अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा मार्च में करीब 50 प्रतिशत घटकर 3.8 अरब डॉलर रहा
वाशिंगटन, 6 मई (आईएएनएस)। अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा मार्च 2026 में 3.8 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल की समान अवधि के घाटे 7.4 अरब डॉलर से 48.64 प्रतिशत कम है। यह जानकारी अमेरिकी सरकार के आधिकारिक डेटा में दी गई।
अमेरिकी सरकार की ओर से बताया गया कि मार्च 2026 में अमेरिका का भारत को निर्यात बढ़कर 4.3 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, भारत से आयात 8.4 अरब डॉलर रहा है।
भारत के साथ आयात-निर्यात में अंतर कम होने के बावजूद अमेरिका के व्यापार घाटे में बढ़ोतरी हुई है। मार्च में वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 60.3 अरब डॉलर हो गया, जो फरवरी के संशोधित 57.8 अरब डॉलर से 2.5 अरब डॉलर अधिक है।
मार्च में अमेरिकी निर्यात 320.9 अरब डॉलर रहा, जो फरवरी से 6.2 अरब डॉलर अधिक है, जबकि आयात 8.7 अरब डॉलर बढ़कर 381.2 अरब डॉलर हो गया।
यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है जब भारत और अमेरिका आर्थिक संबंधों को और गहरा करने के व्यापक प्रयासों के बीच व्यापार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी सहयोग और शुल्क संबंधी मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं।
मार्च में अमेरिका के कुल व्यापार घाटे में वृद्धि मुख्य रूप से वस्तुओं के घाटे में वृद्धि के कारण हुई, जो 4.1 अरब डॉलर बढ़कर 88.7 अरब डॉलर हो गया। सेवाओं का अधिशेष भी 1.6 अरब डॉलर बढ़कर 28.4 अरब डॉलर हो गया।
कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में वृद्धि के कारण मार्च में औद्योगिक आपूर्ति और सामग्रियों के निर्यात में 5 अरब डॉलर की तेज वृद्धि हुई। अकेले कच्चे तेल के निर्यात में 2.8 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।
दूसरी तरफ, ऑटोमोबाइल उत्पादों, उपभोक्ता वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं के आयात में उछाल से आयात को बढ़ावा मिला। ऑटोमोबाइल वाहनों, पुर्जों और इंजनों के आयात में 3.6 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जबकि यात्री कारों के आयात में 2.8 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।
कंप्यूटर एक्सेसरीज के आयात में 2 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी उत्पादों की निरंतर मांग को दर्शाती है।
आंकड़ों से यह भी पता चला कि मार्च में चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 14 अरब डॉलर था, जबकि वियतनाम और ताइवान के साथ घाटा क्रमशः 19.2 अरब डॉलर और 20.6 अरब डॉलर था।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में बातचीत के लिए तैयार: राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान
तेहरान, 6 मई (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इराक के प्रधानमंत्री-नामित अली अल-जैदी के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान पेजेशकियान ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह किसी भी दबाव के आगे झुकेगा नहीं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, एक आधिकारिक बयान में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा, हमारी समस्या यह है कि एक ओर अमेरिका देश पर दबाव की नीति अपना रहा है और दूसरी ओर वह चाहता है कि ईरान बातचीत की मेज पर आए और आखिरकार उसकी एकतरफा मांगों के सामने आत्मसमर्पण कर दे। लेकिन यह असंभव है।
उन्होंने कहा कि ईरान मूल रूप से युद्ध और असुरक्षा को किसी भी तरह से उचित विकल्प नहीं मानता। इसके साथ ही, पेजेशकियान ने कहा कि ईरान को परमाणु तकनीक से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, अमेरिका ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे ईरान को परमाणु उद्योग रखने का अधिकार ही नहीं है। वह अत्यधिक मांगें सामने रखकर देश पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने आगे कहा कि पिछली सभी वार्ताओं में ईरान पूरी तरह तैयार था कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैश्विक निगरानी के तहत जो भी आवश्यक हो, वह सब कुछ उपलब्ध कराए ताकि उसके परमाणु गतिविधियों के शांतिपूर्ण स्वरूप को सुनिश्चित किया जा सके।
दूसरी ओर, अल-जैदी ने इराक की ओर से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने की तत्परता जताई, ताकि क्षेत्रीय संकटों को कम किया जा सके। अल-जैदी के मीडिया कार्यालय के एक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने भविष्य में आधिकारिक यात्राओं के आदान-प्रदान पर भी सहमति जताई, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जा सके।
बता दें कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे, जिसमें तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडरों और नागरिकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ, जिसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई, लेकिन वह बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी। फिलहाल, अमेरिका और ईरान लगातार समझौते के तहत युद्धविराम को जारी रखने की कोशिशों में जुटे हैं।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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