तमिलनाडु: एमके स्टालिन ने स्वीकार की हार, मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, बोले- हर वोट हमारे लिए अनमोल
तमिलनाडु की राजनीतिक गलियारों में एक बड़े उलटफेर के बाद, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राज्य में एक नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। द्रमुक अध्यक्ष के इस कदम की जानकारी पार्टी सूत्रों ने दी है, जिसके अनुसार उनका इस्तीफा पत्र राज्य के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के कार्यालय को मंगलवार को भेज दिया गया है। विशेष बात ये है कि 23 अप्रैल को संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली पार्टी टीवीके ने सत्ताधारी द्रमुक को करारी शिकस्त दी थी, और इसी हार के बाद स्टालिन ने सत्ता छोड़ने का यह बड़ा निर्णय लिया है।
विधानसभा चुनाव में मिली इस करारी हार के बावजूद, एमके स्टालिन ने तमिलनाडु की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया है। सत्ता हाथ से जाने के बाद भी, स्टालिन ने चुनाव नतीजों को पूरी विनम्रता से स्वीकार करते हुए, द्रमुक गठबंधन का समर्थन करने वाले सभी मतदाताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही उनकी पार्टी चुनाव हार गई हो, जनता द्वारा दिया गया एक-एक वोट उनके लिए भरोसे का एक अनमोल प्रतीक है, जो भविष्य में भी उन्हें प्रेरणा देता रहेगा।
एमके स्टालिन ने पेश किए कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े
इसी बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से स्टालिन ने जनता के सामने कुछ अहम आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि इस चुनाव में द्रमुक गठबंधन को कुल 1 करोड़ 54 लाख 82 हजार 782 वोट प्राप्त हुए हैं। गौर करने वाली बात ये है कि स्टालिन के अनुसार, जीतने वाली पार्टी और द्रमुक के बीच वोटों का फासला बहुत ज्यादा नहीं है। उन्होंने कहा कि विजेता पार्टी को द्रमुक से मात्र 17.43 लाख वोट ही अधिक मिले हैं, जो कि कुल वोटों के प्रतिशत में देखा जाए तो केवल 3.52 प्रतिशत का मामूली अंतर दर्शाता है।
विपक्ष में रहकर जनता की आवाज उठाएगी द्रमुक: स्टालिन
विपक्ष की भूमिका निभाने के सवाल पर, स्टालिन ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि द्रमुक छह बार सत्ता में रह चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी कोई जीत या हार नहीं है जिसका सामना पार्टी ने अपने लंबे इतिहास में न किया हो। स्टालिन ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि यदि वे सत्ता में होते तो जनता के लिए नई योजनाएं बनाते, लेकिन अब विपक्ष में होने के कारण, वे लोगों की मांगों के लिए पूरी ताकत और ईमानदारी से संघर्ष करेंगे। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि द्रमुक एक मजबूत विपक्षी दल के रूप में जनता के हकों की राजनीति पूरी निष्ठा और ईमानदारी से जारी रखेगी।
कैसा रहा तमिलनाडु का चुनावी परिणाम?
इस बार के विधानसभा चुनाव नतीजों ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है, विशेष रूप से टीवीके के प्रदर्शन ने। अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में टीवीके ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 234 सदस्यों वाली विधानसभा में 107 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया है। हालांकि, यह पार्टी बहुमत के आंकड़े से अभी भी 11 सीट पीछे रह गई है। वहीं, सत्ताधारी द्रमुक केवल 59 सीटों पर सिमट गई है, जो उसके पिछले प्रदर्शन की तुलना में एक बड़ी गिरावट है। अब देखना यह है कि टीवीके द्वारा कांग्रेस, वामपंथी दलों, माकपा और वीसीके जैसे छोटे दलों से समर्थन मांगकर सरकार बनाने की राह कैसे तय की जाती है।
स्टालिन को अपनी पारंपरिक सीट से भी मिली हार
इस चुनाव का सबसे बड़ा और हैरान करने वाला नतीजा खुद द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन की सीट पर देखने को मिला है। अपनी पारंपरिक कोलाथुर विधानसभा सीट पर स्टालिन को टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी है। वोट शेयर के मामले में भी टीवीके 32 प्रतिशत से अधिक वोट लेकर सबसे आगे रही। वहीं, द्रमुक को 24.19 प्रतिशत और अन्नाद्रमुक को 21.22 प्रतिशत वोट मिले हैं, जो इन दोनों प्रमुख पार्टियों की राजनीतिक साख में आई बड़ी गिरावट को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह परिणाम निश्चित रूप से तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।
“कांग्रेस में कुछ लोग TMC की हार पर खुश हो रहे..” राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी को घेरा, बंगाल-असम में ‘जनादेश की चोरी’ का लगाया आरोप
जहां एक ओर पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की जीत का डंका बज रहा था, वहीं कांग्रेस के भीतर ही एक अजीबोगरीब राजनीतिक नाटक चल रहा था। अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं की चाल पर राहुल गांधी का पारा इस कदर चढ़ा कि उन्होंने सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमले का आरोप जड़ दिया और पार्टी के भीतर खुशियाँ मनाने वालों को भी आड़े हाथों लिया। पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भाजपा की इस बड़ी जीत को राहुल गांधी ने केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि ‘जनादेश की चोरी’ करार दिया। उनका स्पष्ट कहना था कि यह कदम भारतीय लोकतंत्र को जड़ से उखाड़ने के भाजपा के बड़े मिशन का ही एक हिस्सा है, जो देश की लोकतांत्रिक बुनियाद को हिलाने का प्रयास है।
राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के उन नेताओं पर भी तीखे प्रहार किए, जो बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार पर गुपचुप खुशियाँ मना रहे थे। एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने एक बड़ा सियासी संदेश दिया। राहुल ने लिखा, “कांग्रेस के कुछ लोग और अन्य लोग तृणमूल की हार पर खुशी मना रहे हैं। उन्हें यह साफ तौर पर समझने की जरूरत है कि असम और बंगाल के जनादेश की चोरी भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने के भाजपा के मिशन में एक बड़ा कदम है।” उनकी बात यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आगे जोड़ा, “छोटी-मोटी राजनीति को किनारे रख दें। यह किसी एक पार्टी या दूसरी पार्टी के बारे में नहीं है। यह भारत के बारे में है।” उनका इशारा साफ था कि इस वक्त दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के लोकतंत्र को बचाने की जरूरत है, न कि अपने ही प्रतिद्वंद्वी की हार पर जश्न मनाने की।
राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का किया समर्थन
बंगाल में भाजपा दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने की तैयारी में थी, जिससे तृणमूल कांग्रेस का 15 साल पुराना शासन समाप्त हो गया। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का भी खुलकर समर्थन किया। अपनी बात को बल देते हुए राहुल ने कहा, “असम और बंगाल चुनाव के नतीजे चुनाव आयोग के समर्थन से भाजपा द्वारा चुराए गए जनादेश के स्पष्ट मामले हैं। हम ममता जी से सहमत हैं। बंगाल में 100 से अधिक सीटें चुराई गई हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ऐसे मामले पहले भी देखे जा चुके हैं – मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और यहां तक कि लोकसभा चुनाव 2024 में भी। यह एक गंभीर आरोप था, जो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधे-सीधे सवाल उठाता था।
कैसा रहा बंगाल का चुनावी परिणाम?
पश्चिम बंगाल की कुल 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 196 है। चुनाव आयोग ने सोमवार को 293 सीटों के परिणाम घोषित किए थे। दक्षिण 24 परगना जिले की फालता सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होना था, जिसके नतीजे 24 मई को आने थे। घोषित परिणामों में भाजपा ने 206 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया था, जबकि तृणमूल कांग्रेस केवल 81 सीटों पर सिमट कर रह गई। यह ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था, जिन्होंने राज्य में लंबे समय तक अपनी सत्ता का लोहा मनवाया था।
भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार
खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से करारी शिकस्त मिली। इस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा, उन्हें केवल दो सीटें मिलीं। माकपा को एक, एआईएसएफ को एक और आम जनता उन्नयन पार्टी को दो सीटों पर संतोष करना पड़ा, जो राज्य में वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों की कमजोर होती पकड़ को दर्शाता है। तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन कई जिलों में तो बेहद खराब रहा, जहाँ पार्टी कूच बिहार, पूर्वी मेदनीपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग सहित दस जिलों में एक भी सीट नहीं जीत सकी। आदिवासी और मतुआ बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में भी तृणमूल को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ पर सवाल उठ गए और भाजपा की रणनीति सफल होती दिखी।
केवल बंगाल ही नहीं, असम में भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने निर्णायक जीत दर्ज की। वहां भी भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए विपक्ष को हाशिए पर धकेल दिया। असम में भाजपा ने 82 सीटें जीतकर सत्ता पर अपनी पकड़ बरकरार रखी, जबकि कांग्रेस केवल 19 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। यह दिखाता है कि भाजपा की लहर इन दोनों राज्यों में कितनी मजबूत थी, और राहुल गांधी के आरोपों के बावजूद, चुनावी तस्वीर साफ थी कि कमल का फूल खिला है, भले ही राहुल इसे जनादेश की चोरी कहें या लोकतंत्र पर हमला।
Some in the Congress, and others, are gloating about TMC’s loss.
They need to understand this clearly – the theft of Assam and Bengal’s mandate is a big step forward by the BJP in its mission to destroy Indian democracy.
Put petty politics aside. This is not about one party or…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 5, 2026
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