भोपाल-इंदौर में घी के सैंपल फेल, मिलावट पर एक्शन, 3 अधिकारी सस्पेंड, 40 हजार किलो से ज्यादा माल जब्त
मध्यप्रदेश में मिलावटी दूध और घी बेचने वालों पर शिकंजा कसा गया है। भोपाल और इंदौर में घी के कई सैंपल जांच में असुरक्षित पाए जाने के बाद तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मध्यप्रदेश के बाजारों में बिक रहे घी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विशेष अभियान चलाया है। अभियान के तहत लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में घी के कई सैंपल असुरक्षित पाए गए हैं।
दरअसल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल में घी के कुल 27 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 13 नमूने असुरक्षित पाए गए। इसी तरह इंदौर में भी 8 नमूने असुरक्षित मिले हैं। इन नमूनों के संबंध में विभाग अब आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। जांच रिपोर्ट में भोपाल के द्वारकेश, शगुन, गोवर्धन, दानेदार, भूमि, धोलपुर फ्रेश और भूमि प्रीमियम प्योर के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। वहीं डिंडौरी के वास्तु और गोपी श्री के नमूने भी जांच में असुरक्षित मिले हैं।
इंदौर के श्री सुधा प्रीमियम, गुमार प्योर, शुद्ध घी, गाय का घी और वास्तु एगमार्क देशी घी समेत अन्य ब्रांड के नमूने भी फेल पाए गए हैं। इसके अलावा उज्जैन के दो ब्रांड एसआईएमआई मिल्क देशी घी और दमोह व धार से लिए गए एक-एक नमूने भी असुरक्षित पाए गए हैं।
44 हजार किलो संदिग्ध खाद्य सामग्री जब्त
दरअसल इस पूरे अभियान के तहत 20 जुलाई से 10 अगस्त के बीच खाद्य सुरक्षा टीमों ने कुल 2,234 दूध और दुग्ध उत्पादों के सैंपल लिए। इनमें दूध के 849, मावा के 106, पनीर के 296, घी के 601 और अन्य दुग्ध उत्पादों के 382 नमूने शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान करीब 2.73 करोड़ रुपये मूल्य की कुल 44 हजार 407 किलो संदिग्ध खाद्य सामग्री भी जब्त की गई है। जांच में अब तक 73 नमूने पूरी तरह फेल हो चुके हैं। विभाग ने कार्रवाई करते हुए 8 लाइसेंस निलंबित किए हैं और एफएसएस एक्ट के तहत 38 नए प्रकरण दर्ज किए हैं। इसके अलावा मिलावटखोरी के एक मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
लापरवाही पर तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी सस्पेंड
अभियान की समीक्षा के दौरान अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई। मंगलवार को आयुक्त एवं नियंत्रक खाद्य एवं सुरक्षा प्रशासन ने प्रदेशव्यापी अभियान की प्रगति की समीक्षा की। सौंपे गए कार्यों में लापरवाही बरतने पर तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। इनमें मुरैना के अवनीश गुप्ता, सागर की प्रीति राय और पन्ना के राजेश राय शामिल हैं। इसके अलावा विभाग ने विभिन्न जिलों के 42 उप संचालक, अभिहित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
भोपाल में पेट्रोल में पानी मिलने का मामला भी सामने आया
मिलावटखोरी के बीच भोपाल में पेट्रोल में पानी मिलाए जाने का मामला भी सामने आया है। भोपाल के 80 फीट रोड और जहांगीराबाद स्थित दो पेट्रोल पंपों पर सोमवार को ग्राहकों ने हंगामा किया था। आरोप था कि वाहनों में डाले जा रहे पेट्रोल में पानी मिला हुआ है।
हंगामे के बाद खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए दोनों पेट्रोल पंपों को सील कर दिया था। हालांकि मंगलवार को मामले में आगे की जांच नहीं हो सकी। Food Controller चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि बुधवार को जांच टीम को मौके पर भेजकर पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
दमोह-जबलपुर हाईवे पर फर्जी लूट का खुलासा, कलेक्शन एजेंट ही निकला मास्टरमाइंड, तीन आरोपी गिरफ्तार
दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर जिस लूट की वारदात ने पुलिस से लेकर आम जनता तक की नींद उड़ा दी थी, उसका मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि खुद फरियादी कलेक्शन एजेंट ही निकला। उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एक लाख तीस हजार रुपये हड़पने के लिए यह पूरी साजिश रची थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज कुछ ही समय में इस झूठी लूट की कहानी का भंडाफोड़ कर दिया और आरोपी एजेंट समेत उसके दोनों दोस्तों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
दरअसल, बीते सात तारीख को दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर बायपास के पास हुई इस कथित लूट की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। इस व्यस्ततम माने जाने वाले स्टेट हाईवे पर चौबीसों घंटे वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में इतनी व्यस्त जगह पर दिनदहाड़े लूट की खबर से लोगों का चिंता में आना स्वाभाविक था। इस मामले को लेकर सागर जिले के सुरखी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरिया निवासी घनश्याम अहिरवाल ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घनश्याम ने खुद को एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी का कलेक्शन एजेंट बताया था। उसने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि वह क्षेत्र से कलेक्शन के पैसे लेकर वापस लौट रहा था, तभी स्टेट हाईवे पर दो अज्ञात बदमाशों ने उसे रोक लिया और उसके पास रखे एक लाख तीस हजार रुपये लूटकर फरार हो गए।
लूट की सूचना मिलते ही पुलिस ने शुरू की जांच
इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल तमाम पुलिस टीमों को सक्रिय किया और विशेष रूप से साइबर सेल को इस गुत्थी को सुलझाने के काम में लगाया। पुलिस की टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू की। जब पुलिस ने फरियादी घनश्याम अहिरवाल से घटना के संबंध में पूछताछ की, तो उसकी बताई कहानी ने पुलिस के मन में संदेह पैदा कर दिया। घनश्याम ने बताया था कि आरोपियों ने उसके साथ किसी भी तरह की मारपीट या जबरदस्ती नहीं की, बल्कि केवल बहला-फुसलाकर उससे पैसे लूट लिए।
बिना मारपीट लूट की कहानी पर पुलिस को हुआ शक
व्यस्त हाईवे पर बिना किसी जोर-जबरदस्ती या मारपीट के इतनी बड़ी रकम की लूट की बात पुलिस के गले नहीं उतरी। पुलिस को घनश्याम की इस अजीबोगरीब कहानी पर यकीन नहीं हुआ। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने वैज्ञानिक तरीके से जांच आगे बढ़ाई और फरियादी घनश्याम के मोबाइल फोन को ट्रैक करना शुरू किया। जब उसके मोबाइल की कॉल डिटेल्स और लोकेशन की बारीकी से जांच की गई, तो कुछ संदेहास्पद तथ्य सामने आए। इसके आधार पर पुलिस ने घनश्याम के ही गांव पिपरिया के दो युवकों को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया।
पुलिस पूछताछ में हुआ घटना का खुलासा
पुलिस ने जब इन दोनों संदिग्धों से कड़ाई से पूछताछ की, तो वे ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल पाए और उन्होंने लूट की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। लेकिन जब उन्होंने इस पूरी घटना के पीछे की असलियत बयां की, तो पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह कोई वास्तविक लूट नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड खुद फरियादी घनश्याम अहिरवाल ही था। उसने अपने इन दोनों दोस्तों के साथ मिलकर फर्जी लूट का यह पूरा ड्रामा रचा था।
मास्टरमाइंड घनश्याम का इरादा माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कलेक्शन के एक लाख तीस हजार रुपये खुद हजम करने का था। वह कंपनी को दिखाना चाहता था कि रास्ते में उसके साथ लूट हो गई है ताकि उसे यह पैसे न चुकाने पड़ें। लेकिन उसकी यह चालाकी काम नहीं आई और पुलिस की पैनी नजरों ने उसके इस फर्जी प्लान को पूरी तरह फेल कर दिया। दमोह की देहात थाना पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मास्टरमाइंड घनश्याम अहिरवाल सहित उसके दोनों दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले की पुष्टि करते हुए दमोह के एडिशनल एसपी सुजीत भदौरिया ने बताया कि पुलिस की सतर्कता और साइबर सेल की सक्रियता से इस फर्जी लूट की वारदात का पर्दाफाश हुआ है और तीनों आरोपी अब सलाखों के पीछे हैं।
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