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Sukhbir Badal का केजरीवाल को ओपन चैलेंज, पेपर लीक और Job Scams पर पंजाब के किसी भी University में करें बहस

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को पंजाब में कथित पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने राज्य सरकार पर किसी को भी जवाबदेह न ठहराने का आरोप लगाया। बठिंडा के सरकारी राजिंदरा कॉलेज में स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (SOI) के 'भविख बचाओ मोर्चा' के तहत आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए, बादल ने पंजाब के मंत्रियों हरजोत बैंस और बलबीर सिंह के तुरंत इस्तीफे और 10 कथित पेपर लीक मामलों की CBI जांच की मांग की। बादल ने दावा किया कि परीक्षा के पेपर लीक होने से पंजाब भर में 10 लाख से ज़्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं और सवाल उठाया कि इस मुद्दे पर किसी सीनियर अधिकारी या मंत्री ने इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया।

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छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर बादल ने केजरीवाल को चुनौती दी

केजरीवाल पर निशाना साधते हुए बादल ने सवाल किया कि AAP नेता ने दिल्ली में छात्रों के लिए विरोध-प्रदर्शन तो किया, लेकिन पंजाब में छात्रों के लिए ऐसा कोई प्रदर्शन क्यों नहीं किया। बादल ने पूछा क्या वे आपके बच्चे नहीं हैं? आप पंजाबी छात्रों के साथ इस तरह धोखा क्यों कर रहे हैं? उन्होंने केजरीवाल को पंजाब के किसी भी विश्वविद्यालय में खुली बहस की चुनौती दी और कहा कि वे कथित पेपर लीक, राज्य के बाहर के उम्मीदवारों की भर्ती और सरकारी नौकरियों से पंजाबी युवाओं को बाहर रखने के मामलों पर तथ्य और आंकड़े पेश करेंगे। 

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बादल का आरोप है कि बाहरी लोगों को नौकरी दी गई

बादल ने आरोप लगाया कि AAP सरकार की ओर से दी गई बताई जा रही 60,000 नौकरियों में से आधी से ज़्यादा नौकरियां पंजाब के बाहर के उम्मीदवारों को मिली हैं। उन्होंने भर्ती के आँकड़े बताते हुए आरोप लगाया कि 68 वेटनरी इंस्पेक्टरों में से हरियाणा के 24 और राजस्थान के 12 उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि लाइनमैन के 2,100 पदों के लिए हरियाणा से 600 और राजस्थान से 100 उम्मीदवारों की भर्ती की गई थी। बादल ने आगे आरोप लगाया कि पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉर्पोरेशन में बनाए गए नए पदों में से 60% पद राज्य के बाहर के उम्मीदवारों को दिए गए थे।

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पंजाबियों के लिए 100% सरकारी नौकरियाँ

बादल ने घोषणा की कि अगर 2027 में SAD सत्ता में आती है, तो वह पंजाब में सरकारी नौकरियों का 100% हिस्सा पंजाबियों के लिए आरक्षित करेगी। उन्होंने कहा कि पिछली SAD सरकार ने पंजाबियों के लिए नौकरियाँ सुरक्षित करने के मकसद से कानून बनाया था, लेकिन आरोप लगाया कि बाद में AAP सरकार ने उसे रद्द कर दिया। बादल ने कहा कि हम पंजाबियों के लिए पंजाब में नौकरियाँ सुरक्षित करने वाला कानून फिर से लाएँगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि भविष्य में SAD सरकार औद्योगिक प्रोत्साहन (इंसेंटिव) केवल उन्हीं कंपनियों को देगी जो कम से कम 75% पंजाबियों को नौकरी पर रखेंगी।

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काम की खबर: अस्पतालों का कमरा 3-स्टार होटल से महंगा नहीं होना चाहिए, संसदीय समिति की बड़ी सिफारिश

देश के बड़े शहरों में निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च कम करने की दिशा में संसदीय समिति ने अहम सिफारिश की है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने कहा है कि अस्पतालों के बेसिक रूम का किराया आसपास के 3-स्टार होटल के औसत कमरे के किराए से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

समिति की यह रिपोर्ट 7 अगस्त को राज्यसभा में पेश की गई और लोकसभा के पटल पर भी रखी गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट 'अफोर्डेबिलिटी एंड एसेसिबिलिटी ऑफ हेल्थकेयर फेसिलिटीज इन पब्लिक एंड प्राइवेट सेक्टर' में खास तौर पर बड़े महानगरों के निजी अस्पतालों में कमरे के किराए को तर्कसंगत बनाने की जरूरत बताई है। समिति का मानना है कि कई निजी अस्पतालों में मरीज के इलाज के कुल बिल में कमरे का किराया बड़ा हिस्सा बन जाता है। इसलिए इसकी कीमत पर एक व्यावहारिक सीमा तय करने की जरूरत है।

अस्पताल के बेसिक रूम रेंट पर होगी सीमा
समिति ने सुझाव दिया है कि अस्पताल के कमरे का बेसिक किराया अस्पताल के आसपास या नजदीकी इलाके में मौजूद 3-स्टार होटलों के औसत कमरे के किराए से अधिक नहीं होना चाहिए। यह व्यवस्था बड़े महानगरों के सभी निजी अस्पतालों में अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, यह सीमा सिर्फ बेसिक रूम टैरिफ पर लागू होगी।

अस्पताल निवासी डॉक्टर, नर्सिंग, डिस्पोजेबल सामान, भोजन और लॉन्ड्री जैसे खर्च अलग से जोड़ सकेंगे। समिति का कहना है कि इन सेवाओं की लागत को अलग दिखाने से अस्पताल के कुल खर्च को अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत बनाया जा सकेगा।

सरकारी और निजी अस्पताल के खर्च में बड़ा अंतर
समिति ने अस्पताल में भर्ती होने के खर्च में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बड़े अंतर को भी रेखांकित किया। 80वें नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च करीब 6631 रुपये, जबकि निजी अस्पताल में यह करीब 50508 रुपये था। देशभर में अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च करीब 37858 रुपये और मरीजों का औसत आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर करीब 34,064 रुपये रहा।

रिपोर्ट में मेडिकल महंगाई की दर 10-13 प्रतिशत सालाना रहने का भी उल्लेख किया गया है। इससे परिवारों के इलाज पर होने वाला खर्च और हेल्थ इंश्योरेंस की लागत दोनों बढ़ रहे हैं।

इलाज के पैकेज रेट सार्वजनिक करने की सिफारिश
समिति ने निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों के लिए सामान्य सर्जरी और मेडिकल प्रक्रियाओं के तय पैकेज रेट बनाने और उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की सिफारिश की है। इन पैकेज में डॉक्टर की फीस, जांच, जरूरी मेडिकल सामान और सामान्य पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल शामिल होनी चाहिए।

समिति का मानना है कि छिपे हुए शुल्क और अलग-अलग मरीजों से अलग बिलिंग खत्म होने से इलाज का खर्च नियंत्रित हो सकता है और मरीजों को पहले से पता रहेगा कि इलाज पर कितना खर्च आएगा।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये फिलहाल संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें हैं। अस्पतालों के लिए इन्हें अनिवार्य बनाने के लिए सरकार की मंजूरी और जरूरी नियामकीय कार्रवाई अभी बाकी है।

(प्रियंका कुमारी)

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  Sports

आशीष कुमार को लेकर मचा बवाल, शिकायत के बाद GFI ने लिस्ट से ही नाम काट दिया

भारतीय जिम्नास्टिक महासंघ (GFI) की चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद बड़ा बदलाव किया गया है. राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के पदक विजेता आशीष कुमार और जिम्नास्ट आदित्य राणा का नाम स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ मेरिट (SOM) की संशोधित सूची से हटा दिया गया है. दोनों को पहले अस्थायी सूची में जगह मिली थी। शिकायतों के बाद खेल मंत्रालय ने GFI से जवाब मांगा था. नियमों के मुताबिक SOM में शामिल होने के लिए खिलाड़ी को आवेदन से कम से कम एक साल पहले संन्यास लेना जरूरी है. GFI ने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद जरूरी सुधार किए गए हैं. Tue, 11 Aug 2026 15:53:55 +0530

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