हो गया साफ... कौन होगा बंगाल में सीएम? अपने भाषण में पहले ही साफ कर चुके पीएम मोदी, अमित शाह को बड़ी जिम्मेदारी
CM in West Bengal: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब राजनीति का फोकस एक नए सवाल पर आ गया है. राज्य की कमान किसके हाथों में जाएगी? तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हराकर सत्ता के करीब पहुंची BJP ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के लिए किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, जिससे सस्पेंस और भी गहरा गया है. हालांकि अपने भाषणों में पीएम मोदी ने पहले ही बड़ा संकेत दे चुके हैं. इस संकेत को गृहमंत्री अमित शाह ने भी दोहराया है.
'बंगाल का बेटा' होगा सीएम?
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि मुख्यमंत्री कोई बाहरी चेहरा नहीं होगा. अमित शाह ने साफ कहा था कि बंगाल में अगर BJP की सरकार बनती है तो सीएम 'बंगाल का बेटा' होगा यानी ऐसा नेता जो राज्य की मिट्टी से जुड़ा हो, बंगाली भाषा और संस्कृति को समझता हो. इससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि पार्टी स्थानीय नेतृत्व पर ही भरोसा जताएगी.
सबसे आगे नाम सुवेंदु अधिकारी
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे चर्चित नाम सुवेंदु अधिकारी का है. उन्होंने इस चुनाव में दो महत्वपूर्ण सीटों नंदीग्राम और भवानीपुर से जीत हासिल की. खास बात यह रही कि भवानीपुर सीट पर उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. ऐसे में उनकी दावेदारी और भी ज्यादा मजबूत हो गई है.
पहले भी नंदीग्राम में ममता बनर्जी को मात दे चुके सुवेंदु को “जायंट किलर” के रूप में देखा जा रहा है. उनकी आक्रामक शैली और संगठन पर पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है.
संगठन के चेहरे समिक भट्टाचार्य
दूसरा बड़ा नाम समिक भट्टाचार्य का सामने आ रहा है, जो पश्चिम बंगाल BJP के प्रदेश अध्यक्ष हैं. पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और पुराने-नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने का श्रेय उन्हें दिया जाता है.
उनकी छवि एक संतुलित और विचारशील नेता की है, जो शिक्षित वर्ग और संगठन दोनों में स्वीकार्य हैं. RSS से उनके जुड़ाव को भी उनकी ताकत माना जा रहा है.
'धार्मिक चेहरा' विकल्प, उत्पल ब्रह्मचारी
तीसरे दावेदार के रूप में उत्पल ब्रह्मचारी (उत्पल महाराज) का नाम चर्चा में है. उन्होंने कालीगंज सीट से बड़ी जीत दर्ज की और धार्मिक व सामाजिक कार्यों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि BJP उत्तर प्रदेश की तर्ज पर एक मजबूत धार्मिक-राजनीतिक चेहरा भी सामने ला सकती है, जिससे हिंदुत्व आधारित राजनीति को और मजबूती मिले.
बौद्धिक चेहरा स्वपन दासगुप्ता
स्वपन दासगुप्ता का नाम भी इस रेस में शामिल है. वे एक जाने-माने पत्रकार, लेखक और विचारक रहे हैं. राशबिहारी सीट से उनकी जीत और बौद्धिक छवि उन्हें खास बनाती है. बंगाल के शिक्षित और शहरी वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है, जो उन्हें एक अलग तरह का उम्मीदवार बनाती है.
अमित शाह को बड़ी जिम्मेदारी
बता दें कि बंगाल में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा ये तो साफ हो गया है. बंगाल के बेटे को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, जिसका संकेत पीएम मोदी भाषण में दे चुके हैं. लेकिन बंगाल का बेटा कौन होगा इस नाम से पर्दा गृहमंत्री अमित शाह उठाएंगे. उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है. जबकि असम में ये जिम्मेदारी जेपी नड्डा को मिली है.
9 मई को नया सीएम ले सकता है शपथ
सूत्रों के मुताबिक, BJP विधायक दल की बैठक जल्द बुलाई जा सकती है. इस बैठक में पर्यवेक्षक के तौर पर राजनाथ सिंह के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि संगठन लंबे समय से बंगाल में सक्रिय रहा है. वहीं 9 मई को नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने की संभावना है.
सरप्राइज से इनकार नहीं
BJP अक्सर अपने फैसलों से चौंकाने के लिए जानी जाती है, इसलिए अंतिम नाम इन चार चेहरों से अलग भी हो सकता है. हालांकि इतना तय है कि बंगाल में इस बार नेतृत्व पूरी तरह स्थानीय होगा. अब सबकी नजरें पार्टी की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि “कमल” की इस ऐतिहासिक जीत का चेहरा कौन बनेगा.
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'ममता बनर्जी ने हम पर अटैक...', बंगाल चुनाव में Mamata Banerjee की हार के बाद डायरेक्टर ने साधा निशाना
Vivek Agnihotri on Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Election) के नतीजों में इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जो पिछले चुनावों में 215 सीटों पर जीतकर आई थी, वह इस बार 100 सीटें भी नहीं जीत पाई. ऐसे में अब फिल्म मेकर विवेक अग्निहोत्री ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है और बदलाव को चुनने के लिए वहां की जनता का शुक्रिया किया है.
विवके अग्निहोत्री ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा
विवेक अग्निहोत्री ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर ममता बनर्जी की हार के बाद पोस्ट शेयर किया है. फिल्म मेकर ने अपनी फिल्म द बंगाल फाइल्स पर बंगला में रोक लगाने को लेकर बाद की. उन्होंने लिखा- 'दोबारा कभी नहीं... जिन लोगों को नहीं पता है उन्हें मैं बता दूं कि ममता बनर्जी ने मेरी फिल्म द कश्मीर फाइल्स की रिलीज कैंसिल करवा दी थी. फिल्म को थिएटर्स से बाहर रखा गया और मुझे कहा गया कि मेरी बंगाल में एंट्री नहीं है.'
अटैक करने का लगाया आरोप
विवेक अग्निहोत्री ने अपने पोस्ट में आगे ममता बनर्जी पर अटैक करने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा- 'बीते साल ममता बनर्जी ने मेरी फिल्म द बंगाल फाइल्स के ट्रेलर तक को लॉन्च नहीं होने दिया. हम पर अटैक किया गया और दर्जनों FIR फाइल कराई गईं. मैं वहां जाकर गवर्नर से अपना अवॉर्ड तक नहीं ले पाया लेकिन हमने कभी भी हार नहीं मानी. इलेक्शन के दौरान हमने कोशिश की कि द बंगाल फाइल्स जितने ज्यादा लोगों तक पहुंचाई जा सके, पहुंचाई जाए. मुझे गर्व है कि हमने हार नहीं मानी और अपनी तरह से लड़ाई लड़ते रहे और आखिरकार हमें लाजवाब जीत मिली. मैं बंगाल के लोगों को बधाई देता हूं. अब आप लोग बिना डरे घरों से निकल सकते हो और सिर ऊंचा करके घूम सकते हो.'
NEVER AGAIN.
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) May 5, 2026
For those who don’t know, @MamataOfficial cancelled me in Bengal after the release of #TheKashmirFiles. The film was taken out of cinema halls, and she said I would NOT BE ALLOWED TO ENTER Bengal.
Last year, she BANNED #TheBengalFiles completely in West Bengal. Our… pic.twitter.com/9JzHU2lgwE
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विवके अग्निहोत्री की फिल्म बंगाल फाइल्स
विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' के बारे में बताए ते यो पिछले साल रिलीज हुई थी जो 16 अगस्त 1946 को कोलकाता और बंगाल में हुए भयानक दंगों (डायरेक्ट एक्शन डे) पर आधारित है, जिसे विवेक अग्निहोत्री ने हिंदुओं के नरसंहार के रूप में पेश किया. इस फिल्म को ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य में बैन लगाया. अग्निहोत्री ने दावा किया था कि राज्य सरकार के दबाव में मल्टीप्लेक्सेस और थिएटर्स ने फिल्म दिखाने से मना कर दिया और टीम को धमकियां भी दी गई थी.
15 साल बाद छिनी सत्ता की कुर्सी
बता दें, ममता बनर्जी 2011 में बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थी और उसके बाद से लगातार अभी तक सत्ता के सिंहासन पर विराजमान रही हैं. लेकिन अब उनकी 15 साल तक राज करने के बाद ममता बनर्जी की सिर्फ सत्ता से विदाई ही नहीं हुई बल्कि अपनी भवानीपुर सीट भी नहीं बचा सकी है. भवानीपुर से हार और बंगाल में सत्ता से बेदखल होने के बाद ममता बनर्जी के सामने अब कई सियासी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. ऐसे में अपनी पार्टी और खुद के सियासी वजूद को बचाए रखने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ सकता है.
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