देवास में शादी समारोह बना युद्ध का मैदान: रात का विवाद सुबह तलवार और पाइप तक पहुंचा, 29 पर केस
मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक शादी समारोह उस समय हिंसा का मैदान बन गया, जब मामूली कहासुनी ने रातभर चले खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। संगम गार्डन में आयोजित विवाह समारोह में पहले कार का कांच टूटने और ट्राले पर डांस को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और शादी का माहौल चीख-पुकार और भगदड़ में बदल गया।
रात में शुरू हुआ विवाद सुबह और खतरनाक हो गया। अगले दिन ग्राम ओड़ में हनुमान मंदिर के सामने दोनों पक्ष फिर भिड़ गए। इस बार मामला इतना बढ़ गया कि तलवार, पाइप और लाठियां तक चल गईं। करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों के कुल 29 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संगम गार्डन में शादी के दौरान कैसे शुरू हुआ विवाद?
देवास के संगम गार्डन में चौधरी परिवार का विवाह समारोह चल रहा था। शादी में बड़ी संख्या में रिश्तेदार और मेहमान मौजूद थे। डीजे और ट्राले पर नाच-गाने का कार्यक्रम चल रहा था। माहौल पूरी तरह खुशियों से भरा हुआ था, लेकिन अचानक एक छोटी सी बात ने पूरे समारोह को तनाव में बदल दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्राले पर डांस के दौरान एक युवक को नीचे उतार दिया गया। इसके बाद माहौल बिगड़ने लगा। इसी बीच पार्किंग में खड़ी एक कार का कांच टूट गया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई।
कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों तरफ से लोग एक-दूसरे पर हमला करने लगे। बेल्ट, डंडे और लात-घूंसों से जमकर मारपीट हुई। शादी में मौजूद महिलाएं और बच्चे डरकर इधर-उधर भागने लगे। कई लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन गुस्से में दोनों पक्ष किसी की सुनने को तैयार नहीं थे।
कार का कांच टूटने से बढ़ा विवाद
पुलिस जांच में सामने आया है कि विवाद की शुरुआत कार का कांच टूटने से हुई थी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला सिर्फ इसी तक सीमित नहीं था। दोनों पक्षों के बीच पहले से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था और शादी समारोह में हुई घटना ने पुराने तनाव को फिर हवा दे दी।
पहले पक्ष के फरियादी सोनू चौधरी ने पुलिस को बताया कि वह अपने साथियों के साथ शादी में शामिल होने आया था। इसी दौरान राजेंद्र नाम के युवक ने उस पर कार का कांच तोड़ने का आरोप लगाया। सोनू ने आरोप से इनकार किया तो दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।
रातभर तनाव के बाद सुबह फिर आमने-सामने आए दोनों पक्ष
शादी समारोह में हुए विवाद के बाद लोग यह मान रहे थे कि मामला शांत हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंगलवार सुबह ग्राम ओड़ में हनुमान मंदिर के सामने दोनों पक्ष फिर से आमने-सामने आ गए।
सुबह का विवाद रात से भी ज्यादा खतरनाक साबित हुआ। इस बार दोनों पक्ष पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोगों के हाथ में तलवारें थीं, जबकि कई लोग पाइप और लाठियां लेकर आए थे।
कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। महिलाओं और बुजुर्गों में डर का माहौल बन गया। दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर हमला किया।
पुलिस ने दोनों पक्षों पर दर्ज किए केस
देवास पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों के खिलाफ अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार सुबह हुए विवाद में फरियादी गोविंद चौधरी की शिकायत पर राजेंद्र सावंत, प्रभु, अंतर, अनिल, भीम, ईश्वर, गोपाल, जसमत और नीरज चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
वहीं दूसरे पक्ष से विजेंद्र चौधरी की शिकायत पर सजन, हेमराज, कोकसिंह, जीवन उर्फ बाबू, नेपाल, गोविंद, तुषार, धर्मेंद्र और सोनू चौधरी के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
छोटे भाई प्रतीक यादव के निधन पर बोले अखिलेश यादव, कहा – ‘कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी थी’
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में आज एक गहरा सन्नाटा पसरा था, जो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के परिवार पर आए दुख की गवाही दे रहा था। दरअसल इस प्रतिष्ठित अस्पताल में अखिलेश यादव अपने छोटे भाई प्रतीक यादव के असामयिक निधन के बाद पहुंचे थे, जहां प्रतीक का पोस्टमार्टम किया जा रहा था। यह घटना न सिर्फ यादव परिवार के लिए एक बड़ा आघात है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इसने शोक की लहर दौड़ा दी है। एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती का इस तरह व्यक्तिगत त्रासदी का सामना करना, स्वाभाविक रूप से सबकी संवेदनाओं का केंद्र बन गया है।
दजरासल अखिलेश यादव ने इस दुखद घड़ी में मीडिया से बात करते हुए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। उनका बयान बेहद भावुक था, जिसमें उन्होंने अपने छोटे भाई के प्रति गहरा स्नेह और उनके खो जाने का दर्द साफ झलका। उन्होंने कहा, “बहुत दुख है कि वो आज हमारे बीच नहीं हैं।” यह वाक्य उनकी पीड़ा को साफ बयां कर रहा था। इस असामयिक क्षति ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
कुछ ही दिन पहले उनकी प्रतीक से मुलाकात हुई थी
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि यह क्षति उनके लिए और भी मार्मिक है क्योंकि कुछ ही दिन पहले उनकी प्रतीक से मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रतीक को व्यक्तिगत रूप से स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी थी। अखिलेश यादव ने प्रतीक से कहा था कि वे अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें और अपने कारोबार को भी आगे बढ़ाने पर ध्यान दें। यह जानकारी देते हुए अखिलेश यादव के चेहरे पर दुख साफ दिखाई दे रहा था, मानो उन्हें इस बात का मलाल हो कि उनकी सलाह के बावजूद यह अनहोनी हो गई।
पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे
प्रतीक यादव के निधन के बाद उपजे कानूनी पहलुओं पर भी अखिलेश यादव ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा, “स्वाभाविक है कि जो कानून कहता है और जो परिवार के लोग कहेंगे, उस हिसाब से हम लोग बात को मानेंगे।” यह बयान दर्शाता है कि दुख की इस घड़ी में भी वे कानूनी और पारिवारिक मर्यादाओं का पूरा सम्मान करने को प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि “जो कानूनी रास्ता हैं वो हम अपनाएंगे,” जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि किसी भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए परिवार तैयार है।
उन्हें “बहुत अच्छा लड़का” बताया
अखिलेश यादव ने अपने छोटे भाई प्रतीक के व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें “बहुत अच्छा लड़का” बताया। यह उनके बीच के गहरे रिश्ते और प्रतीक के सरल स्वभाव को दर्शाता है। एक नेता के तौर पर अखिलेश यादव का यह व्यक्तिगत दुख उनके राजनीतिक जीवन में भी एक भावुक पड़ाव है। पूरे घटनाक्रम पर उनकी सीधी और स्पष्ट प्रतिक्रिया ने सबको प्रभावित किया है।
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