तेज प्रताप यादव ने खोला अपने तलाक का राज, बताया आखिर क्यों ऐश्वर्या से नहीं बनी
राजनीतिक जीवन में अपने बेबाक अंदाज के लिए चर्चित तेज प्रताप यादव ने अब अपनी निजी जिंदगी से जुड़े एक संवेदनशील मामले पर खुलकर बात की है. एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने ऐश्वर्या राय के साथ अपनी शादी, रिश्ते में आए मतभेद और तलाक की चल रही कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई बातें साझा कीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों के बीच तलाक का मामला अभी अदालत में विचाराधीन है.
2018 में हुई थी तेज प्रताप और ऐश्वर्या राय की शादी
तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय की शादी वर्ष 2018 में हुई थी. यह विवाह बिहार के राजनीतिक परिवारों से जुड़ा होने के कारण काफी चर्चा में रहा था. ऐश्वर्या राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय के परिवार से आती हैं.
शादी के शुरुआती दौर में दोनों की तस्वीरें और समारोह की खबरें खूब सुर्खियों में रही थीं. हालांकि कुछ ही समय बाद रिश्ते में मतभेद की खबरें सामने आने लगीं. धीरे-धीरे मामला इतना बढ़ गया कि दोनों अलग रहने लगे और तलाक की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई.
‘मेल नहीं खाया, इसलिए रिश्ता बिगड़ गया’
इंटरव्यू के दौरान जब तेज प्रताप से पूछा गया कि आखिर शादीशुदा जिंदगी में ऐसी स्थिति क्यों आई, तो उन्होंने इसे आपसी तालमेल से जोड़ते हुए कहा कि दोनों की आपस में नहीं बन पाई.
उन्होंने बताया कि दोनों की पसंद और जीवन जीने का तरीका काफी अलग था. तेज प्रताप ने अपने धार्मिक झुकाव का जिक्र करते हुए कहा कि वह पूजा-पाठ करते थे, जबकि उनकी पत्नी की इसमें उतनी रुचि नहीं थी. उनके मुताबिक, अलग-अलग सोच और जीवनशैली के कारण दोनों के बीच तालमेल बनाना मुश्किल होता गया.
अरेंज मैरिज थी, लव मैरिज नहीं
तेज प्रताप यादव ने उन चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की, जिनमें उनकी शादी को प्रेम विवाह बताया जाता रहा है. उन्होंने कहा कि यह लव मैरिज नहीं बल्कि अरेंज मैरिज थी.
उनके अनुसार, उन्होंने अपने माता-पिता की इच्छा और परिवार की सहमति को महत्व देते हुए इस रिश्ते के लिए हामी भरी थी. शादी के बाद दोनों ने साथ रहने की कोशिश की, लेकिन रिश्ते में पैदा हुए मतभेद दूर नहीं हो सके.
तीन महीने साथ रहने के बाद दाखिल हुई तलाक की अर्जी
तेज प्रताप ने बताया कि शादी के बाद दोनों करीब तीन महीने तक साथ रहे. इसके बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं कि तलाक की अर्जी दाखिल कर दी गई. उन्होंने कहा कि रिश्ते को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो पाया.
उनकी बातों से यह संकेत मिलता है कि धार्मिक गतिविधियों और व्यक्तिगत पसंद को लेकर भी दोनों के बीच मतभेद थे. उन्होंने मंदिर जाने और पूजा-पाठ को लेकर कथित रोक-टोक का भी जिक्र किया.
मामला अभी अदालत में है
तेज प्रताप यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाक का मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है. ऐसे में अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.
इस पूरे मामले पर उनकी हालिया टिप्पणी ने एक बार फिर उनकी निजी जिंदगी को चर्चा में ला दिया है. हालांकि उन्होंने अपने रिश्ते को लेकर अपना पक्ष सामने रखा है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा.
यह भी पढ़ें - चुनाव जीतने के बाद पहली बार बांकीपुर पहुंचे प्रशांत किशोर, 10 हजार युवाओं को नौकरी दिलाने का किया एलान
बंगाल पोस्ट-पोल हिंसा के 2021 के हत्या मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, भगोड़ा आरोपी गिरफ्तार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पश्चिम बंगाल में 2021 के पोस्ट-पोल हिंसा से जुड़े हत्या मामले में लंबे समय से फरार चल रहे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) गोपाल दास उर्फ विशाल पाल को गिरफ्तार किया है. CBI ने आरोपी को 11 अगस्त 2026 को उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम स्थित रवींद्रनगर से गिरफ्तार किया.
2021 से फरार था आरोपी
CBI के मुताबिक, आरोपी FIR दर्ज होने के बाद से ही फरार था और उसने जांच अथवा मुकदमे की कार्यवाही में कभी हिस्सा नहीं लिया. आरोपी की गिरफ्तारी के लिए CBI ने 50 हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया था. एजेंसी ने मानव खुफिया जानकारी (Human Intelligence) और तकनीकी इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए गोपाल दास उर्फ विशाल पाल को गिरफ्तार किया.
अविजीत सरकार हत्याकांड से जुड़ा है मामला
यह मामला 2 मई 2021 को कोलकाता के शीतलातला लेन में अविजीत सरकार की कथित हत्या से जुड़ा है. कलकत्ता हाई कोर्ट के 19 अगस्त 2021 के आदेश के अनुपालन में CBI ने 25 अगस्त 2021 को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी. एजेंसी ने नर्केलडांगा थाना FIR संख्या 124/2021 को टेकओवर किया था.
38 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
जांच पूरी करने के बाद CBI ने वर्ष 2021 और 2025 में कुल 38 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. इनमें गिरफ्तार आरोपी गोपाल दास उर्फ विशाल पाल के अलावा तत्कालीन TMC विधायक परेश पाल और तत्कालीन TMC पार्षद स्वपन समद्दार तथा पापिया घोष भी शामिल हैं. आरोपियों के खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. मामला फिलहाल कलकत्ता के सिटी सेशंस कोर्ट में विचाराधीन है.
कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा
गिरफ्तारी के बाद CBI ने आरोपी गोपाल दास उर्फ विशाल पाल को 11 अगस्त 2026 को सक्षम अदालत, कलकत्ता के समक्ष पेश किया. अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी के काफिले पर भीड़ का हमला, प्रदर्शनकारियों ने फेंकी पानी की बोतलें, जूते और चप्पलें
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation










