'हुमा और मैंने सबसे ज्यादा बातें कीं', नयनतारा ने ‘टॉक्सिक’ के सेट पर एक्ट्रेस संग हुई खास दोस्ती का किया खुलासा
Nayanthara-Huma Qureshi: यश स्टारर फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान अभिनेत्री नयनतारा ने अपनी सह-कलाकार हुमा कुरैशी के साथ हुई खास दोस्ती का खुलासा किया है .उन्होंने बताया कि सेट पर हुमा उनकी करीबी दोस्तों में शामिल हो गई थीं क्योंकि हमारे सबसे ज्यादा कॉम्बिनेशन सीन्स थे.”
हुमा और मैंने सबसे ज्यादा बातें कीं
हाल ही में फिल्म के ग्रैंड ट्रेलर लॉन्च के दौरान नयनतारा ने शूटिंग के दिनों को याद करते हुए बताया कि सेट पर हुमा उनकी करीबी दोस्तों में शामिल हो गई थीं. उन्होंने कहा, “इन सेट्स पर मेरी एक दोस्त बन गई. मुझे लगता है कि हुमा और मैंने सबसे ज्यादा बातें कीं, क्योंकि हमारे सबसे ज्यादा कॉम्बिनेशन सीन्स थे.”
26 अगस्त रिलीज होगी टॉक्सिक
नयनतारा की इस बात से दोनों अभिनेत्रियों के बीच शूटिंग के दौरान बनी खास बॉन्डिंग की झलक मिली. साथ में कई दृश्यों की शूटिंग करने के कारण दोनों को सेट पर काफी समय साथ बिताने का मौका मिला और इसी दौरान उनकी दोस्ती भी गहरी हुई. गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में यश, नयनतारा, कियारा आडवाणी, रुक्मिणी वसंत, तारा सुतारिया और हुमा कुरैशी समेत कई कलाकार नजर आएंगे. फिल्म 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.
ट्रेलर में दिखा हुमा और नयनतारा का शानदार किरदार
गौरतलब है कि टॉक्सिक का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. जिसमें यश का दमदार और इंटेंस अंदाज में दिखने को मिला. ट्रेलर में एक्शन, स्टाइल, रोमांस, रहस्य और थ्रिल का जबरदस्त मिक्सर देखने को मिला था. ‘टॉक्सिक’ के ट्रेलर की सबसे बड़ी खासियत यश का किरदार रहा था. उनके साथ बाकी हुमा कुरैशी और नयनतारा के किरदार की भी तारीफ हुई. फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के बाद से फैंस के बीच एक्साइटमेंट का लेवल बढ़ गया है और वे फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेसब्र हैं.
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वंदे मातरम् का अपमान अब पड़ेगा भारी, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया कानून
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कानूनी कदम उठाया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 प्रभावी हो गया है. इसके साथ ही राष्ट्रगीत को कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान लागू हो गया है. नए कानून के तहत जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकना या उसके दौरान व्यवधान पैदा करना दंडनीय अपराध माना जाएगा.
क्या बदला है नए कानून में?
अब तक राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की संवैधानिक-सांस्कृतिक प्रतिष्ठा तो थी, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने के खिलाफ वैसी स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था नहीं थी जैसी राष्ट्रगान के मामले में है. नए संशोधन के बाद राष्ट्रगीत को भी कानून के दायरे में विशेष सुरक्षा दी गई है.
नियम का मुख्य उद्देश्य ऐसे जानबूझकर किए गए कृत्यों पर रोक लगाना है, जिनसे राष्ट्रगीत के गायन में बाधा पहुंचती हो या उसका अपमान किया जाता हो. कानून में ऐसे उल्लंघन के लिए तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है.
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
राष्ट्रपति की मंजूरी किसी विधेयक को कानून का रूप देने की संवैधानिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है. अब संशोधित कानून लागू होने के साथ ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और सार्वजनिक प्रस्तुतियों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई का आधार और स्पष्ट हो गया है.
इस कदम को राष्ट्रगीत की औपचारिक प्रतिष्ठा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, कानून का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके प्रावधानों को प्रशासन और अदालतें किस तरह लागू करती हैं.
‘वंदे मातरम्’ का इतिहास क्या है?
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी. यह उनके उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह देशभक्ति तथा औपनिवेशिक शासन के विरोध का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया.
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया और ‘वंदे मातरम्’ को भी समान सम्मान देने का निर्णय लिया. इस तरह दोनों की राष्ट्रीय पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका स्थापित हुई.
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अब क्या अंतर रहेगा?
नए कानून के बाद दोनों को कानूनी संरक्षण के लिहाज से और अधिक करीब लाया गया है. हालांकि, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की संवैधानिक स्थिति तथा उनसे जुड़े प्रोटोकॉल पूरी तरह समान नहीं हैं. नए प्रावधान का खास जोर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान डालने जैसे कृत्यों को दंडनीय बनाने पर है.
क्या हर तरह का विरोध अपराध माना जाएगा?
यहां कानून के प्रावधानों को समझना जरूरी है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कानून का फोकस जानबूझकर अपमान, गायन रोकने या व्यवधान पैदा करने जैसे कृत्यों पर है. इसलिए किसी मामले में अपराध तय करने के लिए घटना की परिस्थितियां, व्यक्ति की मंशा और कानून में निर्धारित शर्तों को देखा जाएगा.
इसका मतलब यह नहीं समझा जाना चाहिए कि ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े हर मतभेद या हर व्यक्तिगत प्रतिक्रिया अपने आप आपराधिक कृत्य बन जाएगी. कानून के वास्तविक इस्तेमाल में संबंधित प्रावधानों और न्यायिक व्याख्या की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
क्यों हो रही है राजनीतिक बहस?
‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश में समय-समय पर राजनीतिक और वैचारिक बहस होती रही है. हालिया घटनाक्रम में भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. केरल में एक मंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया था.
ऐसे में नए कानून के लागू होने के बाद राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक बहस के साथ-साथ इसके कानूनी पहलू पर भी चर्चा तेज होने की संभावना है.
संशोधित कानून लागू हो चुका
बहरहाल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संशोधित कानून लागू हो चुका है. अब इसके तहत किसी शिकायत पर पुलिस और प्रशासन किस तरह कार्रवाई करते हैं और अदालतें इन प्रावधानों की व्याख्या कैसे करती हैं, यह महत्वपूर्ण होगा.
कुल मिलाकर, इस बदलाव ने ‘वंदे मातरम्’ को केवल राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक के रूप में ही नहीं, बल्कि स्पष्ट कानूनी संरक्षण प्राप्त राष्ट्रगीत के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. आने वाले समय में इसके प्रावधानों के व्यावहारिक इस्तेमाल से यह और स्पष्ट होगा कि कानून किन परिस्थितियों में लागू किया जाता है.
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