शेयर बाजार में वायदा और विकल्प कारोबार करने वाले छोटे निवेशकों के लिए नुकसान का आंकड़ा भले ही घटा है, लेकिन प्रति व्यक्ति औसत नुकसान अब भी एक लाख रुपये से ज्यादा बना हुआ है। वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त को संसद में दी जानकारी में बताया कि सेबी की ओर से उठाए गए कई कदमों के बाद वित्त वर्ष 2025-26 में व्यक्तिगत निवेशकों का कुल शुद्ध नुकसान घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपये था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस दौरान वायदा और विकल्प कारोबार में सक्रिय अलग-अलग व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या में भी बड़ी कमी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 98.10 लाख लोग इस कारोबार में शामिल थे, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 78.60 लाख रह गए। यानी एक साल में करीब 19.50 लाख व्यक्तिगत निवेशक इस खंड से बाहर हुए हैं।
हालांकि, निवेशकों की संख्या कम होने के बावजूद प्रति व्यक्ति औसत नुकसान बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में वायदा और विकल्प कारोबार करने वाले एक व्यक्ति को औसतन 1.16 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1.14 लाख रुपये था। इससे साफ है कि बाजार से बाहर होने वाले निवेशकों की संख्या घटने के बावजूद सक्रिय कारोबारियों पर नुकसान का दबाव बना हुआ है।
गौरतलब है कि वायदा और विकल्प कारोबार में जोखिम काफी ज्यादा होता है। कम पूंजी के जरिए बड़े सौदों में हिस्सा लेने की सुविधा के कारण इसमें मुनाफे की संभावना के साथ नुकसान का जोखिम भी तेजी से बढ़ जाता है। इसी वजह से सेबी ने छोटे निवेशकों को जोखिम की जानकारी देने और बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए कई बदलाव किए हैं।
सेबी ने नवंबर 2024 से वायदा और विकल्प बाजार में कई नियम लागू किए। इनमें साप्ताहिक सूचकांक आधारित अनुबंधों को सीमित करना, विकल्प की समाप्ति वाले दिन जोखिम से सुरक्षा बढ़ाना, सूचकांक आधारित अनुबंधों का आकार बढ़ाना और मासिक अनुबंधों की संख्या को तर्कसंगत बनाना शामिल है। इसके अलावा विकल्प खरीदने वालों से प्रीमियम की राशि पहले लेने, समाप्ति वाले दिन कैलेंडर स्प्रेड की सुविधा हटाने और दिन के दौरान स्थिति की सीमा पर नजर रखने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
मई 2025 में सेबी ने अलग-अलग शेयर बाजारों में डेरिवेटिव अनुबंधों की समाप्ति के दिनों को व्यवस्थित करने और स्थिति की सीमा की निगरानी के लिए जोखिम आधारित व्यवस्था लागू करने की दिशा में भी कदम उठाए।
सेबी ने कारोबार शुरू करते समय निवेशकों को नुकसान का स्पष्ट संदेश दिखाना भी जरूरी किया है। दलालों को यह जानकारी देने के लिए कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में वायदा और विकल्प कारोबार करने वाले 10 में से 9 व्यक्तिगत निवेशकों को नुकसान हुआ था।
इस बीच, सरकार को वायदा और विकल्प कारोबार से मिलने वाले प्रतिभूति लेनदेन कर में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इससे 27,695 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 22,225 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2021-22 में यह राशि सिर्फ 6,634 करोड़ रुपये थी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, प्रतिभूति लेनदेन कर की वसूली बाजार व्यवस्था के जरिए स्वतः होती है, जिससे कर चोरी और राजस्व में हेराफेरी की गुंजाइश कम रहती है। ऐसे में आंकड़े बताते हैं कि जहां नियामकीय कदमों के बाद व्यक्तिगत निवेशकों का कुल नुकसान घटा है, वहीं वायदा और विकल्प कारोबार में जोखिम को लेकर सावधानी अब भी जरूरी बनी हुई है।
Continue reading on the app