जामनगर टाडा कोर्ट का बड़ा फैसला: 1993 हथियार तस्करी कांड में 12 दोषी करार, दाऊद इब्राहिम की साजिश का हुआ पर्दाफाश
गुजरात की एक विशेष टाडा (TADA) अदालत ने सोमवार को तीन दशक पुराने हथियार तस्करी मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह मामला 1993 में गुजरात तट के रास्ते भारत में आरडीएक्स (RDX) और घातक हथियारों की अवैध तस्करी से जुड़ा है, जिसकी साजिश अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने रची थी। जामनगर की एक विशेष टाडा अदालत ने सोमवार को 1993 में गुजरात तट पर हथियारों की तस्करी की साजिश से जुड़े एक मामले में 12 लोगों को दोषी ठहराया और 17 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।
इस तस्करी में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का हाथ था और इसका उद्देश्य बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेना था। विशेष लोक अभियोजक तुषार गोकानी ने बताया कि आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां रोकथाम (टाडा) अधिनियम की विशेष अदालत के न्यायाधीश आर.पी. मोगेरा ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया और उनमें से 10 को पांच साल के कठोर कारावास और दो को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
यह मामला दाऊद इब्राहिम तथा दुबई और पाकिस्तान में स्थित उसके सहयोगियों द्वारा रची गई एक साजिश से संबंधित है, जिसका उद्देश्य अयोध्या में छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस का बदला लेने के लिए समुद्र के रास्ते आरडीएक्स समेत बड़ी मात्रा में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी करके उन्हें भारत में लाना था। गोकानी ने बताया कि जुलाई 1993 में जामनगर बी-डिवीजन पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और यह फैसला कई दशकों तक चली जांच के बाद आया है। दाऊद इब्राहिम समेत आरोपियों पर टाडा अधिनियम, भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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इस मामले की जांच 1993 से 2018 तक चली, जिसमें कुल 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन और अनीस इब्राहिम समेत 15 अन्य को फरार घोषित किया गया। मामले में 46 आरोपियों के खिलाफ सात अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए गए थे। गोकानी ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान 11 आरोपियों की मौत हो गई और छह को उच्चतम न्यायालय ने बरी कर दिया, जबकि शेष 29 में से 12 को सोमवार को जामनगर की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया और 17 अन्य को बरी कर दिया।
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गोकानी ने कहा कि अभियोजन पक्ष दाऊद इब्राहिम के दुबई स्थित आवास पर साजिश रचने और पाकिस्तान की मदद से उसे अंजाम देने से संबंधित सभी तथ्यों को साबित करने में सफल रहा।
Tamil Nadu में 'केजरीवाल मोमेंट'! TVK की प्रचंड जीत ने ढहाए द्रविड़ राजनीति के किले, क्या विजय बनेंगे दक्षिण के 'आप'?
तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा भूचाल आया जिसने दशकों पुराने द्रविड़ किलों की दीवारें हिला दीं। सुपरस्टार विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में जिस तरह से सत्ता की ओर बढ़ रही है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को एक दशक पहले दिल्ली में हुए अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के उदय की याद दिला दी है। एक अभूतपूर्व प्रदर्शन में, विजय और उनकी तमिलगा वेत्री कषगम ने राज्य की राजनीति में दशकों से चले आ रहे द्रमुक और अन्नाद्रमुक के प्रभुत्व को ठीक उसी तरह समाप्त कर दिया, जैसे केजरीवाल और उनकी पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के प्रभाव को कमजोर किया था।
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आप की स्थापना के एक साल बाद पार्टी ने अपने पहले चुनाव में दिसंबर 2013 में दिल्ली में अल्पमत सरकार बनाई थी और फिर 2015 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। आम आदमी पार्टी ने 2015 में त्रिकोणीय मुकाबले में दिल्ली की 70 में से 67 सीटें जीती थीं और भारतीय जनता पार्टी केवल तीन सीटों तक सिमट गई, जबकि कांग्रेस की झोली खाली रही थी। केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और सितंबर 2024 तक इस पद पर बने रहे। तमिलनाडु में मतगणना के आगे बढ़ने के साथ ही सत्तारूढ़ द्रमुक और अन्नाद्रमुक के खिलाफ चुनाव लड़ रही टीवीके 234 में से 100 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में आगे चल रही थी और अपने गठन के दो वर्ष बाद सरकार बनाने की ओर बढ़ रही थी।
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केजरीवाल का उदय 2010 के आसपास पूरे भारत में फैले एक तीव्र भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से जुड़ा था, जिसने वैकल्पिक राजनीति के वादे और आम आदमी (साधारण नागरिक) के हित को प्राथमिकता देने वाली पार्टी को जन्म दिया। केजरीवाल की तरह विजय ने भी भ्रष्टाचार और वंशवादी राजनीति, विशेषकर पारंपरिक राजनीति के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया और विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने की घोषणा कर बड़ा कदम उठाया। पारंपरिक राजनीति से अलग होने का दावा करने के बावजूद, दोनों नेताओं और दलों ने चुनावी रणनीति के रूप में मुफ्त की रेबडियां बांटने के वादे किये हैं।
विजय ने महिलाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता, प्रत्येक परिवार को रसोई गैस के छह मुफ्त सिलेंडर, कम आय वाले परिवारों की दुल्हनों के लिए आठ ग्राम सोना और रेशमी साड़ी, बेरोजगार स्नातकों को प्रतिमाह 4,000 रुपये की सहायता तथा अन्य कई सुविधाओं का वादा किया है। दिल्ली में 2015 से 2025 के बीच अरविंद केजरीवाल के शासन मॉडल की नींव मुफ्त बिजली, पानी, महिलाओं के लिए बस यात्रा, बुजुर्गों के लिए तीर्थयात्रा, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा जैसे मुद्दों पर आधारित रही। टीवीके की सफलता ने तुरंत ही विजय और केजरीवाल के बीच तुलना को जन्म दिया, क्योंकि दोनों पार्टियां बिना किसी आधार से शुरू होकर तेजी से सत्ता तक पहुंचीं। द्रविड़ राजनीति में यह उभरता हुआ बड़ा बदलाव आम आदमी पार्टी के उदय जैसी परिस्थितियों से काफी मेल खाता है।
विजय ने 2024 में तमिलगा वेत्री कषगम की स्थापना की और भिनय करियर से संन्यास लेकर तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश किया, जबकि केजरीवाल ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी पद से इस्तीफा देकर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया और फिर ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन से जुड़कर आम आदमी पार्टी बनाई। हालांकि समय, भौगोलिक स्थिति और संदर्भ अलग हैं, फिर भी टीवीके और आम आदमी पार्टी में एक स्पष्ट समानता यह है कि दोनों ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं से जनता की नाराज़गी का लाभ उठाया।
केजरीवाल ने आम आदमी की छवि के जरिये लोगों का समर्थन जुटाया, जबकि विजय ने अपने बड़े फिल्मी स्टारडम और बदलाव के वादे के आधार पर जनता को आकर्षित किया। चुनावी समीकरण, विशेषकर चुनाव लड़ रही पार्टियों के बीच मतों के विभाजन, ने दोनों दलों के उभार में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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