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धरती पर बरस सकता है अंतरिक्ष में जमा खतरनाक कचरा! सूरज बना सबसे बड़ा 'खलनायक', ISRO वैज्ञानिकों ने दी तबाही की चेतावनी

अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे (Space Debris) को लेकर जहाँ दुनिया भर की एजेंसियां चिंतित हैं, वहीं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने एक राहत भरी और चौंकाने वाली पुष्टि की है। इसरो की एक नई स्टडी के अनुसार, सूरज अपनी सक्रियता के जरिए पुराने और खराब हो चुके सैटेलाइट्स को धरती की ओर खींचकर अंतरिक्ष को साफ करने में मदद कर रहा है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) की स्पेस फ़िज़िक्स लैबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह साबित किया है कि सूरज की 11 साल के सौर चक्र (Solar Cycle) की सक्रियता सीधे तौर पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद कचरे की ऊंचाई को प्रभावित करती है।
 

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उनके ये नतीजे, जो 'फ्रंटियर्स इन एस्ट्रोनॉमी एंड स्पेस साइंसेज़' में छपे हैं, भविष्य के सैटेलाइट मिशनों की योजना बनाने के तरीके को बदल सकते हैं। यह रिसर्च बताती है कि जब सूरज की सक्रियता अपने 11 साल के सौर चक्र के दौरान अपने चरम (peak) के लगभग 67% तक पहुँच जाती है, तो ऑर्बिट में घूमता कचरा काफ़ी तेज़ी से नीचे आने लगता है।

मुख्य लेखक आयशा एम. अशरफ़ ने कहा, "यहाँ हम यह दिखाते हैं कि जब सूरज ज़्यादा सक्रिय होता है, तो धरती के आस-पास मौजूद अंतरिक्ष का कचरा अपनी ऊंचाई कहीं ज़्यादा तेज़ी से खोता है। पहली बार हमने पाया है कि जब सूरज की सक्रियता एक निश्चित स्तर से ऊपर चली जाती है, तो ऊंचाई में यह कमी साफ़ तौर पर ज़्यादा तेज़ी से होती है।"

यह खोज एक बहुत ही अहम समय पर सामने आई है। लो अर्थ ऑर्बिट (LEO)—जो धरती से लगभग 400 km से 2,000 km की ऊंचाई के बीच का क्षेत्र है—अब सैटेलाइट्स, रॉकेट के छोड़े हुए हिस्सों और पिछली टक्करों से बने टुकड़ों से काफ़ी भर गया है। इस क्षेत्र में धरती पर नज़र रखने वाले अंतरिक्ष यान और इंटरनेट के लिए बने बड़े सैटेलाइट नेटवर्क (जैसे SpaceX का Starlink नेटवर्क) मौजूद हैं।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ऑर्बिट में होने वाली एक भी टक्कर से टक्करों की एक पूरी शृंखला शुरू हो सकती है, जिससे हज़ारों और टुकड़े बन सकते हैं। ये टुकड़े अभी काम कर रहे सैटेलाइट्स और भविष्य के मिशनों के लिए खतरा बन सकते हैं।

टीम ने 1960 के दशक में छोड़े गए अंतरिक्ष के कचरे के 17 टुकड़ों की गति पर नज़र रखी और 36 सालों तक (सौर चक्र 22 से 24 के दौरान) उनके ऑर्बिट में आने वाली गिरावट को मॉनिटर किया। ये चीज़ें धरती के चारों ओर हर 90 से 120 मिनट में 600 km से 800 km की ऊंचाई पर चक्कर लगाती हैं।

सक्रिय सैटेलाइट्स के उलट—जो अपने अंदर मौजूद ईंधन का इस्तेमाल करके अपने ऑर्बिट को ठीक करते रहते हैं—अंतरिक्ष का कचरा सिर्फ़ वायुमंडलीय स्थितियों के हिसाब से ही प्रतिक्रिया देता है। इसी वजह से यह कचरा इस बात का अध्ययन करने के लिए एकदम सही था कि सूरज की सक्रियता धरती के ऊपरी वायुमंडल पर किस तरह असर डालती है।

जब सूरज बहुत ज़्यादा सक्रिय होता है, तो वह ज़्यादा तेज़ अल्ट्रावॉयलेट किरणें और आवेशित कण (charged particles) छोड़ता है। इन उत्सर्जनों से पृथ्वी के वायुमंडल की ऊपरी परत, थर्मोस्फीयर, गर्म होकर फैलती है, जिससे कक्षीय ऊंचाइयों पर वायुमंडलीय घनत्व बढ़ जाता है। इससे उपग्रहों और मलबे पर खिंचाव बढ़ जाता है, जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है और वे पृथ्वी के करीब आ जाते हैं।
 

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शोधकर्ताओं ने मलबे के प्रक्षेप पथों को पॉट्सडैम स्थित जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र से प्राप्त सूर्य धब्बों की संख्या और सौर रेडियो और चरम पराबैंगनी उत्सर्जन के मापों सहित दीर्घकालिक सौर आंकड़ों से जोड़ा। उनके विश्लेषण में सौर गतिविधि के अपने चरम स्तर के लगभग दो-तिहाई को पार करने के बाद एक स्पष्ट "संक्रमण सीमा" पाई गई।

अशरूफ ने कहा, "हमारे परिणाम बताते हैं कि जब सौर गतिविधि कुछ निश्चित स्तरों को पार कर जाती है, तो उपग्रह, अंतरिक्ष मलबे की तरह, तेजी से ऊंचाई खो देते हैं, जिससे अधिक कक्षा सुधारों की आवश्यकता होती है।"

इन निष्कर्षों का उपग्रह संचालकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से तब जब सरकारें और निजी कंपनियां पहले से ही भीड़भाड़ वाली कक्षाओं में हजारों नए अंतरिक्ष यान लॉन्च कर रही हैं। सौर अधिकतम की अवधि के आसपास लॉन्च किए गए मिशनों को स्थिर रहने के लिए अधिक ईंधन की आवश्यकता हो सकती है और मलबे के पथों में बदलाव से टकराव का खतरा बढ़ सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन दशकों पुराने अंतरिक्ष मलबे के अप्रत्याशित वैज्ञानिक महत्व को भी उजागर करता है। “सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सारी जानकारी 1960 के दशक में लॉन्च किए गए पिंडों से प्राप्त हुई है,” अशरूफ ने कहा। “वे आज भी विज्ञान में योगदान दे रहे हैं।”

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Bihar Cabinet Expansion: सम्राट की टीम में कौन-कौन? JDU-BJP के इन चेहरों पर लग सकती है मुहर

बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार गुरुवार को होने वाला है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और एनडीए के मुख्यमंत्रियों समेत अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता उपस्थित रहेंगे। पश्चिम बंगाल में भाजपा की शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह बिहार की पहली यात्रा होगी और उनके स्वागत की भव्य तैयारियां चल रही हैं।
 

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चौधरी ने 15 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। वे राज्य में मुख्यमंत्री पद संभालने वाले भगवा पार्टी के पहले नेता हैं। यह शपथ ग्रहण बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा में शामिल होने के लिए पद से इस्तीफा देने के बाद हुआ। चौधरी के साथ-साथ जेडीयू के विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली थी। सूत्रों के मुताबिक, इस मंत्रिमंडल विस्तार में एनडीए गठबंधन के कई पुराने और नए चेहरों को मौका मिल सकता है।

जेडीयू कोटे से संभावित नाम: श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, जमा खान, सुनील कुमार, शीला मंडल, रत्नेश सादा, बुलो मंडल, जयंत राज और भगवान सिंह कुशवाहा जैसे नेताओं को फिर से मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

बीजेपी कोटे से संभावित नाम: विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, राम कृपाल यादव, दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, लक्ष्मींद्र प्रसाद, रमा निवास, प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, अरुण शंकर प्रसाद सिंह, संजय सिंह (टाइगर), नीतीश मिश्रा या मिथिलेश तिवारी जैसे नाम चर्चा में हैं।
 

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वहीं, लोजपा (रामविलास), से संजय सिंह और संजय पासवान के नाम चर्चा में हैं। वहीं हम से संतोष मांझी और रालोसपा से दीपक प्रकाश को मौका मिल सकता है, हालांकि अभी अंतिम सूची पर मुहर लगना बाकी है। बताया जा रहा है कि बीजेपी और जेडीयू 1-2 सीटें सहयोगी दलों के लिए खाली छोड़ सकती हैं।

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  Sports

RR vs GT: राजस्थान रॉयल्स की घर में गुजरात टाइटंस से टक्कर, दोनों टीमों की टॉप-4 पर नजर

RR vs GT: आईपीएल 2026 का प्लेऑफ मुकाबला अब पहले से ज्यादा रोमांचक हो गया है। कुछ हफ्ते पहले तक ऐसा लग रहा था कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, पंजाब किंग्स, सनराइजर्स हैदराबाद, और राजस्थान रॉयल्स की टीमें आसानी से टॉप-4 में जगह बना लेंगी। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। कई टीमें तेजी से वापसी कर रही हैं और पॉइंट्स टेबल की लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई।

सबसे ज्यादा चर्चा गुजरात टाइटंस की हो रही है, जो इस समय शानदार फॉर्म में दिख रही है। गुजरात ने लगातार 3 मैच जीतकर प्लेऑफ की रेस में खुद को मजबूती से बनाए रखा है। टीम का टॉप ऑर्डर लगातार रन बना रहा है, जबकि वॉशिंगटन सुंदर और राशिद खान भी लय में लौट आए हैं। तेज गेंदबाजों ने भी विपक्षी टीमों पर दबाव बनाए रखा है।

अब गुजरात का मुकाबला राजस्थान रॉयल्स से होने जा रहा है। दोनों टीमों ने अब तक 10 मैचों में 6 जीत और 4 हार दर्ज की है, लेकिन दोनों का सफर अलग रहा है। गुजरात लगातार जीत के साथ आत्मविश्वास में है, जबकि राजस्थान ने पिछले पांच में से तीन मैच गंवाए हैं। ऐसे में यह मुकाबला राजस्थान के लिए ज्यादा अहम माना जा रहा है।

राजस्थान की सबसे बड़ी चिंता उसकी गेंदबाजी रही है। टीम लगातार बड़े स्कोर डिफेंड करने में नाकाम रही है। जयपुर में ही टीम 228 और 225 रन बनाने के बाद भी मैच हार चुकी है। जोफ्रा आर्चर ने जरूर अच्छी गेंदबाजी की है, लेकिन दूसरे गेंदबाज उनका साथ नहीं दे पाए हैं। वहीं, रवींद्र जडेजा रन रोकने में सफल रहे, लेकिन विकेट कम मिले हैं।

दूसरी तरफ गुजरात के लिए कगिसो रबाडा और मोहम्मद सिराज शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। रबाडा इस सीजन में 16 विकेट लेकर टीम के सबसे सफल गेंदबाज बने हुए हैं। खासकर पावरप्ले में उनकी गेंदबाजी काफी असरदार रही है।

इस मैच में राजस्थान के बल्लेबाज ध्रुव जुरेल पर भी नजर रहेगी। उन्होंने इस सीजन में तीन अर्धशतक लगाए हैं, लेकिन लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। टीम को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद होगी। राजस्थान अपनी प्लेइंग इलेवन में बदलाव कर सकती है। टीम शिमरॉन हेटयमार या दासुन शनाका को मौका दे सकती है। वहीं गुजरात जीत के बाद अपनी टीम में ज्यादा बदलाव नहीं करना चाहेगी।

जयपुर की पिच इस सीजन में बल्लेबाजों के लिए मददगार रही है और एक बार फिर हाई स्कोरिंग मुकाबला देखने को मिल सकता है। ओस भी अहम भूमिका निभाएगी, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है।

दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-12

राजस्थान रॉयल्स (संभावित XII): 1 यशस्वी जायसवाल, 2 वैभव सूर्यवंशी, 3 ध्रुव जुरेल (विकेट कीपर), 4 रियान पराग (कप्तान), 5 डोनोवन फरेरा, 6 रवींद्र जडेजा, 7 शुभम दुबे, 8 जोफ्रा आर्चर, 9 रवि बिश्नोई, 10 नंद्रे बर्गर/दासुन शनाका, 11 बृजेश शर्मा, 12 तुषार देशपांडे। 

गुजरात टाइटन्स (संभावित बारह): 1 शुभमन गिल (कप्तान), 2 साई सुदर्शन, 3 जोस बटलर (विकेट कीपर), 4 निशांत सिंधु, 5 वाशिंगटन सुंदर, 6 जेसन होल्डर, 7 राहुल तेवतिया, 8 राशिद खान, 9 मानव सुथार, 10 अरशद खान, 11 कगिसो रबाडा, 12 मोहम्मद सिराज।

Sat, 09 May 2026 13:43:57 +0530

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