पीएम मोदी की अपील से एक साल में अल्पकालिक आर्थिक झटके से उबर सकता है भारत: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक साल के आर्थिक समायोजन ढांचे की अपील सही और व्यावहारिक कदम है। यह कदम अल्पकालिक आर्थिक दबाव को संभालने के लिए है, और अगले नौ महीनों में अर्थव्यवस्था में सुधार संभव है। यह बात दुबई स्थित एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक के वेल्थ मैनेजमेंट निदेशक डॉ. धर्मेश भाटिया ने सोमवार को न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में कही।
आईएएनएस से बात करते हुए डॉ. भाटिया ने कहा कि इस तरह की अस्थायी आर्थिक चुनौतियां सामान्य आर्थिक चक्र का हिस्सा होती हैं, और अगर नीतियां और आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहें, तो इनका असर बाद में खत्म किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, तीन महीने का आर्थिक दबाव समय के साथ पूरी तरह से रिकवर किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की एक साल के आर्थिक समायोजन की अपील पर डॉ. भाटिया ने कहा कि यह समयसीमा उत्पादन और व्यापक आर्थिक चक्र के हिसाब से बिल्कुल सही बैठती है।
उन्होंने बताया कि उत्पादन चक्र आमतौर पर सालाना आधार पर आंका जाता है, जहां छोटे समय के झटकों को लंबे समय में संभाल लिया जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती तीन महीने का आर्थिक दबाव अगले कुछ महीनों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सही कदम उठाने से इसकी भरपाई संभव है।
डॉ. भाटिया ने कहा, पहले तीन महीने तनाव के दौर होते हैं। इसका असर अगले छह से नौ महीनों तक रह सकता है, लेकिन अगर इस दौरान सुधारात्मक कदम उठाए जाएं तो शुरुआती नुकसान की पूरी भरपाई की जा सकती है।
गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर डॉ. भाटिया ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि भारत का व्यापार घाटा मुख्य रूप से कच्चे तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात की वजह से बढ़ता है, इसलिए यह सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
उन्होंने आईएएनएस को बताया, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। यह मूल रूप से आयात कम करने और खपत को नियंत्रित करने की अपील है।
डॉ. भाटिया ने कहा कि सोने का आयात कम किया जा सकता है, लेकिन ऊर्जा पर निर्भरता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।
उन्होंने कहा, हम सोने के बिना रह सकते हैं, लेकिन तेल के बिना नहीं। तेल की बढ़ती कीमतों का दोहरा असर पड़ता है — आयात बिल बढ़ता है और डॉलर का बहाव भी ज्यादा होता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों का मकसद कम समय में खपत के दबाव को नियंत्रित करना है, ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे और मध्यम अवधि में अर्थव्यवस्था और मजबूत होकर उभरे।
--आईएएनएस
डीबीपी
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बंगाल की नई सरकार में विभागों का बंटवारा, दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को मिली अहम जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार ने प्रशासनिक कामकाज को तेज करने के लिए प्रमुख मंत्रालयों की जिम्मेदारियां अलग-अलग नेताओं को सौंप दी हैं. नई कैबिनेट में कई बड़े चेहरों को अहम विभाग दिए गए हैं, जिससे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकताएं भी साफ होती नजर आ रही हैं.
अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास विभाग
सरकार में सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी की तेजतर्रार नेता अग्निमित्रा पॉल को लेकर हो रही है. उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी पकड़ मजबूत है और वे इस विभाग के जरिए महिला सुरक्षा, पोषण और सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा सकती हैं.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बंगाल में महिला वोटरों को साधने के लिए यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है. अग्निमित्रा पॉल लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रही हैं और आक्रामक अंदाज के लिए जानी जाती हैं.
दिलीप घोष को मिला महत्वपूर्ण मंत्रालय
वरिष्ठ नेता दिलीप घोष को भी सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें उद्योग एवं संसदीय कार्य विभाग सौंपा गया है. माना जा रहा है कि राज्य में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक माहौल मजबूत करने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी.
दिलीप घोष लंबे समय तक संगठन की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और बंगाल में पार्टी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है. ऐसे में सरकार ने उन्हें प्रशासनिक मोर्चे पर भी अहम भूमिका देने का फैसला किया है.
निसिथ प्रमाणिक को गृह राज्य विभाग की जिम्मेदारी
नई कैबिनेट में निसिथ प्रमाणिक को गृह राज्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. राज्य में कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहे हैं. ऐसे में उनकी नियुक्ति को सरकार के सख्त प्रशासनिक रुख से जोड़कर देखा जा रहा है.
सरकार का कहना है कि राज्य में राजनीतिक हिंसा, घुसपैठ और अपराध पर नियंत्रण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा. इसी वजह से अनुभवी नेताओं को रणनीतिक विभाग सौंपे गए हैं.
विकास और प्रशासन पर फोकस
नई सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि उसका फोकस विकास, निवेश, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर रहेगा. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विभागों के बंटवारे के बाद कहा कि सभी मंत्री जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे.
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, विभागों के इस वितरण से सरकार ने संगठन और प्रशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई टीम बंगाल में अपने वादों को कितनी तेजी से जमीन पर उतार पाती है.
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