पश्चिम बंगाल : सुंदरबन के झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर में रॉयल बंगाल बाघिन की मौत
कोलकाता, 11 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सुंदरबन के झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर में लगभग 13 साल की एक रॉयल बंगाल बाघिन की मौत हो गई। इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को जानकारी दी।
सोमवार को बाघिन की हालत अचानक बिगड़ गई। हालांकि, वनकर्मियों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया, लेकिन बाघिन को बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान ही बाघिन की मौत हो गई।
मौत का असली कारण जानने के लिए उसके शव का पोस्टमार्टम किया जा चुका है। वन विभाग अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाघिन को दिसंबर 2024 में सुंदरबन के चुल्काटी जंगल से गंभीर रूप से बीमार हालत में बचाया गया था। उसे कई दिनों तक जंगल में बीमार हालत में घूमते हुए देखा गया था।
उसे सामान्य रूप से चलने में भी परेशानी हो रही थी। जब यह मामला वन कर्मियों के ध्यान में आया, तो उसे बचाने की कोशिशें शुरू की गईं। आखिरकार वन कर्मी पिंजरे की मदद से बाघिन को बचाने में सफल रहे। हालांकि, बचाए जाते समय उसकी शारीरिक हालत काफी खराब थी।
हालात को देखते हुए, स्थानीय इलाज के बजाय उसे बेहतर इलाज के लिए कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर ले जाया गया। अलीपुर चिड़ियाघर में बाघिन का लगभग चार महीने तक इलाज चला। उसे डॉक्टरों और विशेषज्ञों की देखरेख में रखा गया। लंबे इलाज के बाद उसकी शारीरिक हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। फिर, मार्च 2025 तक उसे वापस झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर लाया गया।
वन विभाग का दावा है कि झारखाली लौटने के बाद बाघिन काफी ठीक थी। बचाए जाने के समय से ही उसका शरीर कमजोर था। उसकी शारीरिक हालत पर लगातार नजर रखी जा रही थी। सोमवार सुबह स्थिति बदल गई। वन कर्मियों के ध्यान में आया कि बाघिन सामान्य रूप से हिल-डुल नहीं रही थी और काफी सुस्त थी। बाद में, उसे बुखार होने का भी पता चला। तुरंत इलाज की व्यवस्था की गई और जरूरी दवाएं व देखभाल शुरू की गई।
हालांकि, बाघिन ने इलाज पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। आखिरकार इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई। साउथ 24 परगना फॉरेस्ट डिवीजन की डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) निशा गोस्वामी ने मीडिया को बताया, इस बाघिन को दिसंबर 2024 में चुल्काटी के जंगल से बहुत बीमार हालत में बचाया गया था। इलाज के बाद वह झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर में ठीक हो रही थी। सोमवार सुबह वह बीमार पड़ गई। इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। मौत की सही वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम किया गया है।
--आईएएनएस
एएसएच/एबीएम
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मानसून के साये में भी टूटा चारधाम का रिकॉर्ड, 47 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे, जानें क्या होले सीएम धामी
उत्तराखण्ड में मानसून का तांडव देखने को मिल रहा है, लेकिन कई बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है. राज्य सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यात्रा को नियंत्रित और आवश्यकता के अनुसार रोककर मैनेज कर रही है, लेकिन तीर्थयात्रियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है. 114 दिनों में ही दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख के पार पहुंच चुकी है. यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में साढ़े चार लाख से अधिक है.
राज्य आपदा कंट्रोल रूप पर नजर रख रहे हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ मैनेज किया जा रहा है. तेज मानसून और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद राज्य आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से आपदा प्रबंधन पर नजर रखे हुए हैं. चारों धामों और यात्रा पड़ावों में यात्रियों के ठहरने, खाने और अन्य सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं. लैंडस्लाइड के खतरे वाले संवेदनशील इलाकों में यात्रियों की मदद के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है.
चारधाम में इस साल बना नया रिकॉर्ड
राज्य सरकार के बेहतर आपदा प्रबंधन और इंतजामों के चलते चारधाम यात्रा नया कीर्तिमान बनाने की ओर बढ़ रही है. इस साल 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था. सोमवार 10 अगस्त तक इस यात्राकाल के 114 दिनों में कुल 47 लाख 2 हजार 703 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि पिछले साल 2025 में इतने ही समय में 42 लाख 34 हजार 147 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे. यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 4 लाख 68 हजार 556 अधिक है. चारों धामों में अब तक की कुल संख्या की बात करें तो बद्रीनाथ में 16 लाख 12 हजार 112, केदारनाथ में 14 लाख 50 हजार 116, गंगोत्री में 7 लाख 37 हजार 629 और यमुनोत्री धाम में 6 लाख 62 हजार 347 यात्री दर्शन कर चुके हैं. जबकि हेमकुंट साहिब में 2 लाख 40 हजार 499 श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं.
चारों धामों में एक दिन में पहुंचे 15 हजार से अधिक श्रद्धालु
मौसम लगातार खराब होने और प्रशासनिक अलर्ट के बावजूद सोमवार को 15 हजार 376 श्रद्धालु चारधाम दर्शन करने पहुंचे थे. इनमें से करीब 9559 यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे थे, जबकि केदारनाथ में 4170, गंगोत्री में 1204 और यमुनोत्री धाम में 443 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए.
बद्रीनाथ पहुंचे 16.12 लाख से अधिक श्रद्धालु
भगवान बद्रीनाथ के दर्शनों को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है. 23 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा सोमवार 10 अगस्त को 110 दिन पूरे कर चुकी है. इस दौरान 16 लाख 12 हजार 112 श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम में माथा टेक चुके हैं. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 3 लाख 50 हजार 192 अधिक तीर्थयात्री दर्शनों करने पहुंच चुके हैं. पिछले साल 4 मई 2025 को बद्रीनाथ यात्रा शुरू हुई थी. तब 21 अगस्त यानी 110 दिन में यह आंकड़ा 12 लाख 61 हजार 280 था.
चारधाम यात्रा पर पुष्कर सिंह धामी का आया बयान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बयान में कहा, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है. जिलाधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू हो सके. भूस्खलन या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए गए हैं. श्रद्धालुओं को मौसम के मिजाज को देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है.
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