दिल्ली एनसीआर के टेक इकोसिस्टम ने 2026 की पहली तिमाही में जुटाए 1.7 अरब डॉलर
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। दिल्ली एनसीआर के टेक इकोसिस्टम ने 2026 की पहली तिमाही में 110 राउंड्स में 1.7 अरब डॉलर जुटाए हैं, जो कि पिछले साल जुटाई गई राशि 1.9 अरब डॉलर से कम है। इसकी वजह निवेशकों का चयनात्मक रहना और चुनिंदा सौदों पर केंद्रित रहना है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की रिपोर्ट में पूंजी संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव का जिक्र किया गया है, क्योंकि 2025 की पहली तिमाही में सौदों की संख्या 153 से घटकर 110 रह गई, जबकि शीर्ष तीन सौदों का मूल्य 1.2 अरब डॉलर था, जो तिमाही के कुल निवेश का 71 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ट्रेंड बाजार में गिरावट का संकेत नहीं देती, बल्कि चयनित निवेश का संकेत देती है। कंपनियों ने लेट-स्टेज फंडिंग राउंड में 1.2 अरब डॉलर, अर्ली-स्टेज में 362 मिलियन डॉलर और सीड-स्टेज में 147 मिलियन डॉलर जुटाए गए। आंकड़ों से सभी फंडिंग स्तरों पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेश का मिलाजुला रुझान झलकता है।
2026 की पहली तिमाही में एंटरप्राइज इंफ्रास्ट्रक्चर को 869.1 मिलियन डॉलर का निवेश मिला। पर्यावरण प्रौद्योगिकी 434 मिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रही, जिसके बाद एंटरप्राइज एप्लिकेशन क्षेत्र का स्थान रहा।
इन तीनों क्षेत्रों ने मिलकर तिमाही के कुल 1.7 अरब डॉलर में से 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश प्राप्त किया, जो बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश के क्षेत्र में निर्णायक बदलाव का संकेत देता है।
डेटा सेंटर प्रदाताओं ने एक ही दौर में 710 मिलियन डॉलर के साथ व्यावसायिक मॉडलों में अग्रणी स्थान प्राप्त किया, इसके बाद उन्नत सौर ऊर्जा उत्पादन 344 मिलियन डॉलर और विपणन अनुकूलन 150 मिलियन डॉलर के साथ रहे।
बी2सी ग्रोसरी ई-कॉमर्स, इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता और ईवी चार्जिंग सॉल्यूशन भी शीर्ष दस में शामिल थे, लेकिन इन्हें काफी कम पूंजी आवंटन मिला, जो कि क्रमशः 40.4 मिलियन डॉलर, 49 मिलियन डॉलर और 27.8 मिलियन डॉलर था।
रिपोर्ट में इस ट्रेंड का विश्लेषण करते हुए कहा गया है कि राजधानी शहर की फंडिंग प्राथमिकताएं उपभोक्ता गति की तुलना में बुनियादी ढांचे की स्थिरता के अनुरूप हैं।
दिल्ली एनसीआर में 2026 की पहली तिमाही में 9 अधिग्रहण दर्ज किए गए - जो 2025 की पहली तिमाही की संख्या के बराबर है - जबकि आईपीओ बाजार में केवल एक ही लिस्टिंग हुई।
2026 की पहली तिमाही में कुल पूंजी का 52 प्रतिशत हिस्सा गुरुग्राम के पास रहा, जो क्षेत्रीय फंडिंग में सबसे आगे था। इसके बाद नोएडा 27 प्रतिशत के साथ दूसरे और दिल्ली 20 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर था। इन तीनों शहरों का कुल फंडिंग में 99 प्रतिशत हिस्सा रहा।
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अप्रैल में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 34 प्रतिशत बढ़ा, इक्विटी म्यूचुअल फंड में हुआ 38,440 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। सोमवार को जारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में अप्रैल के दौरान निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी रही। इस दौरान कुल इंडस्ट्री इनफ्लो बढ़कर 3.22 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में भी जोरदार निवेश देखने को मिला।
आंकड़ों के अनुसार, एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अप्रैल के दौरान 38,440.20 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया।
इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड सबसे आगे रहे, जहां अप्रैल में 10,147.85 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
इसके अलावा, स्मॉल-कैप फंड्स में 6,885.90 करोड़ रुपए और मिड-कैप फंड्स में 6,551.40 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया। वहीं, लार्ज-कैप फंड्स में भी 2,524.61 करोड़ रुपए का निवेश आया।
एएमएफआई के मुताबिक, अप्रैल में गोल्ड ईटीएफ में 3,040.3 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश हुआ, जो महीने-दर-महीने आधार पर 34 प्रतिशत अधिक है।
30 अप्रैल तक गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।
दुनिया भर में भी निवेशकों ने अप्रैल के दौरान गोल्ड ईटीएफ में दोबारा निवेश बढ़ाया।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, अप्रैल में वैश्विक गोल्ड ईटीएफ में 6.6 अरब डॉलर का निवेश आया। इसमें यूरोप के फंड्स सबसे आगे रहे और सभी क्षेत्रों में सकारात्मक निवेश दर्ज किया गया।
डेट म्यूचुअल फंड्स में अप्रैल के दौरान 2.47 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया, जिसमें ओवरनाइट और लिक्विड फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश देखा गया।
ओवरनाइट फंड्स में 31,420.45 करोड़ रुपए और लिक्विड फंड्स में 1.65 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
इससे पहले अप्रैल में घरेलू म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2025-26 का समापन 73.73 लाख करोड़ रुपए के एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) के साथ किया था।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद पूरे साल में इंडस्ट्री के एयूएम में 12.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और करीब 8 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
--आईएएनएस
डीबीपी
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