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West Bengal Election Result: क्या ममता दोबारा सत्ता में लौटेंगी? या एंटी इनकंबेंसी का होगा असर; जानें ये होंगे फैक्टर

West Bengal Vidhan Sabha Chunav Result 2026: पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोटिंग के बाद अब इंतजार खत्म हो चुका है. रात बीतते ही सुबह राज्य की 293 सीटों पर मतगणना आरंभ होगी. दोपहर 12 बजे यह साफ हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल में फिर से ममता बनर्जी की सरकार बनेगी या नहीं. इसके बाद भाजपा के सत्ता में आने के संकेत मिल रहे हैं. राज्य में कमल खिल सकता है. इस बार का बंगाल चुनाव कई मायनों में पूरी तरह से अलग रहा. चुनाव के दौरान कई नए रिकॉर्ड तैयार हैं. चुनावी इतिहास में पहली बार दो चरणों में वोटिंग हुई है. इससे पहले राज्य में आठ चरणों तक मतदान हुए हैं. 

इस चुनाव के दोनों चरणों में एक भी मौत की खबर सामने नहीं आई है. बंगाल में सबसे ज्यादा सेंट्रल फोर्स तैनात थी. यहां पर रिकॉर्ड मतदान हुआ. ऐसा मतदान देश के चुनावी इतिहास में पहले कभी देखा गया था. सीधे शब्दों में कहें तो, 2026 के विधानसभा चुनाव ने राज्य ने अपने राजनीतिक इतिहास में पहली बार बड़ा बदलाव देखा है.

क्या रिकॉर्ड वोटिंग से बाजी पलटेगी?

पूरे बंगाल में भारी मतदान हुआ है. आजादी के बाद एक नया रिकॉर्ड बनाया गया है.  2011 में 84, 2016 में 82.66 और 2021 में 81.56 प्रतिशत मतदान हुआ था. मगर 2026 में सारे आंकड़े पीछड़ गए हैं. इस बार वोटिंग रेट 92 प्रतिशत के पार पहुंच गया है. कई जगहों पर री-पोलिंग का भी मामला सामने आया. 

किन फैक्टर पर भाजपा को मिलेगी जीत 

विपक्षी पार्टी होने के नाते भाजपा मुख्य रूप से सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ लोगों के गुस्से के साथ-साथ कई खास मामलों को भुनाने को मैदान में थी. तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के राज को उखाड़ने के लिए एंटी इनकंबेंसी को भाजपा ने बढ़ाया. आरजी कर रेप कांड और कस्बा लॉ कॉलेज जैसी सेंसिटिव घटनाओं ने महिला सुरक्षा के मामले पर तृणमूल पर कई दबाव बनाए. 

तृणमूल के खिलाफ उठाए गए भ्रष्टचार के मामले में उठाए और 26,000 नौकरियों को रद्द करने के मामले को उठाया गया. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इससे शहरी और पढ़े-लिखे मिडिल क्लास का गुस्सा काफी हद तक भाजपा के पक्ष में जा सकता है. वहीं दूसरी ओर आलू किसानों में अपनी का सही दाम न मिलने अधिक नाराजगी देखी गई है. 

सत्तारूढ़ तृणमूल को कहा है फायदा?

पंद्रह साल सत्ता में रहने के कारण तृणमूल के खिलाफ माहौल है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस की नीव काफी मजबूत है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बूथ लेवल पर तृणमूल की ऑर्गेनाइजेशनल ताकत है. यह मतदताओं को अंतिम वक्त तक अपने बूथ पर बनाए रखने में सहायता करती है. वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों में लक्ष्मी भंडार की लोकप्रियता तृणमूल के पक्ष में महिलाओं का वोट बैंक बनाए रखने की वजह है. इसके साथ कन्याश्री और रूपश्री जैसे एक के बाद योजनाएं काफी प्रभावी रही हैं. कई लोगों का कहना है कि इस बार SIR के असर से राज्य में मुस्लिम वोट तृणमूल के पक्ष में अधिक है. इसके साथ SIR की लिस्ट से बाहर रखे गए मतुआ समुदाय की नाराजगी की अप्रत्यक्ष रूप से सत्ताधारी पार्टी को लाभ देगी. 

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पेशावर जाल्मी की कप्तानी कर रहे बाबर आजम के लिए ये सीजन अच्छा रहा. उन्होंने सबसे ज्यादा रन बनाकर टीम को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. मगर एक बार फिर वो फाइनल में फेल हो गए. Sun, 03 May 2026 23:59:59 +0530

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