NDA का मंगल मिलन: PM मोदी और सांसदों ने एक साथ लहराया तिरंगा, संसद परिसर में झारखंड मुद्दे पर सत्ता पक्ष का प्रदर्शन
नई दिल्ली में संसद सत्र के बीच एनडीए सांसदों की ‘मंगल मिलन’ बैठक मंगलवार को ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष के साथ शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत एनडीए के कई नेता बैठक में तिरंगे के साथ नजर आए। इस बैठक में संसद की कार्यवाही की रणनीति के साथ झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
‘वंदे मातरम’ से शुरू हुई NDA सांसदों की बैठक
संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ बैठक में एनडीए के सांसदों ने एकजुटता का संदेश दिया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेता हाथ में तिरंगा लिए नजर आए। बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के नारे के साथ हुई।
एनडीए की यह बैठक संसद सत्र के दौरान गठबंधन की रणनीति तय करने के लिहाज से अहम मानी जाती है। इसमें अलग-अलग सहयोगी दलों के सांसदों के बीच सदन की कार्यवाही को लेकर समन्वय और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi, Union Home Minister Amit Shah, BJP President Nitin Nabin and other NDA leaders wave Tiranga during NDA's weekly parliamentary party meeting 'Mangal Milan' at PLB Building. pic.twitter.com/4VCKT43DsH
— ANI (@ANI) August 11, 2026
झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा भी गरम
एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर भी विरोध जताया। सांसदों की ओर से झारखंड सरकार पर छात्रों के साथ कथित अत्याचार का मुद्दा उठाने की तैयारी है।
सांसदों के हाथों में ऐसे पोस्टर नजर आने की बात कही गई, जिनमें सरकार की ओर से छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की इच्छा और विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया गया है। इस मुद्दे को संसद में उठाकर एनडीए विपक्ष को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ सकता है।
संसद की रणनीति पर भी हुआ मंथन
‘मंगल मिलन’ बैठक में संसद की कार्यवाही के दौरान सांसदों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाता है। एनडीए सांसदों के बीच यह तय किया जाता है कि महत्वपूर्ण विधेयकों और बहस के दौरान गठबंधन के सांसद सदन में मौजूद रहें। इसके अलावा अलग-अलग सहयोगी दलों के नेताओं को प्रमुख मुद्दों पर बोलने का अवसर और जिम्मेदारी देने को लेकर भी समन्वय किया जाता है।
क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक?
‘मंगल मिलन’ एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक का बदला हुआ नाम है। इसका उद्देश्य गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और संसद की कार्यवाही को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है।
इस बैठक में भाजपा के अलावा शिवसेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों के सांसद हिस्सा लेते हैं। संसद सत्र के दौरान यह बैठक सरकार और गठबंधन के सांसदों के बीच समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बन जाती है।
पिछली बैठक में उठे थे विकास और रोजगार के मुद्दे
पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने सरकार की उपलब्धियों और देश के विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने रोजगार की स्थिति में सुधार और गरीबी कम होने का दावा किया था।
वहीं भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि बैठक में देश में चल रहे विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा हुई।
एनडीए की मौजूदा बैठक में भी संसद की कार्यवाही के दौरान गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने और विपक्ष के उठाए मुद्दों का जवाब देने की रणनीति पर जोर रहने की संभावना है।
पूजा में अक्षत यानी चावल का इस्तेमाल क्यों माना जाता है शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व
Akshat ka mahatva: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान में अक्षत यानी साबुत चावल का इस्तेमाल अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि बिना अक्षत के पूजा अधूरी रहती है, इसी वजह से देवी-देवताओं को तिलक लगाते समय या उनकी पूजा में अक्षत जरूर चढ़ाया जाता है। "अक्षत" शब्द का अर्थ ही होता है - जो टूटा हुआ न हो, यानी साबुत और पूर्ण।
साबुत चावल को ही क्यों माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में हमेशा साबुत और अखंडित चावल का ही इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि टूटे हुए चावल को अपूर्णता और अशुभता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि साबुत अक्षत जीवन में पूर्णता, समृद्धि और सौभाग्य लाने का प्रतीक है। यही कारण है कि पूजा से पहले चावल को अच्छी तरह छानकर उसमें से टूटे हुए दानों को अलग कर दिया जाता है।
अक्षत को धार्मिक ग्रंथों में क्यों माना गया है पवित्र?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अक्षत को अन्न देवता का प्रतीक माना जाता है, और अन्न को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र वस्तुओं में गिना जाता है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि अक्षत का संबंध देवी लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि चावल को समृद्धि और भरपूर अनाज का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से किसी भी पूजा में अक्षत चढ़ाने को घर में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
तिलक के साथ अक्षत लगाने की परंपरा
हिंदू परंपरा में जब भी किसी देवी-देवता या व्यक्ति को तिलक लगाया जाता है, तो उसके साथ अक्षत लगाना भी अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि तिलक के साथ अक्षत लगाने से पूजा का संकल्प और भी मजबूत होता है। इसके अलावा किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ या विवाह समारोह में अतिथियों और यजमानों के माथे पर अक्षत सहित तिलक लगाने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है।
अक्षत चढ़ाने से जुड़े जरूरी नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में इस्तेमाल होने वाले अक्षत को हमेशा स्वच्छ जल से धोकर और सुखाकर ही अर्पित करना चाहिए। कुछ परंपराओं में अक्षत को हल्दी के साथ मिलाकर पीला करने की भी प्रथा है, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि टूटे हुए या कीड़े लगे चावल को पूजा में कभी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
आज भी हर पूजा में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन अक्षत का महत्व आज भी उतना ही बना हुआ है। चाहे घर की छोटी पूजा हो या मंदिर में बड़ा अनुष्ठान, अक्षत के बिना पूजा को अधूरा ही माना जाता है, और यह परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
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