डेयरी-फ्रोजन फूड कंपनी Milky Mist का IPO आज से खुला, GMP ₹20.5; निवेश से पहले जानें क्या हैं रिस्क फैक्टर्स?
Milky Mist IPO: देश की तेजी से बढ़ती पैकेज्ड फूड कंपनियों में से एक मिल्की मिस्ट का IPO मंगलवार 11 अगस्त को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है. कंपनी अपने मुख्य ब्रांड मिल्की मिस्ट के साथ-साथ स्मार्टशेफ (SmartChef), कैपेला (Capella) और मिस्टी लाइट (Misty Lite) जैसे सब-ब्रांड्स के तहत भी अपने प्रोडक्ट बेचती है. यह भारत की उन शुरुआती प्राइवेट डेयरी कंपनियों में से एक है जिन्होंने ब्रांडेड पैकेज्ड पनीर लॉन्च किया था. समय के साथ कंपनी ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार किया. इसमें उन्होंने दही, घी, मक्खन, चीज़, योगर्ट, आइसक्रीम, UHT प्रोडक्ट्स, चॉकलेट और मीठा कंडेंस्ड मिल्क शामिल किया. FY26 में अकेले मिल्की मिस्ट ब्रांड ने 3,054.57 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का 97.3% है.
कंपनी के बारे में
मिल्की मिस्ट भारत के ऑर्गेनाइज्ड मार्केट में सबसे बड़े प्राइटवेट पैक्ड पनीर ब्रांड्स में से एक है, जिसकी मार्केट हिस्सेदारी वैल्यू के हिसाब से लगभग 19% है. यह साउथ इंडिया का सबसे बड़ा प्राइवेट पैक्ड चीज़ ब्रांड है और पूरे देश में तीसरे नंबर पर आता है. कंपनी ने 1998 में पनीर बनाना शुरू किया और बाद में घी, खोया, मक्खन, दही, चीज़ और योगर्ट जैसी कैटेगरीज में अपना कोराबार बढ़ाया. 2018 में पेरुंदुरई, इरोड (तमिलनाडु) में एक बड़ा प्लांट शुरू किया गया और 020 में SmartChef ब्रांड लॉन्च किया गया. 2025 में कंपनी ने Asal Food Products और Briyas Foods के टोफू कारोबार का अधिग्रहण भी किया.
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कंपनी की पहुंच और विस्तार
31 मार्च 2026 तक कंपनी तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के 25 जिलों में फैले 74,654 किसानों से दूध खरीदती थी. FY26 में कच्चे दूध की खरीद बढ़कर 39.62 करोड़ लीटर हो गई, जो FY25 में 30.72 करोड़ लीटर थी. कंपनी का एकमात्र इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तमिलनाडु के पेरुंदुराई में है, जहां प्रतिदिन 25 लाख लीटर दूध प्रोसेस करने की क्षमता है. कंपनी का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क 22 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में 4,001 डिस्ट्रीब्यूटर्स तक फैला है, जो 3.75 लाख से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स तक प्रोडक्ट पहुंचाते हैं.
किस प्रोडक्ट से कितनी कमाई होती है?
FY26 में दक्षिण भारत से कंपनी को कुल रेवेन्यू का 69.2% हिस्सा मिला. कंपनी 15 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट भी करती है. पनीर सबसे बड़ी कैटेगरी बनी हुई है, जो कुल रेवेन्यू का 29.4% है, इसके बाद चीज़ का 16.3% और दही का 13.2% हिस्सा है. भारत का वैल्यू-एडेड डेयरी प्रोडक्ट्स मार्केट FY26 में करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये का आंका गया है, जिसके FY31 तक बढ़कर करीब 10 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है. बढ़ती आमदनी, सेहत को लेकर जागरूकता और हाई-प्रोटीन डेयरी प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग इस ग्रोथ की मुख्य वजहें हैं.
जुटाए गए पैसे से कंपनी क्या करेगी?
IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी कई चीजों में करेगी. इसमें से 496.86 करोड़ रुपये मौजूदा कर्ज चुकाने में लगेंगे, 469.24 करोड़ रुपये पेरुंदुराई प्लांट के विस्तार और आधुनिकीकरण पर खर्च होंगे, और 155.31 करोड़ रुपये कोल्ड-चेन रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विजी कूलर और आइसक्रीम फ्रीजर लगाने में लगेंगे. बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों और इश्यू खर्च के लिए इस्तेमाल होगी.
अब IPO की जानकारी लें
मिल्की मिस्ट का यह इश्यू कुल 1,553 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है, जिसमें फ्रेश इश्यू और 11 करोड़ से ज्यादा शेयरों का ऑफर-फॉर-सेल शामिल है. प्राइस बैंड 133 से 140 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, और लॉट साइज 107 शेयरों का है. रिटेल निवेशकों को अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए कम से कम 14,980 रुपये का निवेश करना होगा.
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अहम तारीखें कौन-कौन सी हैं?
IPO 11 से 13 अगस्त तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. बिडिंग बंद होने के बाद 14 अगस्त को अलॉटमेंट फाइनल होने की उम्मीद है. जिन निवेशकों को शेयर मिलेंगे, उनके डीमैट अकाउंट में 17 अगस्त तक शेयर क्रेडिट हो जाएंगे, बाकी को उसी दिन रिफंड मिलेगा. कंपनी के शेयर 18 अगस्त को BSE और NSE पर लिस्ट होने हैं.
कंपनी की ताकत क्या है?
कंपनी FY24-FY26 के दौरान 31.2% रेवेन्यू CAGR के साथ भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पैकेज्ड फूड कंपनी रही है. इसका प्रीमियम पोजिशनिंग बड़े भारतीय ब्रांड्स के मुकाबले 10-30% ज्यादा कीमत वसूलने की गुंजाइश देता है. कंपनी के पास 22 प्रोडक्ट कैटेगरी और 640 SKUs हैं, और FY22-FY26 के बीच इसने 5 नई कैटेगरी और 538 नए SKUs लॉन्च किए. इसके अलावा कंपनी की मज़बूत फार्मर प्रोक्योरमेंट नेटवर्क और इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग व लॉजिस्टिक्स इसे बाकी लिस्टेड डेयरी कंपनियों से अलग बनाती है.
कंपनी कहां कमजोर पड़ती है?
FY26 में कंपनी की 94.51 % कच्चे दूध की जरूरत अकेले तमिलनाडु से पूरी हुई, यानी किसी भी तरह की दिक्कत वहां उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. पनीर, चीज़ और दही मिलाकर FY26 में कुल रेवेन्यू का 59.05 % हिस्सा रहे, यानी प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में भी एक तरह की एकाग्रता है. इसके अलावा कंपनी का पूरा मैन्युफैक्चरिंग एक ही प्लांट पर निर्भर है, और दूध के अलावा पैकेजिंग मटीरियल, चीनी जैसी कच्ची सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी मार्जिन पर असर डाल सकता है.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
FCRA Amendment Bill 2026: FCRA संशोधन बिल 2026 को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है केंद्र सरकार
विदेशी अंशदान विनियमन कानून (FCRA) में संशोधन को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विभिन्न संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे इस संशोधन विधेयक पर सरकार और विपक्ष पूरी तरह आमने-सामने खड़े हैं।
एक तरफ जहां सरकार इस कानून के जरिए विदेशी धन के संभावित दुरुपयोग को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का तर्क दे रही है, वहीं विपक्षी दल इसे सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सीधा हमला करार दे रहे हैं। इस बढ़ते राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने और संसद के भीतर एक सर्वसम्मत रास्ता निकालने के लिए अब सरकार विधेयक को सीधे पारित कराने के बजाय इसे संसद की संयुक्त समिति (JPC) को सौंपने की रणनीतिक तैयारी में जुट गई है।
FCRA संशोधन बिल 2026 को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है केंद्र सरकार
विदेश से मिलने वाले फंड और अनुदान को नियंत्रित करने वाले विवादित FCRA (Foreign Contribution Regulation Amendment Bill, 2026) पर केंद्र सरकार बैकफुट पर जाने के बजाय आम सहमति का रास्ता तलाशती नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार इस विधेयक को संसद में सीधे पेश करने से पहले इसकी विस्तृत जांच और व्यापक समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने पर विचार कर रही है।
इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के तुरंत बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर से बंद कमरे में बैठक की। इससे पहले वे गतिरोध खत्म करने और विधेयक पर चर्चा की जमीन तैयार करने के लिए विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं के साथ भी कई दौर की बातचीत कर चुके हैं।
बिल को पूरी तरह वापस लेने और विवादित धारा 15 को हटाने की मांग पर अड़ा हुआ है विपक्ष
दूसरी ओर, विपक्षी खेमा इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप को किसी भी कीमत पर स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा है। NCP-SP की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले तथा DMK के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
DMK सांसद पी. विल्सन ने गृह मंत्री के समक्ष स्पष्ट मांग रखी कि कानून की सबसे विवादित धारा 15 को हटाया जाए और इस विधेयक को पूरी तरह वापस लिया जाए। इसके साथ ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों ने भी आरोप लगाया है कि सरकार इस संशोधन के माध्यम से विदेशी फंडिंग पाने वाली सामाजिक संस्थाओं, अस्पतालों और चैरिटेबल ट्रस्टों को अनावश्यक रूप से जांच के घेरे में ला रही है।
BAC की बैठक के एजेंडे से बाहर हुआ बिल, अब JPC के गठन पर टिकीं राजनीतिक गलियारों की निगाहें
सोमवार को आयोजित संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक ने इन अटकलों को और अधिक बल दे दिया है, क्योंकि बैठक के आधिकारिक एजेंडे में FCRA संशोधन बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल दोनों में से किसी को भी शामिल नहीं किया गया था। सरकार द्वारा BAC के एजेंडे में इसे जगह न दिए जाने से मानसून सत्र के बचे हुए दिनों के भीतर इस विधेयक के पेश होने को लेकर अनिश्चितता और गहरा गई है।
अब संसद से लेकर मीडिया के गलियारों तक सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या सरकार विपक्ष की मांग के आगे कदम बढ़ाते हुए JPC का गठन करती है या फिर सत्र के अंतिम दिनों में कोई नया विधायी दांव खेलती है।
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