मध्य प्रदेश : रेखा यादव बनी राज्य महिला आयोग अध्यक्ष, साधना स्थापक को सदस्य की जिम्मेदारी, आदेश जारी
मध्यप्रदेश में निगम- मंडल, आयोग और प्राधिकरण में नियुक्तियां का क्रम जारी है। प्रदेश में अब तक करीब 29 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं। इसी कड़ी में अब राज्य महिला आयोग में लंबे समय से रिक्त चल रहे पदों पर मोहन सरकार ने नियुक्तियां की हैं। छतरपुर जिले के बड़ामलहरा की पूर्व विधायक रेखा यादव को राज्य महिला आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
वही साधना स्थापक को आयोग के सदस्य की जिम्मेदारी दी गई है। इनकी नियुक्ति तीन-तीन साल के लिए हुई है। इस संबंध में महिला और बाल विकास विभाग ने 2 मई 2026 को आदेश जारी किया है। महिला आरक्षण की चर्चाओं की बीच हुई इन नियुक्तियों के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
बता दें कि साल 2008 में रेखा यादव ने बीजेपी के टिकट पर विधायक बनी थीं। छतरपुर जिले के बड़ामलहरा सीट से विधायक रह चुकी हैं। बताया जा रहा है कि महिला सशक्तिकरण और जनसेवा के क्षेत्र में लंबे अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ को देखते हुए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
गौरतलब है कि पिछली कमलनाथ सरकार में कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा को राज्य महिला आयोग अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनकी नियुक्ति मार्च 2020 में हुई थी लेकिन कांग्रेस की सरकार गिरने और पुन: शिवराज सरकार बनने के बाद 23 मार्च को शोभा ओझा को पद से हटा दिया था। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया था। अब करीब 6 साल के लंबे इंतजार के बाद राज्य महिला आयोग को नया नेतृत्व प्रदान किया गया है।
हरदा के टिमरनी में बवाल! थाने में पूछताछ के दौरान बुजुर्ग की मौत, परिवार ने उठाए सवाल
मध्य प्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी थाना क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। एक बुजुर्ग व्यक्ति, जिन्हें पुलिस पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था, अब इस दुनिया में नहीं हैं। परिवार का आरोप है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और प्रताड़ना का नतीजा है।
घटना के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि अस्पताल के बाहर धरना शुरू हो गया। परिजन, सामाजिक संगठन और स्थानीय विधायक न्याय की मांग को लेकर अड़ गए हैं। हरदा टिमरनी थाना मौत मामला अब सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस प्रक्रिया पर बड़ा सवाल बन चुका है।
हरदा टिमरनी थाना मौत मामला
हरदा टिमरनी थाना मौत मामले की शुरुआत शनिवार से होती है, जब पिपल्या कला निवासी 60 वर्षीय रामदास कोरकू को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था। यह पूछताछ गौकशी से जुड़े एक मामले में की जा रही थी, जिसमें पुलिस पहले से जांच कर रही थी।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के बाद रामदास ने थाना परिसर में ही जहर का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत टिमरनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
‘पिछले कई दिनों से हो रही थी प्रताड़ना’
मृतक के परिवार ने हरदा टिमरनी थाना मौत मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। मृतक की बेटी भवानी बघेला का कहना है कि उनके पिता को पिछले 5-6 दिनों से लगातार थाने बुलाया जा रहा था और पूछताछ के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा था।
परिवार का दावा है कि पुलिस जो कह रही है, वह पूरी सच्चाई नहीं है। मृतक के बेटे ने कहा कि उनके पिता को शनिवार दोपहर में छोड़े जाने की बात गलत है, क्योंकि वे शाम तक थाना परिसर में ही मौजूद थे। इसी दौरान उन्होंने जहर का सेवन किया।
धरना, प्रदर्शन और बढ़ता तनाव
रविवार सुबह से ही हरदा टिमरनी थाना मौत मामले को लेकर माहौल गरमा गया। जिला अस्पताल के बाहर परिजन और सामाजिक संगठन धरने पर बैठ गए। इस विरोध में स्थानीय विधायक आरके दोगने भी शामिल हुए, जिससे मामला और ज्यादा गंभीर हो गया।
धरने के दौरान प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार परिजनों को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को देखते हुए इलाके में पुलिस बल भी बढ़ा दिया गया, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
जांच जारी, पांच टीमें गठित
पुलिस ने हरदा टिमरनी थाना मौत मामले में अपनी सफाई भी दी है। अधिकारियों का कहना है कि रामदास को गौकशी के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था और उनसे सामान्य प्रक्रिया के तहत पूछताछ की गई थी।
एसडीओपी शालिनी परस्ते के अनुसार, किन परिस्थितियों में रामदास ने जहर का सेवन किया, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच के लिए पांच टीमें भी गठित की हैं।
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