आखिर क्यों ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर पुलिस अधीक्षक ऑफिस पहुंचा युवक, बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप
ग्वालियर पुलिस अधीक्षक की जनसुनवाई में आज मंगलवार 11 अगस्त को लोग उस समय आश्चर्यचकित हो गए जब एक युवक अपने साथ ऑक्सीजन का सिलेंडर लेकर पहुंच गया, उसका आरोप है कि बिजली कंपनी की लापरवाही से उसके पिता हादसे का शिकार हो गए लेकिन बिजली विभाग अपने कर्मचारी की फ़िक्र नहीं कर रहा उधर पुलिस भी उनकी शिकायत दर्ज नहीं कर रही, उसे लगता है कि पुलिस को उसके पिता से ज्यादा ऑक्सीजन सपोर्ट की जरुरत है, शायद ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने से उसे होश आ जाये।
ग्वालियर एस्प्पी ऑफिस जन सुनवाई में पहुंचे हिमांशु शर्मा ने बताया कि उसके पिता हरिओम शर्मा बिजली कंपनी में सहायक लाइनमेन हैं, उसका कहना है कि 28 अप्रैल को उसके पिता ड्यूटी के दौरान अफसरों की लापरवाही से हादसे का शिकार हो गए , उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, उनके सिर, गर्दन सहित अन्य जगह गंभीर चोट है उनके ऑपरेशन हुए हैं लेकिन बिजली विभाग कोई मदद नहीं कर रहा।
हिमांशु के मुताबिक 28 अप्रैल वाले दिन उनके पिता को अधिकारियों ने बिरला नगर लाइन नंबर 1 स्थित विद्युत सब स्टेशन पर बुलाया था जहाँ वे अन्य कर्मचारियों के साथ काम कर रहे थे, काम के दौरान ही अधिकारियों ने ट्रांसफार्मर चालू करवा दिया जिससे उनके पिता को करंट लगा और वो दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए अन्य कर्मचारी भी घायल हो गए, उनके पिता की हालात गंभीर थी तो उनके भाई ने अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया।
अधिकारियों पर एफआईआर की मांग, पुलिस के लिए लेकर पहुंचा ओक्सीजन सिलेंडर
हिमांशु का आरोप है कि जिस समय ये हादसा हुआ उस समय वहां एक DGM, एक AE और दो JE मौजूद थे , उनकी उपस्थिति में ही इतनी बड़ी लापरवाही हुई कि कर्मचारी काम कर रहा था और लाइन चालू करवा दी गई, उसका कहना है कि उसने पुलिस में शिकायत की लेकिन पुलिस ने उसकी एफआईआर नहीं लिखी, आज उसके पिता ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं और जिन्दगी और मौत के बीच झूल रहे हैं लेकिन उसे लगता है कि उनके पिता से ज्यादा ऑक्सीजन सपोर्ट की जरुरत पुलिस को है शायद उसे होश आ जाये और उसकी शिकायत दर्ज कर ले।
घटना वाले दिन आये ऊर्जा मंत्री, चार महीने से विभाग ने नहीं ली सुध
हिमांशु ने कहा जिस दिन ये हादसा हुआ उसी दिन 28 अप्रैल को ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर अस्पताल आये थे तभी बिजली कंपनी के अधिकारी उनके साथ आये थे फिर उसके बाद आज चार महीने हो गए कोई नहीं आया ना किसी ने आर्थिक सहायता की, हिमांशु की शिकायत सुनने के बाद सीएसपी नागेन्द्र सिंह सिकरवार ने कहा युवक का आवेदन लिया है उसके आरोपों की जांच कर आगे एक्शन लिया जायेगा।
बेटे की चेतावनी, एफआईआर नहीं हुई तो बीमार पिता को लेकर आएगा एसपी ऑफिस
हिमांशु ने कहा हादसे के समय मौजूद पांचों अधिकारियों पर पुलिस एफआईआर दर्ज करे, उसने आवेदन में ये मांग की है। उसने कहा पुलिस ने तीन दिन में एफआईआर करने का आश्वासन दिया है और यदि ऐसा नहीं होता है तो वो ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे अपने पिता को एसपी ऑफिस लेकर आयेगा।
MP Flood: सिचुएशन रूम पहुंचे CM मोहन यादव, बाढ़ प्रभावितों से की बात, अब तक 527 लोगों का रेस्क्यू
मध्यप्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से उपजे हालातों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं और पूरी स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधे होमगार्ड मुख्यालय पहुंचे और वहां बने राज्य आपदा प्रबंधन के सिचुएशन रूम से बाढ़ प्रभावित इलाकों के जमीनी हालातों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे बात की और वहां चल रहे राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने केवल अधिकारियों से ही चर्चा नहीं की, बल्कि बाढ़ के संकट से रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाले गए लोगों से भी बातचीत कर उनका ढांढस बंधाया और उनका हालचाल जाना।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रदेश के विभिन्न बाढ़ प्रभावित और तेज बहाव वाले इलाकों से अब तक कुल 527 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मौके पर तैनात बचाव दलों को पूरी सतर्कता बरतने और प्रभावितों को तत्काल हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
खंडवा में 7 कांवड़ियों को सुरक्षित बाहर निकाला
बाढ़ के बीच खंडवा जिले में एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जहां नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने के कारण 7 कांवड़िए फंस गए थे। इन सभी 7 कांवड़ियों को रेस्क्यू टीम ने बेहद सूझबूझ और तत्परता के साथ सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद कुछ विशिष्ट इलाकों में अत्यधिक बारिश होने की वजह से अचानक विकट और चुनौतीपूर्ण हालात पैदा हो गए हैं। ऐसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा त्वरित गति से मदद पहुंचाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने जनता से की सावधानी बरसते ही अपील
मुख्यमंत्री ने आम जनता से भी इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ जाता है, जिससे अप्रत्याशित संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए लोगों को बेहद सतर्क और सजग रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारी रेस्क्यू टीमें प्रभावित क्षेत्रों में दिन-रात मुस्तैदी से काम कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि यदि किसी जिले में स्थिति गंभीर होती है, तो जरूरत पड़ने पर पड़ोसी जिलों से भी तत्काल अतिरिक्त सहायता और संसाधन लिए जाएं। पूरे प्रदेश के हालातों की राज्य स्तर से लगातार और कड़ी निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से उन लोगों से सावधानी बरतने की पुरजोर अपील की है जो नदी और नालों के किनारे या उनके बेहद समीप निवास करते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव की तमाम टीमें जनता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित होकर निरंतर कार्य कर रही हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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