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Mangla Gauri Vrat 2026: आज मंगला गौरी व्रत के साथ सावन शिवरात्रि का संयोग, सुहागिन महिलाएं जरूर करें ये काम
Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस बार 11 अगस्त 2026 का दिन शिव-पार्वती भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व लेकर आया है। आज सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत है और इसी दिन सावन शिवरात्रि का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा कर सकते हैं।
मंगला गौरी व्रत मुख्य रूप से माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से मां गौरी की पूजा करती हैं।
मंगला गौरी व्रत में कैसे करें पूजा?
व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां गौरी और भगवान शिव की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
मां गौरी को लाल या पीले वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद सिंदूर, अक्षत, फूल, माला, फल और मिठाई चढ़ाएं। सुहागिन महिलाएं मां गौरी को चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर और चुनरी जैसी सुहाग सामग्री भी अर्पित कर सकती हैं।
पूजा के दौरान मां गौरी का ध्यान करते हुए पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करें। अंत में आरती करें और अपनी परंपरा के अनुसार मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
सुहागिन महिलाएं मां गौरी को ये चीजें जरूर चढ़ाएं
मंगला गौरी पूजा में सुहाग सामग्री का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं अपनी श्रद्धा के अनुसार मां गौरी को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, कंघी, चुनरी और अन्य सुहाग की वस्तुएं अर्पित कर सकती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुहाग सामग्री अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना या किसी अन्य सुहागिन महिला को देना शुभ माना जाता है। इससे अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख की कामना की जाती है।
शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का खास संयोग
इस बार मंगला गौरी व्रत के साथ सावन शिवरात्रि का पर्व भी पड़ रहा है। ऐसे में भक्त एक ही दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
शिव-पार्वती की पूजा से क्या मिलता है?
धार्मिक मान्यताओं में मां गौरी को वैवाहिक सुख और सौभाग्य की देवी माना गया है। वहीं भगवान शिव की आराधना से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है।
इसी वजह से मंगला गौरी व्रत और सावन शिवरात्रि का एक साथ पड़ना भक्तों के लिए विशेष अवसर माना जा रहा है। सुहागिन महिलाएं मां गौरी की पूजा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना कर सकती हैं।
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