बलूचिस्तान में लगातार दूसरे दिन मोबाइल-इंटरनेट बंद, आम लोगों पर बढ़ी मुश्किलें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा संबंधी खतरों की आशंका के चलते अधिकारियों ने लगातार दूसरे दिन भी मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद रखीं. स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को गृह एवं जनजातीय मामलों के विभाग के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी. पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है, लेकिन कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं अब भी पूरी तरह बंद हैं. इसके कारण लोगों को जरूरी डिजिटल संचार सुविधाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है.
31 अगस्त तक नुश्की में बंद रहेगी वित्तीय सेवाएं
संचार सेवाओं के अलावा, 5 अगस्त से नुश्की जिले में सभी व्यावसायिक और वित्तीय सेवाएं भी बंद हैं. यह वित्तीय बंदी 31 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों के लिए बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो गई है. वित्तीय संस्थानों के बिना पूर्व सूचना बंद होने से बलूचिस्तान में स्थानीय व्यापार और कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. सरकारी कर्मचारी और सेवानिवृत्त लोग अपनी मासिक सैलरी नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे उन्हें राशन और दवाइयां खरीदने में दिक्कत हो रही है. वहीं, छात्र अपनी फीस और रहने के खर्चों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं.
बलूचिस्तान में लागू है धारा 144
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने संचार और वित्तीय सेवाओं के एक साथ बंद होने पर चिंता जताई है और अधिकारियों व बैंकिंग संस्थानों से सेवाएं जल्द बहाल करने की मांग की है, ताकि लोग सामान्य रूप से अपने कामकाज कर सकें. पिछले सप्ताह बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी सेना मंगलवार को मनाए जाने वाले बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों और सार्वजनिक सभाओं को बाधित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. उन्होंने कि बलूचिस्तान के लोग अपने रुख पर कायम हैं और पाकिस्तानी अधिकारियों के दबाव या पूरे प्रांत में लागू धारा 144 जैसे प्रतिबंधों के आगे झुकने वाले नहीं हैं.
बलूचिस्तान माना रहा है 79वां स्वतंत्रता दिवस
मंगलवार को बलूचिस्तान ने अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. यह एक वार्षिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे कई बलूच मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के 'अवैध कब्जे' के विरोध के रूप में देखते हैं. बलूच स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक जड़ें 1947 तक जाती हैं, जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने कुछ समय के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था. हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का विलय कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार विरोध करते रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि 'कब्जा करने वाली' पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं. उनके अनुसार, राष्ट्रीय आयोजनों को रोकने के लिए 7 अगस्त से 30 अगस्त तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों या हवाई शक्ति के इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी को अनिश्चित समय तक बनाए नहीं रख सकता, क्योंकि बलूच जनता का संकल्प मजबूत है.
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मीर ने कहा, "बलूचिस्तान गणराज्य बलूच लोगों को उग्रवादी या अलगाववादी बताने की कोशिशों को खारिज करता है. बलूच स्वतंत्रता सेनानी बलूचिस्तान की रक्षा, सुरक्षा और सैन्य ताकत का हिस्सा हैं और उन्हें छह करोड़ बलूच लोगों का समर्थन प्राप्त है. लोग उन पर भरोसा करते हैं क्योंकि वे इसी मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं और अपने राष्ट्र के हित में काम करते हैं." उन्होंने आगे कहा, "ये बल किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं और न ही अशांति या हिंसा फैलाने के लिए काम कर रहे हैं. वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखना, लोगों की रक्षा करना और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा विकसित बलूचिस्तान की नींव रखना शामिल है." मीर ने दावा किया कि बलूच सशस्त्र समूहों की कार्रवाइयों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को खत्म करना और बाहर निकालना है, जिन्हें वे पाकिस्तान से जुड़ा मानते हैं और जो उनके अनुसार बलूचिस्तान में अस्थिरता, असुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं.
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प्लास्टिक कचरे से बन सकेगा 3डी प्रिंटर का फिलामेंट, शोधकर्ताओं को मिला पेटेंट
नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला के शोधकर्ताओं ने सिर्फ करीब 45,000 रुपए की लागत में ऐसी एक्सट्रूडर प्रणाली विकसित की है, जो प्लास्टिक कचरे से 3डी प्रिंटिंग के लिए मजबूत कंपोजिट फिलामेंट बना सकती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के इस तकनीकी शिक्षण संस्थान ने इस का पेटेंट भी हासिल कर लिया है।
दरअसल जहां सामान्य प्रिंटर में ‘स्याही’ का इस्तेमाल होता है वहीं 3डी प्रिंटर में फिलामेंट होता है। आज 3डी प्रिंटिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सा क्षेत्र में फिलामेंट से शरीर के मॉडल और कृत्रिम अंग बनाने से लेकर ड्रोन के पुर्जे, ब्रैकेट, खिलौने और सजावटी सामान तक बनाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इसमें पुनर्चक्रित प्लास्टिक के साथ दूसरी सुदृढ़ीकरण सामग्री मिलाई जा सकती है। इससे तैयार फिलामेंट ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनता है। इससे नए प्लास्टिक पर निर्भरता घटेगी और प्लास्टिक कचरे का दोबारा उपयोग बढ़ेगा।
संस्थान के मुताबिक, इनमें फ्यूज्ड डिपॉजिशन मॉडलिंग तकनीक सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। इसमें प्लास्टिक के फिलामेंट को गर्म करके पिघलाया जाता है। फिर उसे एक-एक परत के रूप में जमा किया जाता है। इसी से पूरी वस्तु तैयार होती है। फिलामेंट की मांग बढ़ने के साथ इसकी कीमत भी बड़ी चुनौती है। अच्छी गुणवत्ता वाला फिलामेंट महंगा होता है। वहीं कमजोर गुणवत्ता वाले फिलामेंट से बनी वस्तुओं की मजबूती और सटीकता प्रभावित होती है। पुनर्चक्रित प्लास्टिक से फिलामेंट बनाने की कोशिश पहले भी हुई है। लेकिन ज्यादा प्रसंस्करण लागत, सामग्री की बर्बादी और कम मजबूती जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।
एनआईटी राउरकेला की नई तकनीक इन समस्याओं को दूर करने की कोशिश करती है। नई एक्सट्रूडर प्रणाली में नियंत्रित शीतलन व्यवस्था और पीआईडी तापमान नियंत्रक समेत कई घटक जुड़े हैं। इससे फिलामेंट बनाने की प्रक्रिया पर बेहतर नियंत्रण मिलता है। प्रयोगशाला परीक्षणों में तैयार फिलामेंट में संतोषजनक यांत्रिक गुण और अपेक्षित आयामी सटीकता पाई गई।
एनआईटी राउरकेला के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. संध्यारानी बिस्वास ने कहा कि यह तकनीक फिलामेंट उत्पादन में महत्वपूर्ण प्रगति है। उनके अनुसार, इससे बेहतर यांत्रिक गुणों वाले पुर्जे बनाए जा सकते हैं। साथ ही पुनर्चक्रित प्लास्टिक के इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा होगा। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर प्रो. सुजीत सेन ने कहा कि यह प्रणाली अलग-अलग प्रकार के प्लास्टिक को उपयोगी 3डी प्रिंटर फिलामेंट में बदल सकती है।
इससे ऐसी चक्रीय व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिसमें प्लास्टिक कचरे को फेंकने के बजाय उसे दोबारा इस्तेमाल कर मूल्यवान उत्पाद तैयार किए जाएं। इस तकनीक से तैयार फिलामेंट का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में हो सकता है। इनमें वाहन और विमान उद्योग में विशेष पुर्जे बनाना, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता उत्पाद, शैक्षणिक संस्थानों और शोध प्रयोगशाला शामिल है। इसके अलावा दंत चिकित्सा मॉडल , चिकित्सकीय स्कैफोल्ड और मरीज के अनुसार कृत्रिम अंग, ड्रोन के पुर्जों और अन्य हल्के, मजबूत उत्पादों में इसका उपयोग हो सकता है।
इस पेटेंट को प्रो. संध्यारानी बिस्वास, प्रो. सुजीत सेन, जगदीश उदय खाटू, हिमांशु सिंह और किरण सुना ने हासिल किया है। एनआईटी राउरकेला की यह तकनीक दो समस्याओं प्लास्टिक कचरे और 3डी प्रिंटिंग के लिए सस्ते, मजबूत फिलामेंट का समाधान है।
--आईएएनएस
जीसीबी/एएस
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