NHAI: वाराणसी से कोलकाता तक रफ्तार का नया रोमांच, बंगाल के पांच जिलों से होकर गुजरेगा 9250 करोड़ का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
NHAI: उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक शहर वाराणसी को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है. पर्यावरण मंत्रालय के एक विशेषज्ञ पैनल ने इस 235 किलोमीटर लंबे 'ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे' के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश कर दी है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की इस बड़ी परियोजना पर कुल 9,250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. यह नया मार्ग न केवल दो बड़े राज्यों के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि पूर्वी भारत में परिवहन और व्यापार की नई इबारत लिखेगा.
बंगाल के इन जिलों की बदलेगी तस्वीर
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल के उन इलाकों से होकर गुजरेगा, जो अब तक बेहतर कनेक्टिविटी की बाट जोह रहे थे. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे बंगाल के पांच महत्वपूर्ण जिलों पुरुलिया, बांकुरा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा से होकर गुजरेगा. इन जिलों में एक्सप्रेसवे के आने से स्थानीय स्तर पर छोटे और बड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. कनेक्टिविटी बेहतर होने से किसानों और व्यापारियों को अपना सामान बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
परियोजना का स्वरूप और भारी भरकम लागत
एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी की हालिया बैठक में इस प्रोजेक्ट की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की गई है. यह एक्सप्रेसवे शुरुआत में चार लेन का होगा, जिसे भविष्य में जरूरत के अनुसार छह लेन तक बढ़ाया जा सकेगा. पूरे 235 किलोमीटर के इस खंड के निर्माण में 9,250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. हालांकि, इस विकास के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं. पश्चिम बंगाल में इस मार्ग को तैयार करने के लिए लगभग 103 हेक्टेयर से अधिक आरक्षित और संरक्षित वन भूमि का उपयोग करना होगा. विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने के लिए मंत्रालय ने कुछ बेहद कड़े दिशा निर्देश भी जारी किए हैं.
पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा का बड़ा सवाल
यह एक्सप्रेसवे एक बेहद संवेदनशील टाइगर लैंडस्केप और वन्यजीव क्षेत्रों से होकर गुजरने वाला है. रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्माण के लिए करीब 10,000 वन क्षेत्रों के और 40,000 गैर-वन क्षेत्रों के पेड़ों को काटना पड़ सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस इलाके में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आने वाली 17 'अनुसूची-एक' की प्रजातियां निवास करती हैं. इनमें तेंदुआ, भारतीय हाथी, सांभर हिरण, धारीदार लकबग्घा और भारतीय लोमड़ी जैसे जानवर शामिल हैं. जंगल महल एलीफेंट कॉरिडोर भी इस प्रस्तावित मार्ग के पास ही स्थित है, इसलिए जानवरों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है.
वन्यजीवों के लिए बनेंगे विशेष अंडरपास
एनएचएआई ने जानवरों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत योजना पेश की है. एक्सप्रेसवे के उन हिस्सों में जहां वन्यजीवों का आना-जाना अधिक रहता है, वहां 20 विशेष अंडरपास बनाए जाएंगे. कमेटी ने यह निर्देश दिया है कि इन अंडरपास की ऊंचाई कम से कम 8 से 10 मीटर होनी चाहिए ताकि हाथी जैसे बड़े जानवर भी बिना किसी डर और रुकावट के रास्ता पार कर सकें. इसके अलावा, अंडरपास की चौड़ाई को लेकर भी स्थानीय वन अधिकारियों की सलाह मानी जाएगी ताकि जंगल के इकोसिस्टम को कम से कम नुकसान पहुंचे.
विकास और औद्योगिक प्रगति का नया रास्ता
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत और पूर्वी भारत को आपस में जोड़ने वाला एक बड़ा औद्योगिक गलियारा साबित होगा. यह एक्सप्रेसवे पूरा होने के बाद वाराणसी से कोलकाता के बीच लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा. इससे माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी और ईंधन की भी बचत होगी. सरकार का मुख्य उद्देश्य इस मार्ग के जरिए पश्चिम बंगाल के पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है. हालांकि, वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा इस बड़ी परियोजना के सफल होने की सबसे बड़ी शर्त बनी हुई है.
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'थलापति' की राह में रोड़ा: VCK और IUML के बदले रुख से सियासी हड़कंप, राजभवन ने क्यों रोकी 'विजय' की शपथ?
तमिलनाडु की सियासत में पल-पल बदल रहे घटनाक्रम ने एक बार फिर सुपरस्टार विजय के मुख्यमंत्री बनने की राह में रोड़े अटका दिए हैं। शुक्रवार सुबह तक जहाँ यह माना जा रहा था कि विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) शनिवार सुबह 11 बजे शपथ लेगी, वहीं देर शाम होते-होते खेल पूरी तरह बदल गया।
वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) जैसी पार्टियों के समर्थन पत्रों को लेकर पैदा हुए संशय ने पूरे मामले को राजभवन में अटका दिया है। राज्यपाल आर.एन. रवि फिलहाल सभी समर्थन पत्रों की बारीकी से जांच कर रहे हैं, जिसके कारण शपथ ग्रहण के आधिकारिक समय और तारीख की घोषणा अभी तक नहीं हो पाई है।
VCK की 'डिप्टी सीएम' की मांग ने फंसाया पेंच
इस सियासी संकट के केंद्र में विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) का वह नया रुख है जिसने टीवीके खेमे में खलबली मचा दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वीसीके ने विजय की सरकार को समर्थन देने के बदले 'डिप्टी सीएम' पद की मांग रख दी है। पार्टी का कहना है कि वे शनिवार को इस पर अपनी अंतिम बैठक करेंगे और उसके बाद ही राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपेंगे। समर्थन के बदले सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी की इस शर्त ने विजय के लिए बहुमत का आंकड़ा पेश करना फिलहाल मुश्किल बना दिया है, क्योंकि विजय ने राज्यपाल को अभी केवल 116 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र ही सौंपा था।
IUML ने बढ़ाई टेंशन, कहा- हम स्टालिन के साथ हैं
एक तरफ जहाँ वीसीके मोलतोल कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने टीवीके को बड़ा झटका दिया है। आईयूएमएल के नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वे एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएमके गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं और विजय की सरकार को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान के बाद राजभवन ने भी अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। राज्यपाल कार्यालय अब उन दो अतिरिक्त हस्ताक्षरों का इंतजार कर रहा है जो बहुमत के जादुई आंकड़े को पूरा करने के लिए अनिवार्य हैं। आईयूएमएल के इस रुख ने उन दावों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है जिनमें विजय की सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल होने की बात कही जा रही थी।
AMMK के इकलौते विधायक का लापता होना और खरीद-फरोख्त के आरोप
तमिलनाडु के इस 'पावर गेम' में टी.टी.वी. दिनाकरण की पार्टी एएमएमके (AMMK) ने भी एंट्री मार दी है। दिनाकरण ने राज्यपाल को पत्र सौंपकर ई. पलानीस्वामी (AIADMK) को समर्थन देने की बात कही है। इसी बीच खबर आई है कि एएमएमके के इकलौते विधायक रहस्यमयी तरीके से लापता हो गए हैं। पार्टी ने सीधा आरोप लगाया है कि टीवीके प्रमुख विजय ने विधायकों की खरीद-फरोख्त शुरू कर दी है और उनके विधायक को 'खरीदा' गया है। हालांकि टीवीके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन इन घटनाओं ने राज्यपाल को शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को और अधिक विलंबित करने का ठोस आधार दे दिया है।
विजय की चुनौतियों और 'मैरी विल्सन' का बड़ा दावा
इस अनिश्चितता के माहौल के बीच टीवीके विधायक मैरी विल्सन ने एक बड़ा बयान देते हुए कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि विजय सिर्फ अगले 5 साल के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी लंबे समय तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल सहयोगियों को एकजुट रखने और जनता के बीच अपनी 'साफ' राजनीति की छवि को बचाने की है। यदि वीसीके और अन्य छोटे दल समर्थन पत्र देने में देरी करते हैं, तो राज्य में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन या डीएमके-एआईएडीएमके के गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो सकती है।
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