रिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड अपनी जरूरतें सीधे नहीं बताती:इनडायरेक्ट ताने देती है, मैं इमोशनल स्ट्रेस में हूं, क्या करूं?
सवाल- मैं एक सरकारी बैंक में कैशियर हूं। कुछ महीनों से एक लड़की के साथ रिलेशनशिप में हूं। हमारे बीच सब अच्छा है, लेकिन वो अपनी जरूरतें सीधे बोलने की बजाय इशारों में कहती है। जैसे- 'मेरे पास बाहर जाने के लिए अच्छे कपड़े नहीं हैं।' 'उस लड़की की वॉच कितनी अच्छी है।' 'उस लड़की का बैग कितना प्यारा लग रहा है।' कई बार वो अपने फाइनेंशियल या पर्सनल स्ट्रेस भी ऐसे ही बताती है, ताकि मैं खुद मदद की पेशकश करूं। शुरू में मैंने किया भी, लेकिन अब मैं मेंटली थक गया हूं। क्या वह जानबूझकर ऐसा करती है ताकि मैं गिल्ट महसूस करूं? क्या ये इमोशनल इंफ्लुएंस है? मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने इतने स्पष्ट शब्दों में सवाल पूछा। इसी तरह हेल्दी रिलेशनशिप के लिए भी स्पष्ट संवाद जरूरी है। आपने लिखा कि आपकी पार्टनर हर बात इशारों में कहती है। ऐसी स्थिति में थकान महसूस होना स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और प्रैक्टिकल सॉल्यूशन पर बात करते हैं। पार्टनर बता रहा है या पहेली बुझा रहा है? रिलेशनशिप में अपनी बात रखना हर किसी का हक है, लेकिन उसे कहने का तरीका स्पष्ट होना चाहिए। बार-बार बातों को घुमाना और खुद को ‘बेचारा’ दिखाना इमोशनल मैनिपुलेशन है। यह स्थिति धीरे-धीरे रिश्ते की सहजता को खत्म कर सकती है। ग्राफिक में दिए उदाहरणों से समझें कि 'मैनिपुलेशन' और 'हेल्दी कम्युनिकेशन' में क्या फर्क है- मैनिपुलेशन की साइकोलॉजी अगर किसी रिलेशनशिप में एक पार्टनर हर बार इशारों में बात कहता है, तो दूसरा 'डिकोडिंग मोड' में चला जाता है। इसे ‘डिसीजन फटीग’ भी कहते हैं, जहां व्यक्ति हर वक्त यह सोचकर तनाव में रहता है कि सामने वाले की किस बात का क्या मतलब है। आपने लिखा कि आपकी गर्लफ्रेंड अपनी डिमांड्स इसी तरह रखती है। इसके बावजूद अगर आप सभी डिमांड्स पूरी कर रहे हैं तो आपको सेल्फ-एसेसमेंट करना चाहिए। कहीं आप 'गिल्ट ट्रिप' के शिकार तो नहीं, अपना सेल्फ-एसेसमेंट करें रिश्तों में कभी-कभी हम वह सब भी करने लगते हैं, जो नहीं करना चाहते। इसकी वजह ‘गिल्ट’ हो सकती है। नीचे दिए एसेसमेंट टेस्ट से समझिए कि कहीं आप ‘गिल्ट ट्रिप’ में तो नहीं जा रहे हैं। कैसे करें? नीचे ग्राफिक में 7 सवाल दिए गए हैं। हर सवाल को ध्यान से पढ़ें और अपनी स्थिति के अनुसार खुद को 0 से 3 के बीच नंबर दें- 0: बिल्कुल नहीं 1: कभी-कभार 2: अक्सर 3: हमेशा/हर बार फिर स्कोर एनालिसिस करें- सभी सवालों के नंबरों को जोड़ लें और अपना टोटल स्कोर देखें। अगर स्कोर 15 से ऊपर है, तो यह 'क्रॉनिक गिल्ट ट्रिप' का संकेत है। इसका मतलब है कि आपको अपनी बाउंड्रीज तय करने और खुद पर काम करने की सख्त जरूरत है। अगर स्कोर 6-14 के बीच है तो सतर्क हो जाएं और सुधार करें। अगर स्कोर 1-5 के बीच है तो कोई समस्या नहीं है। प्रेम का मतलब अटकलें लगाना नहीं है आपने लिखा कि वह अपनी पर्सनल बातें शेयर करते समय भी यही तरीका फॉलो करती है। साइकोलॉजी के मुताबिक, कुछ लोग ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि 'ना' की गुंजाइश खत्म हो जाए। उन्हें लगता है कि चीजें सीधे मांगने पर मना किया जा सकता है। इसलिए वे अपनी बात कहने के लिए इशारों का सहारा लेते हैं। लेकिन किसी भी रिश्ते में यह तरीका हेल्दी नहीं है। रिलेशनशिप में यह तरीका टॉक्सिक है कभी-कभी लोग अनजाने में भी इस तरह बिहेव करते हैं। ऐसा हो सकता है कि उन्होंने बचपन से इसी तरह अपनी बातें मनवाई हों। इसे 'लर्न्ड बिहेवियर' कहते हैं। लेकिन एडल्ट रिलेशनशिप में यह तरीका 'टॉक्सिक' है। आपको भी यह समझना होगा कि हेल्दी और टॉक्सिक बिहेवियर में क्या फर्क है- समझदार आदमी को क्या करना चाहिए? नीचे दिए 6 पॉइंट्स से समझें कि इस सिचुशन में क्या करना चाहिए- बाउंड्री सेट करें: अपनी आर्थिक और मानसिक सीमाओं को स्पष्ट करें। बताएं कि आप क्या कर सकते हैं और क्या आपकी क्षमता से बाहर है। खुलकर बातचीत करें: जब वह इशारों में बात करे तो बहुत ही सौम्यता से कहें, "मैं समझ नहीं पा रहा कि तुम क्या कहना चाह रही हो, क्या तुम खुलकर बताओगी?" पार्टनर को अपनी बात सीधे कहने के लिए प्रोत्साहित करें। पैसे का दिखावा न करें: रिश्ते में गिफ्ट्स से ज्यादा अहमियत समय और इमोशनल सपोर्ट को दें। शर्मिंदगी महसूस न करें: अगर आप कोई डिमांड पूरी नहीं कर पाते तो उसे अपनी असफलता न मानें। गर्लफ्रेंड को 'क्राउन' न समझें: उसे अपना पार्टनर मानें। एक साथी अपनी जरूरतों के लिए दूसरे पर दबाव नहीं डालता, बल्कि मिलकर समाधान निकालता है। शोशेबाजी न करें: बाहरी चमक-धमक की बजाय रिश्ते की गहराई और सच्चाई पर ध्यान दें। अंतिम सलाह कोई रिश्ता 'माइंड रीडिंग' से नहीं, बल्कि 'स्पष्ट संवाद' से सुंदर बनता है। अगर पार्टनर की बातें पहेली बन जाएं, तो उन्हें सुलझाने की बजाय खुलकर बात करें। विनम्रता से अपनी बाउंड्रीज बताएं और खुद को भी अनावश्यक गिल्ट से मुक्त रखें। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया: हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन आप जीवन के उस पड़ाव पर हैं, जहां भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। इस उम्र में किसी की तरफ अट्रैक्ट होना, हर वक्त उसके बारे में सोचना, बेचैनी होना बहुत स्वाभाविक है। ये अच्छी बात है कि आप अपनी भावनाओं को लेकर अवेयर हैं और जल्दबाजी में किसी फैसले से पहले इसे समझना चाहते हैं। आगे पढ़िए…
जरूरत की खबर- तेज धूप में सनग्लासेस पहनना जरूरी:UV किरणों से आंखों को होते 10 नुकसान, खरीदते समय ये 8 जरूरी बातें ध्यान रखें
गर्मियों में घर से बाहर निकलना चैलेंजिंग होता है। लेकिन रोजमर्रा के काम से बाहर निकलना मजबूरी है। तेज धूप में बाहर निकलते समय आंखों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे जलन, धुंधलापन और लॉन्ग टर्म में आंखों से जुड़ी बीमारियों का रिस्क होता है। ऐसे में सनग्लासेस आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। सही सनग्लासेस धूप, धूल और हानिकारक UV किरणों से बचाते हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि गर्मियों में सनग्लासेस पहनना क्यों जरूरी है और इसे खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। एक्सपर्ट: डॉ. श्रेया गुप्ता, कंसल्टेंट, ऑप्थेल्मोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- क्या गर्मियों में सनग्लासेस पहनना जरूरी है? जवाब- हां, यह आंखों को हानिकारक UV किरणों, तेज रोशनी और धूल से बचाता है। इससे जलन, ड्राईनेस और अन्य समस्याओं का रिस्क कम होता है। सवाल- अल्ट्रावायलेट किरणों का आंखों पर क्या असर पड़ता है? जवाब- सूर्य की रोशनी से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें आंखों के बाहरी और अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। नीचे दिए ग्राफिक में इसका असर देखिए- सवाल- क्या सनग्लासेस अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाते हैं? जवाब- हां, सही क्वालिटी के सनग्लासेस UV किरणों से बचाते हैं। खासतौर पर ‘UV400’ प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस आंखों को हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षित रखते हैं। सवाल- क्या सिर्फ तेज धूप में ही सनग्लासेस लगाना जरूरी है या हल्की धूप में भी लगाना चाहिए? जवाब- सनग्लासेस हल्की धूप में भी पहनना चाहिए। UV किरणें बादलों या हल्की धूप में भी मौजूद रहती हैं। इसलिए बाहर निकलते समय सनग्लासेस लगाना बेहतर है। सवाल- तेज धूप में बिना सनग्लासेस बाहर निकलने से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- सनग्लासेस न पहनने से आंखें सीधे UV किरणों और तेज रोशनी के संपर्क में आती हैं। इससे आंखों को कई नुकसान हो सकते हैं। जैसेकि- सवाल- क्या सस्ते या लोकल सनग्लासेस नुकसानदायक हो सकते हैं? जवाब- हां, इनमें UV प्रोटेक्शन नहीं होता है। ये सिर्फ रोशनी कम करते हैं, जिससे आई बॉल(पुतली) फैल जाती है और हानिकारक UV किरणें आंखों में प्रवेश कर सकती हैं। इससे आंखों को डैमेज का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- किस तरह के सनग्लासेस गर्मियों के लिए सबसे बेहतर होते हैं? जवाब- ‘UV400’ या ‘100% UV प्रोटेक्शन’ वाले सनग्लासेस सबसे अच्छे होते हैं। ये आंखों को हानिकारक किरणों से बचाते हैं। सवाल- सनग्लासेस आंखों को किन समस्याओं से बचाते हैं? जवाब- सनग्लासेस UV किरणों, तेज रोशनी और धूल से बचाकर कई समस्याओं से सुरक्षा देते हैं। UV सनग्लासेस के सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को गर्मियों में सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए, क्योंकि उन्हें UV किरणें ज्यादा प्रभावित करती हैं। नीचे दिए ग्राफिक में देखिए, किन्हें सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए- सवाल- सनग्लासेस खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जवाब- सनग्लासेस खरीदते समय सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि क्वालिटी और प्रोटेक्शन को प्राथमिकता देना चाहिए। इससे आंखों को सही सेफ्टी मिलती है। इसलिए सनग्लासेस खरीदते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या लंबे समय तक सनग्लासेस पहनने से आंखों पर कोई बुरा असर पड़ता है? जवाब- नहीं, सही क्वालिटी के सनग्लासेस से आंखों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। ये आंखों को UV किरणों, धूल और तेज रोशनी से बचाकर सुरक्षा देते हैं। हालांकि खराब क्वालिटी या बिना UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सनग्लासेस से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब सवाल- बादल होने पर भी UV किरणों का खतरा रहता है? जवाब- हां, बादलों के बावजूद UV किरणें जमीन तक पहुंचती हैं, इसलिए हमेशा आंखों की सुरक्षा जरूरी है। सवाल- क्या सुबह-शाम की धूप में भी UV किरणों का खतरा रहता है? जवाब- हां, सुबह-शाम UV तीव्रता कम होती है, लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता है। सवाल- क्या हरेक सनग्लास UV किरणों से प्रोटेक्ट करता है? जवाब- नहीं, केवल UV400 या 100% UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस ही सही सुरक्षा देते हैं। सवाल- क्या सनग्लासेस आंखों को ड्राईनेस और इरिटेशन से बचाते हैं? जवाब- हां, ये धूल, हवा और तेज रोशनी से बचाकर ड्राईनेस और जलन कम करते हैं। सवाल- क्या सनग्लासेस पहनने से आंखों की थकान कम होती है? जवाब- हां, ये तेज रोशनी की चुभन कम करते हैं, जिससे आंखों पर तनाव घटता है। सवाल- क्या कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को भी सनग्लासेस लगाने चाहिए? जवाब- हां, कॉन्टैक्ट लेंस पूरी तरह अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा नहीं देते, इसलिए उन्हें भी सनग्लासेस लगाने चाहिए। ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गर्मियों में न खाएं ये 10 चीजें: डाइटीशियन से जानें इनके हेल्दी विकल्प, सादा और ताजा खाएं, लिक्विड डाइट पर जोर दें गर्मियों में शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं। इसलिए खानपान में भी बदलाव की जरूरत होती है। लेकिन लोग स्वाद के लिए अक्सर डीप फ्राइड और स्पाइसी फूड खाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। ऐसे में फिट और एनर्जेटिक रहने के लिए यह जानना जरूरी है कि गर्मियों में क्या खाएं और क्या नहीं खाएं। पूरी खबर पढ़ें…
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