US Iran War: वाशिंगटन और तेहरान के बीच तेज हुई जंग, ईरान ने मार गिराया अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई दिनों से जारी सैन्य आक्रामकता अब पूरी तरह से एक विनाशकारी और भीषण महायुद्ध के मोड़ पर पहुंच चुकी है। शनिवार को खाड़ी क्षेत्र से आई खबरों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है।
ईरानी मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने बुशेहर के हवाई क्षेत्र में उड़ान भर रहे एक अमेरिकी अत्याधुनिक 'MQ-9 रीपर ड्रोन' को मार गिराया है। लगभग 3.4 करोड़ डॉलर की भारी लागत वाला यह अमेरिकी सैन्य ड्रोन ईरानी मिसाइल प्रहार के बाद कुछ ही पलों में हवा में पूरी तरह नष्ट हो गया।
होर्मुज जलसंधि में बारूदी सुरंगों के विस्फोट से दो तेल टैंकर धू-धू कर जले; ईरानी सेना ने बंद किया समुद्री मार्ग
समुद्र के भीतर से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, यह तबाही केवल आसमान तक सीमित नहीं है। ईरानी सरकारी टीवी और तसनीम समाचार एजेंसी ने पुष्टि की है कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में स्थित एक अत्यधिक संवेदनशील माइनफील्ड से गुजरने के दौरान दो बड़े तेल टैंकर भीषण विस्फोटों का शिकार हो गए। ईरानी नौसेना द्वारा इस रूट का उपयोग न करने की सख्त विधिक चेतावनियों को नजरअंदाज करने के कारण दोनों तेल टैंकर समुद्र के बीचों-बीच धू-धू कर जल उठे।
इस घटना के तुरंत बाद ईरान की नौसेना ने घोषणा की है कि अमेरिकी आक्रामकता और सुरक्षा खतरों के चलते होर्मुज जलसंधि को वर्तमान में "अत्यधिक असुरक्षित और पूरी तरह से बंद" कर दिया गया है। रणनीतिक समुद्री मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में भारी हाहाकार और कच्चे तेल की आपूर्ति ठप होने की गंभीर आशंका गहरा गई है।
मध्य ईरान के यज्द और अहवाज शहरों पर अमेरिकी वायुसेना के भीषण मिसाइल हमले, दहल उठे कई प्रांत
इस बड़े हवाई नुकसान के प्रतिशोध में अमेरिकी वायुसेना ने भी ईरान की मुख्य भूमि पर अपने हमलों का दायरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है। ईरानी स्थानीय मीडिया के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और नौसैनिक पोतों से ईरान के विभिन्न हिस्सों में सिलसिलेवार और बेहद विनाशकारी मिसाइल हमले किए गए हैं। मध्य ईरान के ऐतिहासिक शहर यज्द में एक के बाद एक लगातार 5 भीषण और शक्तिशाली विस्फोट सुने गए हैं, जिससे पूरा यज्द प्रांत दहल उठा है।
इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम में स्थित फार्स प्रांत के लास इलाके के बाहरी हिस्सों और खुज़ेस्तान प्रांत के प्रमुख औद्योगिक शहर अहवाज पर अमेरिकी मिसाइलों से बड़े पैमाने पर भारी बमबारी की गई है।
ईरान का पलटवार: जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर दागीं मिसाइलें
अमेरिका के इन चौतरफा हवाई हमलों के जवाब में ईरानी सेना ने भी काउंटर-ऑपरेशन शुरू कर दिया है। ईरानी सैन्य कमांड का दावा है कि अमेरिका की मजबूत एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों की मौजूदगी के बावजूद, उनकी मिसाइलों ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सेना के 'मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस' और कुवैत में स्थापित कई अन्य प्रमुख अमेरिकी सैन्य कैंपों और ठिकानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। समुद्र से लेकर आसमान तक जारी इस चौतरफा महाविनाश के कारण पूरा खाड़ी क्षेत्र इस समय बारूद के ढेर पर बैठ गया है।
ईरान का बड़ा दावा: जॉर्डन में अमेरिकी फाइटर जेट्स और विमानों को किया तबाह, अमेरिका पर जवाबी हमले का आरोप
Iran US conflict: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष और भी गंभीर होता दिख रहा है। ईरान ने शुक्रवार को दावा किया है कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सेना के कई रिफ्यूलिंग विमानों और फाइटर जेट्स को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए नष्ट कर दिया है। ईरान के अनुसार, इस हमले में बेस पर खड़े कई अन्य विमानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा रात भर किए गए हवाई हमलों का जवाब है। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी हमलों में खुजेस्तान प्रांत के अलवाज में बच्चों का एक कैंसर अस्पताल पूरी तरह तबाह हो गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस घटना के बाद जॉर्डन के नागरिकों से अपने देश में मौजूद "आक्रामक और इस्लाम विरोधी" अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की अपील की है।
हालांकि, अमेरिकी सेना ने अभी तक इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
मध्य पूर्व में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से ईरान ने लगातार अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे पहले कुवैत, बहरीन और कतर स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आ चुकी हैं।
इसके अलावा, ईरान ने सीरिया में भी एक अमेरिकी बेस को निशाना बनाने का दावा किया है, हालांकि वाशिंगटन और सीरियाई सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
अमेरिका का रुख और सैन्य कार्रवाई
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि वे ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम करने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर वे वाणिज्यिक शिपिंग पर हालिया हमलों के लिए ईरान को जवाबदेह ठहरा रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि उनकी कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य ईरान की ड्रोन और मिसाइल सुविधाओं को बेअसर करना है। फिलहाल, मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और वे पूरी तरह सतर्क हैं।
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 17, 2026
ईरान में मानवीय संकट और चेतावनी
ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमलों में अब तक 38 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हैं। तनाव के बीच, ईरान ने अपने नागरिकों से बिजली बचाने की अपील की है, क्योंकि अमेरिकी हमलों में देश के पावर स्टेशनों को भी नुकसान पहुंचा है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे बिजली ग्रिड पर दबाव कम करने के लिए पीक आवर के दौरान एक घंटे के लिए एयर कंडीशनर बंद रखें। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे चेतावनी देते हुए कहा है कि वे "कहीं भी सुरक्षित नहीं रहेंगे"।
शांति समझौता टूटा?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अमेरिका और ईरान ने पिछले ही हफ्ते एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन जिस तरह से दोनों देशों के बीच हमले जारी हैं, उससे यह स्पष्ट है कि यह समझौता अब टूट चुका है और स्थिति और भी जटिल होती जा रही है।
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