आगामी मानसून को लेकर के पहला पूर्वानुमान जारी करने के साथ ही मौसम विभाग ने आने वाले मानसूनी सत्र में सामान्य से कम बरसात के संकेत दे दिए हैं। हांलाकि अभी मानसून के पूर्वानुमान और भी जारी किये जाएंगे पर यह आरंभिक सूचना आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सामान्य से 8 फीसदी तक कम बरसात की संभावना जताई गई है। देश के कई हिस्सों में कम बरसात होने के संकेत है तो कुछ हिस्सों में सामान्य बरसात भी हो सकती है। माना जा रहा है कि अल नीनो इफेक्ट के चलते मानसून कमजोर रहेगा। यह भी सही है कि हमारे मौसम मंत्रालय द्वारा जारी पूर्वानुमान अब काफी हद तक आसपास रहने लगे हैं। यहां तक कि दो से तीन घंटों में बरसात होने या आंधी तूफान या ओलावृष्टि तक के पूर्वानुमान खरे उतरने लगे हैं। ऐसे में मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को गंभीरता से लेते हुए केन्द्र व राज्यों की सरकारों को अभी से पूर्व तैयारियां करने में जुट जाना चाहिए। खासतौर से आपदा प्रबंधन मंत्रालय को अभी से भावी रणनीति तय करनी होगी। देश में मानसून सीजन में 87 सेमी बरसात होती है जिसके अनुमानों के अनुसार 81 सेमी तक रहने की आशंका है। पूर्वानुमानों को माने तो 2018 में 91 प्रतिशत बरसात हुई थी उसके बाद के सालों में मानसून लगभग अच्छा ही रहा है। पिछले आठ सालों में मानसून की स्थिति देखें तो 2023 में मानसून अवश्य कमजोर रहा है अन्यथा देष में मानसूनी वर्षा 100 प्रतिशत के आसापास व इससे अधिक ही रही है।
हमारे देश में मानसूनी बरसात पर निर्भरता अधिक है। जहां खेती में मानसूनी बरसात की निर्भरता बहुत अधिक है तो दूसरी और पेयजल को लेकर भी मानसून पर निर्भरता अधिक है। जलाशयों में पानी के भण्डारण और भूजल स्तर भी बरसाती पानी पर ही निर्भर है। हमारी खेती मुख्यतः मानसून पर निर्भर हैं। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता कमी के कारण मानसून पर खेती 55 से 64 प्रतिशत निर्भर है। पीने के पानी की समस्या भी कमजोर मानसून से प्रभावित होती है। हमारे यहां मानसून का समय जून से सितंबर तक का रहता है। अब सवाल उठता है कि पिछले सालों में मानसून सामान्य से अच्छा रहने के बावजूद कमजोर मानसून की स्थिति से निपटने में हमारी तैयारी कोई अच्छी नहीं मानी जा सकती। अत्यधिक भूजल दोहन और जल संचयन की दीर्घकालीक नीति के अभाव में ठोस परिणाम प्राप्त नहीं हो पाये हैं। ऐसा नहीं है कि नीति नहीं बनती हो या ऐसा भी नहीं है कि जल संचयन के प्रयास नहीं होते हो पर जो परिणाम देखने में आए हैं वह कोई आशाजनक नहीं माने जा सकते। पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की बात करना तो हमारे यहां बेमानी ही रही है। प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण व संधारण में भी हम कुछ अधिक नहीं कर पाये हैं। इसके अलावा हमारे यहां दुर्भाग्यजनक बात यह है कि तात्कालिक प्रयास होते हैं। शहरीकरण की आड़ में प्राकृतिक जल स्रोत या तो नष्ट हो गए हैं या उनमें बरसात के पानी जाने के रास्ते अवरुद्ध या बंद हो गए हैं। नदी नालों के रास्ते या तो बंद हो गए हैं या अवरुद्ध हो गए हैं। बरसात के पानी के जलाशयों में रास्तों में अनधिकृत कब्जें, निर्माण और रिसोर्ट बना दिए है। एक समय ऐसा भी आया कि जब विशेषज्ञों ने बरसात के पानी जाने के रास्तों में जगह जगह एनिकट बनाने की सलाह दे ड़ाली और छोटे छोटे एनिकट बनने से नदियों-जलाशयों में पानी की आवक प्रभावित हो गई। इससे तात्कालीक यानी कि एनिकटों में पहले पानी एकत्र तो हुआ पर बाद में इनका रख रखाव नहीं होने से दोहरा नुकसान हुआ। इसी तरह से वर्षा जल संचयन के लिए वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम के लिए सरकार ने अरबों रुपये खर्च किये पर उनके निर्माण के आंकड़ें पूरे करने के चक्कर में हम भूल गए कि बरसात के पानी इनमें कितना व कैसे जा पाएगा। फिर बरसात से पहले इनकी देखरेख पर भी ध्यान नहीं देने से जो परिणाम मिलने चाहिए थे वे नहीं मिल सके हैं। एक और हमारे दैनिक उपभोग में भी पानी का उपयोग अधिक बढ़ा है आज पेयजल से कई गुणा अधिक पानी टायलेट और कुलरों में उपयोग होने लगा है। समय रहते टायलेट में कम पानी के उपयोग की कोई राह निकाली जाती तो हालात में सुधार ही होता। इसी तरह से देशभर में वाटर ट्र्टिमेंट सिस्टम लगाने का अभियान चला पर इनके परिणाम भी ज्यादा अच्छे नहीं देखे जा रहे है। रिसाइकिल पानी को लेकर भी कोई स्पष्ट नीति तय हो तो कुछ हद तक समाधान हो सकता है। खैर यह तो हालात की तस्वीर है।
सौ टके का सवाल यह है कि कमजोर मानसून के हालात से निपटने की कार्ययोजना हमें अभी से बनानी होगी। मौसम विभाग ने अप्रेल में यह चेतावनी दे दी है। मानसून जून में आएगा। ऐसे में अभी मई का महीना हमारे पास है। अभी से सरकार को कमर कसनी होगी। कमजोर मानसून के हालात में हमें कम पानी से अधिक बेहतर हालात बनाने के प्रयास करने होंगे। इसके लिए जहां पानी की एक एक बूंद को सहेजने की रणनीति तैयार करनी होगी वहीं कृषि मंत्रालय को खरीफ के लिए इस तरह की रणनीति बनानी होगी जिसमें कम पानी के उपयोग से बेहतर फसल तैयार होने वाली फसलों और किस्मों के लिए किसानों को प्रेरित हो सके। खेती किसानी भी प्रभावित ना हो और पैदावार भी अच्छी हो इसकी रणनीति बनानी होगी। अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों की खेती ना करने के लिए किसानों को उत्साहित करना होगा। इसी तरह से जलाशयों, बांधों में उपलब्ध पानी का प्रबंधन योजनाबद्ध तरीके से करना होगा। अभी से आमजन को पानी के अपव्यय को रोकने के लिए प्रेरित करना होगा। कहने का अर्थ है कि जब आने वाले हालात की तस्वीर हमारे सामने कमोबेस आ चुकी है तो फिर समय रहते इस तरह की रणनीति बनानी होगी ताकि कमजोर मानसून में भी हमारी जल प्रबंधन क्षमता बेहतर रह सके। आपदा प्रबंधन मंत्रालय को अभी से संबंधित मंत्रालयों खासतौर से कृषि, जल आपूर्ति करने वाले विभागों, बांधों एवं जलाशयों का प्रबंधन करने वाले विभागों, जल संसाधन विभागों से समन्वय बनाकर रणनीति तैयार करनी होगी। इसके साथ ही आमजन को भी पानी के उपयोग को लेकर अधिक सजग और जिम्मेदार नागरिक के रुप में भूमिका निभानी होगी।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा
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रास्ते के बीचों-बीच अचानक स्कूटर या बाइक का बंद हो जाना किसी भी राइडर के लिए परेशानी भरा अनुभव होता है। कई बार ऑफिस जाते समय, लंबी यात्रा के दौरान या बारिश में यह स्थिति और भी मुश्किल बन जाती है। दिलचस्प बात यह है कि लगभग 90% ब्रेकडाउन छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से होते हैं, जिन्हें समय रहते रोका जा सकता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका दोपहिया वाहन सालों तक बिना परेशानी के चलता रहे, तो कुछ बेसिक मेंटेनेंस नियमों को अपनाना जरूरी है। ये टिप्स न केवल आपकी जेब बचाएंगे बल्कि आपकी यात्रा को भी सुरक्षित बनाएंगे।
नियमित देखभाल से आप बिना ज्यादा खर्च किए अपनी बाइक या स्कूटर को शोरूम जैसी कंडीशन में रख सकते हैं। खासतौर पर अगर आप रोजाना ऑफिस जाते हैं या लंबी दूरी तय करते हैं, तो ये मेंटेनेंस हैक्स आपके लिए बेहद जरूरी हैं। आइए जानते हैं वो गोल्डन रूल्स जो आपके दोपहिया वाहन को ब्रेकडाउन से बचा सकते हैं।
1. इंजन ऑयल: इंजन की लाइफलाइन
इंजन ऑयल को वाहन का खून माना जाता है। यह इंजन के अंदर मौजूद धातु के हिस्सों को चिकनाई देता है और उन्हें गर्म होने से बचाता है। अगर ऑयल ज्यादा काला या गाढ़ा हो गया है, तो समझिए इसकी क्षमता कम हो चुकी है। समय पर इंजन ऑयल न बदलने से इंजन पर दबाव बढ़ता है और ब्रेकडाउन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हर सर्विस पर ऑयल बदलें और महीने में एक बार ऑयल लेवल जरूर जांचें।
2. एयर फिल्टर और स्पार्क प्लग: इंजन की सांस और चिंगारी
इंजन को सही मात्रा में हवा मिलना बहुत जरूरी है। गंदा एयर फिल्टर इंजन की परफॉर्मेंस कम कर देता है और माइलेज भी घटा देता है। वहीं, स्पार्क प्लग इंजन को स्टार्ट करने में अहम भूमिका निभाता है। अगर बाइक स्टार्ट होने में समय ले रही है या झटके दे रही है, तो स्पार्क प्लग की जांच जरूरी है। हर 2000 किलोमीटर पर इन दोनों पार्ट्स को साफ या बदलवाना बेहतर रहता है।
3. टायर और व्हील बैलेंसिंग: सुरक्षा का मजबूत आधार
घिसे हुए टायर या गलत टायर प्रेशर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। कम हवा वाले टायर से माइलेज कम होता है और सस्पेंशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा, असंतुलित व्हील से वाहन हिलता है और लंबी यात्रा में असुविधा होती है। हर 5000 किलोमीटर पर व्हील बैलेंसिंग और एलाइनमेंट की जांच करवाना जरूरी है। सही टायर प्रेशर बनाए रखना आपकी सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
4. बैटरी की निगरानी: अनदेखा खतरा
आजकल के स्कूटर और बाइक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर निर्भर हैं। कमजोर बैटरी होने पर सेल्फ स्टार्ट काम नहीं करता और अचानक वाहन बंद हो सकता है। अगर हेडलाइट हल्की दिखे या हॉर्न धीमा हो, तो बैटरी की जांच करें। बैटरी टर्मिनल पर जंग लगना भी समस्या पैदा कर सकता है। समय-समय पर टर्मिनल साफ करें और जरूरत पड़ने पर बैटरी भी।
5. चेन लुब्रिकेशन: स्मूथ और शांत राइड
सूखी चेन न केवल आवाज करती है बल्कि इंजन की पावर को सही तरीके से पहियों तक पहुंचने से रोकती है। इससे गियर बदलने में दिक्कत आती है और माइलेज भी कम हो जाता है। हर 500 किलोमीटर पर चेन लुब्रिकेट करना बेहतर रहता है। इससे आपकी राइड स्मूथ और आरामदायक बनेगी।
अगर आप इन आसान मेंटेनेंस टिप्स को नियमित रूप से अपनाते हैं, तो आपका स्कूटर या बाइक लंबे समय तक बिना ब्रेकडाउन के चल सकता है। छोटी-छोटी जांच और समय पर सर्विसिंग से आप बड़ी परेशानियों से बच सकते हैं। याद रखें, वाहन की देखभाल सिर्फ उसकी लाइफ बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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