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ईरान-अमेरिका तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराया, US के हवाई हमलों में 7 लोगों की मौत

Iran-US conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए दक्षिणी ईरान में महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाया है। शुक्रवार सुबह हुए इन हवाई हमलों में कम से कम सात लोगों की जान चली गई है। यह कदम ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को ढीला करने के लिए मजबूर करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या है होर्मुज संकट की असली जड़?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना रुख नहीं बदलता, तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे (critical infrastructure) को निशाना बनाएगा। इसी दबाव को बनाने के लिए अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) को फिर से लागू कर दिया है, ताकि देश के कच्चे तेल के निर्यात को बाधित किया जा सके।

बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा है, जहां से शांति काल में दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल और गैस की आपूर्ति होती है।

ईरान का पलटवार
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान भी पीछे नहीं है। तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए ताजा मिसाइल हमले किए हैं। कतर में अधिकारियों को आपातकालीन चेतावनी जारी करनी पड़ी और निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को कहा गया।

साथ ही, बहरीन और कुवैत को भी निशाना बनाया गया है। ईरान के 'खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम जोल्फघारी ने दोटूक कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में विदेशी हस्तक्षेप ईरान की "अजेय रेड लाइन" है और वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

बुनियादी ढांचे पर केंद्रित हुआ अमेरिकी हमला
ईरानी राज्य टेलीविजन के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास होर्मोजगन प्रांत के बंदर-ए-खामिर में पुलों को नष्ट कर दिया है। इसके अलावा, तेहरान और सेम्नान प्रांत में भी हमले हुए हैं, जहां ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी प्रमुख सुविधाएं स्थित हैं। यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन ने अब अपनी सैन्य रणनीति को पारंपरिक ठिकानों से हटाकर देश के बुनियादी ढांचे पर केंद्रित कर लिया है।

वैश्विक तेल व्यापार और शिपिंग पर असर
लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, इस जारी संघर्ष ने समुद्र मार्ग से होने वाले व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस महीने की शुरुआत में जलमार्ग से कार्गो की आवाजाही में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए कई जहाज अब अपनी लोकेशन ट्रैकिंग बंद कर गुजर रहे हैं, तो कई संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने के बजाय समुद्र में लंगर डाले हुए हैं।

अमेरिकी नौसेना ने खाड़ी में अपनी नाकेबंदी को और कड़ा कर दिया है, जहां वाणिज्यिक जहाजों को रोकने और बोर्ड करने की कार्रवाई भी देखी जा रही है।

आगे क्या?
पिछले महीने हुआ अस्थायी संघर्ष विराम पूरी तरह ढह चुका है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य आदान-प्रदान ने इस पूरे क्षेत्र को एक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। जहां एक तरफ तेल बाजार दबाव में हैं और कूटनीतिक रास्ते बंद होते दिख रहे हैं, वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट और अधिक गहरा सकता है।

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Trump Claims Election Fraud: ट्रंप का बड़ा दावा, ‘चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा चुराया; 2020 चुनाव में हुई थी छेड़छाड़’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव सुरक्षा को लेकर राष्ट्र के नाम संबोधन में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चीन ने अमेरिकी चुनावी डेटा के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की और लगभग 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की जानकारी हासिल कर ली थी।

ट्रंप ने कहा कि हाल ही में सार्वजनिक हुए दस्तावेजों और खुफिया सूचनाओं से संकेत मिलता है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। उनके अनुसार, इस डेटा में वोटरों के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक प्राथमिकताएं और अन्य संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं।

‘चीन ने बनाई थी विशेष डेटा यूनिट’
ट्रंप का दावा है कि चीन ने अमेरिकी चुनावी डेटा के संग्रह और उपयोग के लिए एक विशेष डेटा एक्सप्लॉइटेशन यूनिट बनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2018 से ही अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशें शुरू हो गई थीं और 2020 के चुनाव तक यह गतिविधियां जारी रहीं।

उनके मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को कई राज्यों के वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा तक कथित पहुंच और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी थी, लेकिन यह सूचना सार्वजनिक नहीं की गई।

खुफिया एजेंसियों पर भी उठाए सवाल
राष्ट्रपति ने कहा कि यदि यह जानकारी पहले उपलब्ध थी, तो इसे तत्कालीन प्रशासन, कांग्रेस और जनता के साथ साझा किया जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि संबंधित एजेंसियों ने चुनावी सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को दबाकर रखा।

ट्रंप ने ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI), न्याय विभाग (DOJ), FBI और CIA से इस पूरे मामले की जांच करने का आग्रह किया है।

गैर-नागरिक मतदाताओं को लेकर भी दावा
अपने संबोधन में ट्रंप ने यह भी कहा कि एक हालिया समीक्षा में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान हुई है जो अमेरिकी नागरिक नहीं हैं, लेकिन कथित तौर पर वोट देने के लिए पंजीकृत हैं।

उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक जांच में लाखों रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान हजारों ऐसे मामलों की पहचान की गई, जो चुनावी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं।

चुनावी व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की बात
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को एक सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली की जरूरत है। उनके अनुसार, चुनाव सुरक्षा किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा विषय है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है और इसी उद्देश्य से संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जांच की मांग की गई है।

नोट: ट्रंप के ये दावे उनके संबोधन में किए गए आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या न्यायिक प्रक्रियाओं के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

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  Sports

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