हार के बाद क्या ममता बनर्जी CM पद पर बनी रह सकती हैं? जानिए क्या कहता है संविधान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है. बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है. वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमुल कांग्रेस (टीएमसी) को सिर्फ 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा. सबसे बड़ी बात यह रही कि ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट से सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव हार गईं. इस नतीजे को राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. इस बीच मंगलवार (5 मई) को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, क्योंकि हमें जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हराया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हारने के बावजूद कोई मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.
लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि
भारत में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट होता है. जब जनता किसी सरकार को बहुमत नहीं देती या नेता चुनाव हार जाता है, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है. लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर कोई मुख्यमंत्री हार के बावजूद इस्तीफा देने से मना कर दे, तो क्या होता है? ऐसी स्थिति से निपटने के लिए संविधान में स्पष्ट नियम बनाए गए हैं.
बागेश्वर में इस जगह चख लिया पहाड़ी चिकन तो भूल जाएंगे बाकी स्वाद, ₹120 वाली थाली मचा रही धमाल, हर कोई बना फैन
Pahadi Chicken Rice Thali Bageshwar: अगर आप भी पहाड़ों की सैर के शौकीन हैं और असली पहाड़ी स्वाद की तलाश में हैं, तो बागेश्वर का गोलना गांव आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. पिंडारी ग्लेशियर के रास्ते पर पड़ने वाले इस छोटे से गांव ने अपने पहाड़ी चिकन और चावल से सोशल मीडिया पर धूम मचाई है. मात्र 120 रुपये में मिलने वाली यह थाली अपनी स्वाद के लिए इतनी मशहूर हो रही है कि लोग दूर-दराज से सिर्फ इसका स्वाद चखने यहां पहुंच रहे हैं. सिलबट्टे पर पिसे ताजे मसाले और चूल्हे की आंच पर तैयार यह देसी खाना न केवल पर्यटकों का दिल जीत रहा है, बल्कि गांव के युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक बेहतरीन जरिया भी बन गया है.
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