नेपाल और भारत ने 80 करोड़ नेपाली रुपये से अधिक की आठ विकास परियोजनाओं के लिए समझौते किए
नेपाल और भारत ने 80 करोड़ नेपाली रुपये से अधिक की आठ विकास परियोजनाओं के लिए समझौते किएदूध-पनीर के बाद अब आयुर्वेदिक दवाओं पर तुकाराम मुंढे की नजर, 434 कंपनियों की जांच; 10 के लाइसेंस रद्द
मुंबई. दूध-पनीर की गुणवत्ता को लेकर कार्रवाई के बाद अब महाराष्ट्र के अन्न व औषध प्रशासन यानी एफडीए ने आयुर्वेदिक दवा कंपनियों पर शिकंजा कस दिया है. आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में राज्यभर की 434 आयुर्वेदिक औषधि निर्माता संस्थाओं की जांच की गई. नियमों की अनदेखी करने वाली 135 संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जबकि गंभीर उल्लंघन सामने आने पर 10 कंपनियों के उत्पादन लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए. एफडीए का फोकस सिर्फ तैयार दवा पर नहीं, बल्कि दवा बनाने की पूरी प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों के पालन पर रहा.
कहीं तकनीकी स्टाफ गायब, कहीं गुणवत्ता जांच का इंतजाम नहीं
जांच में कई संस्थानों में ऐसी खामियां मिलीं, जिनका सीधा असर दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर पड़ सकता है. कहीं मान्यता प्राप्त तकनीकी कर्मचारी मौजूद नहीं थे तो कहीं उनकी गैरमौजूदगी में उत्पादन किया जा रहा था. कुछ जगहों पर गुणवत्ता नियंत्रण विभाग प्रभावी रूप से काम नहीं कर रहा था. उत्पादन और परीक्षण के जरूरी उपकरणों की कमी, अस्वच्छ परिसर, कच्चे माल और तैयार दवाओं की जांच के रिकॉर्ड का अभाव, बैच रिकॉर्ड में गड़बड़ी और दवाओं के लेबल पर गलत उत्पादन तिथि जैसी अनियमितताएं भी सामने आईं.
रिकॉर्ड गायब से लेकर क्रॉस-कंटैमिनेशन तक, गंभीर गड़बड़ियां
एफडीए की जांच में कुछ कंपनियों के पास मास्टर फॉर्मूला रिकॉर्ड और कंट्रोल सैंपल तक उपलब्ध नहीं मिले. कच्चे माल के रिकॉर्ड, कर्मचारियों की चिकित्सा जांच और प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज भी कई जगह नहीं मिले. सबसे अहम खामी दवाओं में एक उत्पाद की मिलावट दूसरे उत्पाद में न हो, इसके लिए जरूरी क्रॉस-कंटैमिनेशन रोकने की व्यवस्था का नहीं होना था. एफडीए ने इन उल्लंघनों को दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर माना.
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10 कंपनियों पर सीधा एक्शन, मुंढे का साफ संदेश
गंभीर खामियों के चलते कृष्णा हर्बल, लालशाह ऑर्गेनिक प्रॉडक्ट्स, आदित्य फार्मा, अंगरस आयुर्वेद, कालिदास गांधी, शिवनाथ आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स कंपनी, इंडुकेयर फार्मा, हकीम आयुर्वेदिक ब्यूटी केयर, हिलेरियस आयुर्वेद और यशोदा लैब के उत्पादन लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए गए हैं. तुकाराम मुंढे ने कहा है कि आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं और इनके निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है. मुंढे का संदेश साफ है की आयुर्वेद के नाम पर गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता बर्दास्त नहीं किया जाएगा.
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