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इंसान नहीं, यहां 2012 से कुत्ता संभाल रहा है मेयर की कुर्सी, जानिए इस शहर का अनोखा राज

सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन इस पहल ने इस शहर को खास पहचान दिला दी है. कैलिफोर्निया के इडि लविल्डशहर में एक बेहद अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. यहां साल 2012 से यहां इंसान नहीं, बल्कि एक कुत्ता मेयर की जिम्मेदारी निभा रहा है.

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बरगी बांध हादसा: विमान में खराबी से 4 घंटे एयरपोर्ट पर रुका शव, कोयंबटूर भेजने में देरी

बरगी बांध हादसा पहले ही कई परिवारों के लिए गहरा जख्म बन चुका था, लेकिन शनिवार को यह दर्द और बढ़ गया जब अपनों के शव को घर ले जाने में भी बाधा आ गई। जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर वह पल बेहद भावुक था, जब परिवार अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने के लिए तैयार था, लेकिन अचानक सब कुछ रुक गया।

बरगी बांध हादसा से जुड़े मृतकों के शव को सुबह ही तमिलनाडु भेजा जाना था। परिजन भी उसी विमान से अपने गृह राज्य लौटने वाले थे। लेकिन जैसे ही विशेष विमान एयरपोर्ट पहुंचा, उसमें तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद जो इंतजार शुरू हुआ, वह चार घंटे तक चला। इस दौरान परिजन एयरपोर्ट पर ही बैठे रहे, आंखों में आंसू और दिल में बेचैनी लिए।

तकनीकी खराबी से रुकी उड़ान

बरगी बांध हादसा के बाद राहत और बचाव कार्यों के बीच यह घटना एक और चुनौती बनकर सामने आई। सुबह 10:30 बजे एंबुलेंस से शव डुमना एयरपोर्ट लाए गए थे। योजना थी कि सुबह 11 बजे तक विमान उड़ान भर लेगा, लेकिन तकनीकी खराबी ने सारी योजना को बिगाड़ दिया।

विमान में आई इस खराबी के कारण न सिर्फ उड़ान में देरी हुई, बल्कि परिजनों को मानसिक रूप से भी बड़ा झटका लगा। आखिरकार दूसरा विशेष विमान दोपहर करीब 2 बजे एयरपोर्ट पहुंचा। इसके बाद दो शवों और दो परिजनों को लेकर विमान दोपहर 3:20 बजे कोयंबटूर के लिए रवाना हुआ।

अन्य परिजनों को दिल्ली के रास्ते भेजा गया

बरगी बांध हादसा में मृतकों के बाकी परिजनों को ले जाने के लिए एक और विमान खजुराहो से आने वाला था। लेकिन मौसम खराब होने के कारण वह उड़ान नहीं भर सका। इसके बाद प्रशासन को नई योजना बनानी पड़ी।

बाकी परिजनों को नियमित फ्लाइट से दिल्ली भेजा गया, जहां से उन्हें कोयंबटूर के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगा और परिजनों को लंबा इंतजार करना पड़ा।

क्रूज को काटकर निकाले गए शव

बरगी बांध हादसा के बाद चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन भी आसान नहीं रहा। जिस क्रूज में पर्यटक सवार थे, वह इतना मजबूत था कि उसे बाहर निकालना चुनौती बन गया। क्रेन और मशीनों के बावजूद उसे पूरी तरह बाहर नहीं निकाला जा सका।

आखिरकार प्रशासन ने क्रूज को काटने का फैसला लिया। भारी मशीनों की मदद से करीब छह घंटे की मेहनत के बाद क्रूज के टुकड़े-टुकड़े किए गए। इसके बाद मलबे को बाहर निकाला गया और अंदर फंसे लोगों की तलाश की गई।

डीप डाइवर्स और सोनार तकनीक से खोज

बरगी बांध हादसा के बाद लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के साथ-साथ एनवीडीए के डीप डाइवर्स को भी लगाया गया। आठ विशेषज्ञ गोताखोरों ने गहराई तक जाकर तलाश शुरू की।

सोनार उपकरणों की मदद से पानी की तलहटी में खोज की जा रही है, ताकि किसी भी लापता व्यक्ति का पता लगाया जा सके। इसके लिए अतिरिक्त जनरेटर और तकनीकी उपकरण भी मौके पर लगाए गए हैं।

 

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