई है.
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परीक्षाओं में समय के साथ सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है. आज तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए परीक्षा सुरक्षा के तरीके भी आधुनिक होने चाहिए. डिजिटल निगरानी और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था से आने वाले समय में ऐसी समस्याओं को कम किया जा सकता है. अच्छी बात यह है कि इस पूरे मामले के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने पर चर्चा शुरू हुई है.
स्टूडेंट के मन में डर और अनिश्चितता
इस विवाद का सबसे ज्यादा असर छात्रों की मानसिक स्थिति पर पड़ा है. कई छात्र रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनके मन में डर और अनिश्चितता बनी हुई है. कुछ छात्रों का कहना है कि अगर कहीं गलत तरीके से पेपर लीक हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो सके. वहीं अभिभावकों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है.
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे की मेहनत का सही परिणाम मिले. यही वजह है कि अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है. अदालत जो भी फैसला देगी, उसका असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा. इसलिए इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देखा जा रहा है. शिक्षा सिर्फ परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य और आत्मविश्वास से भी जुड़ी होती है. इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा बना रहना बहुत जरूरी है.
अभिभावकों को है इंतजार
आखिर में सबसे जरूरी बात यही है कि छात्रों का विश्वास टूटना नहीं चाहिए. देश में लाखों बच्चे मेहनत करके आगे बढ़ना चाहते हैं और उनके सपनों की रक्षा करना जरूरी है. किसी भी बड़ी परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे अहम होती है. अगर छात्र को यह भरोसा रहेगा कि उसकी मेहनत सुरक्षित है, तभी वह पूरे मन से तैयारी कर पाएगा.
इस पूरे मामले से एक बात जरूर सामने आई है कि परीक्षा व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने की जरूरत है. उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी और छात्रों का भरोसा पहले से ज्यादा मजबूत बनेगा. फिलहाल छात्र, अभिभावक और शिक्षक सभी आगे आने वाले फैसलों का इंतजार कर रहे हैं और यही उम्मीद कर रहे हैं कि जो भी निर्णय हो, वह छात्रों के हित को ध्यान में रखकर लिया जाए
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