Sanjay Singh: AAP सांसद संजय सिंह दिखाया बड़ा दिल, कंकाल लेकर बैंक जाने वाले शख्स को भेजी मदद
Sanjay Singh: उड़ीसा में अपनी बहन के कंकाल को बैंक लेकर जाने वाले शख्स को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मदद भेजी है। बताया जा रहा है कि पीड़ित आदिवासी शख्स अपनी बहन के खाते में जमा 19 हजार रुपए की धनराशि को पाने के लिए शव को लेकर बैंक पहुंच गया था। इस घटना के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
बताया जा रहा है कि उस शख्स ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि जब वह बैंक में अपनी बहन के खाते में जमा धनराशि को लेने पहुंचा तो बैंक के कर्मचारियों ने कहा कि अपनी बहन को लेकर आओ। जब पीड़ित ने बताया कि उसकी बहन की मौत हो चुकी है तो बैंक वालों ने कहा कि उसके मरने का प्रमाण पत्र लेकर आओ।
इसके बाद पीड़ित शख्स ने इस घटना को अंजाम दिया। वह अपनी बहन के शव को कब्र से निकाल कर बैंक लेकर पहुंच गया। पीड़ित शख्स की पहचान आदिवासी जीतू मुंडा के रूप में हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जीतू की उम्र 50 साल बताई जा रही है और वह उड़ीसा के डियानाली गांव का रहने वाला है।
उड़ीसा के क्योझर जिले में रहने वाले जीतू मुंडा जी का हृदय विदारक वीडियो पूरी दुनिया ने देखा।
— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) May 1, 2026
दुख हुआ की विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली डबल इंजन सरकार के राज में एक आदिवासी भाई को 20 हज़ार रू के लिए अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक जाना पड़ा।
अपनी सैलरी से 50 हज़ार रु सहयोग भेजा है।… pic.twitter.com/UXstyvCyDj
50 हजार की भेजी मदद
बताया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अपने वेतन से 50 हजार रुपए की मदद भेजी हैं। इसके बारे में सांसद ने जानकारी साझा करते हुए X पोस्ट में लिखा कि " उड़ीसा के क्योझर जिले में रहने वाले जीतू मुंडा जी का हृदय विदारक वीडियो पूरी दुनिया ने देखा। दुख हुआ की विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली डबल इंजन सरकार के राज में एक आदिवासी भाई को 20 हज़ार रुपए के लिए अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक जाना पड़ा। अपनी सैलरी से 50 हज़ार रुपए सहयोग भेजा है।"
उड़ीसा का कर्जदार हूं-संजय सिंह
आप सांसद ने आगे लिखा कि, " प्रदेश अध्यक्ष निशिकांत मोहापात्रा और AAP की टीम ने जाकर जीतू मुंडा जी से बात कराई गांव में पानी की भी समस्या है उसका भी समाधान करेंगे। उड़ीसा के इसी जिले के OSME से मैंने पढ़ाई की थी। उड़ीसा का मुझ पर क़र्ज़ है और मैं हमेशा वहाँ के लोगों के साथ खड़ा हूँ।"
भारत में AI कंटेंट पर आज से नए नियम हुए लागू, सोशल मीडिया को डीपफेक वीडियो 3 घंटे में हटाना होगा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक से पैदा हो रहे खतरों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आज 20 फरवरी 2026 से लागू हुए नए नियमों के अनुसार, अब AI की मदद से बनाए गए किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो पर एक स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों को किसी भी गैर-कानूनी या आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के मात्र 3 घंटे के भीतर अपने प्लेटफॉर्म से हटाना होगा।
यह कदम इंटरनेट को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। पहले सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था, जिसे अब घटाकर 3 घंटे कर दिया गया है। सरकार ने 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी किया था।
AI कंटेंट पर ‘डिजिटल स्टैम्प’ और ‘मेटाडेटा’ अनिवार्य
नए नियमों के तहत AI से बने कंटेंट की पहचान सुनिश्चित करने के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है।
1. AI लेबल: अब हर AI-जनित कंटेंट पर एक विजिबल मार्कर या ‘डिजिटल स्टैम्प’ लगाना होगा, जिससे यूजर को साफ पता चल सके कि यह कंटेंट असली नहीं है, बल्कि AI से बनाया गया है। उदाहरण के लिए, वीडियो पर ‘AI Generated’ जैसा लेबल दिख सकता है।
2. टेक्निकल मार्कर (मेटाडेटा): कंटेंट पर दिखने वाले लेबल के अलावा, फाइल की कोडिंग में एक ‘डिजिटल डीएनए’ भी जोड़ा जाएगा। इस मेटाडेटा में यह जानकारी छिपी होगी कि कंटेंट किस AI टूल से, कब और किस प्लेटफॉर्म पर बनाया गया। यह मार्कर कानूनी जांच में अपराधियों के सोर्स तक पहुंचने में मदद करेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस लेबल या मेटाडेटा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ गैर-कानूनी होगी। अगर कोई यूजर इसे हटाने की कोशिश करता है, तो प्लेटफॉर्म को उस कंटेंट को डिलीट करना होगा।
प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बढ़ी, ‘सेफ हार्बर’ की सुरक्षा सशर्त
सरकार ने अब कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ा दी है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी यूजर AI-जनित कंटेंट अपलोड करते समय इसकी घोषणा करे। अगर कोई प्लेटफॉर्म बिना डिस्क्लोजर के ऐसे कंटेंट को पब्लिश होने देता है, तो उसे ही जिम्मेदार माना जाएगा।
आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत कंपनियों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा, जिसे ‘सेफ हार्बर’ कहते हैं, अब इन नियमों के पालन पर निर्भर करेगी। अगर कोई कंपनी शिकायत मिलने पर 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट नहीं हटाती है, तो उसका यह सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा और उस पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
“जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
किन चीजों पर लागू होंगे नियम?
यह नियम मुख्य रूप से सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) पर केंद्रित हैं, यानी ऐसा ऑडियो, वीडियो या फोटो जिसे AI से इस तरह बनाया या बदला गया हो कि वह किसी असली व्यक्ति या घटना जैसा प्रतीत हो। हालांकि, फोटो की ब्राइटनेस बढ़ाना, वीडियो कंप्रेस करना या सबटाइटल जोड़ने जैसे सामान्य एडिटिंग कामों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। लेकिन अगर AI का इस्तेमाल फर्जी मार्कशीट या सरकारी दस्तावेज बनाने जैसे गैर-कानूनी कामों के लिए होता है, तो उसे कोई छूट नहीं मिलेगी।
चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी या किसी व्यक्ति की नकल उतारने (इम्पर्सनेशन) के लिए AI का इस्तेमाल एक गंभीर अपराध माना जाएगा। नियम न मानने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के मौजूदा प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 3 साल तक की जेल भी शामिल है।
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