ईरान की इजाजत के बिना कोई भी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता: ईरानी सेना
तेहरान, 3 मई (आईएएनएस)। ईरान का दावा है कि उनकी सेना इस समय होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा नियंत्रण रखे हुए है। ईरान की सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमीनिया ने कहा कि सेना की अनुमति के बिना कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर सकता, चाहे वह दोस्त देश का हो या दुश्मन का।
ईरानी मीडिया द्वारा प्रसारित उनके बयानों के फुटेज के अनुसार, अकरमिनिया ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करना ईरान का एक स्वाभाविक अधिकार है, लेकिन पिछले कई सालों से उसने इस अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया था।
उन्होंने कहा, वर्तमान में, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कोर पश्चिम में और देश की सेना पूर्व में पूरी शक्ति के साथ इस स्ट्रेट को नियंत्रित कर रही है, और कोई भी जहाज - चाहे वह मित्र हो या शत्रु - हमारी सेनाओं की अनुमति और अधिकार के बिना यहां से गुजरने का अधिकार नहीं रखेगा।
इस बीच, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने ईरान के उप विदेश मंत्री हामिद घनबारी के हवाले से कहा कि कई देश घबराए हुए हैं और लगातार ईरान को संदेश और पत्र भेजकर अपने जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति मांग रहे हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से ईरान ने होर्मुज स्ट्रे्ट पर सख्ती बढ़ा दी है। उसने उन जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने से मना कर दिया है, जो इजरायल और अमेरिका से जुड़े हैं। यह कदम ईरान पर हुए संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया।
इससे पहले गुरुवार को ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में एक नया दौर शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि यहां एक नया कानूनी ढांचा और नई व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे क्षेत्र के सभी देशों को विकास और राहत मिलेगी।
फारस की खाड़ी के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर दिए गए संदेश में खामेनेई ने कहा कि इस क्षेत्र की आज़ादी के लिए ईरान ने कई बलिदान दिए हैं और विदेशी ताकतों का मुकाबला किया है। उन्होंने इस्लामिक क्रांति को इन संघर्षों का एक अहम मोड़ बताया। उन्होंने यह भी कहा कि यह इलाका हमेशा से दुनिया की बड़ी ताकतों की नजर में रहा है और उन्होंने यहां कई बार हस्तक्षेप किया, जिससे क्षेत्र के देशों को नुकसान और असुरक्षा झेलनी पड़ी।
खामेनेई के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के लिए बनने वाला नया कानून और प्रबंधन व्यवस्था पूरे क्षेत्र के देशों के लिए विकास और आर्थिक लाभ लेकर आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में फारस की खाड़ी का क्षेत्र उज्ज्वल होगा, जहां शांति, विकास और समृद्धि होगी, और यह अमेरिका के प्रभाव से मुक्त रहेगा।
--आईएएनएस
एएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान का बर्ताव सही नहीं रहा तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला: ट्रंप
वाशिंगटन, 3 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें ईरान के साथ संभावित समझौते की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी गई है, लेकिन अंतिम शब्दावली का इंतजार है, उसके बाद ही वे कोई निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने मिस बिहेव (गलत व्यवहार) किया, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अब भी खुला है।
मियामी जाने से पहले फ्लोरिडा में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, “उन्होंने मुझे डील के कॉन्सेप्ट के बारे में बताया है। अब वे मुझे इसकी सटीक शब्दावली देंगे।”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और कूटनीतिक प्रयास नाजुक स्थिति में हैं। अमेरिका एक ओर बातचीत के लिए तैयार दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर दबाव बनाए रखने की रणनीति भी अपना रहा है। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान के खिलाफ दोबारा हमले शुरू करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार, तेहरान ने एक प्रस्ताव रखा है, जिसे स्वीकार करने पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए शिपिंग फिर से शुरू हो सकती है और ईरान के अनुसार अमेरिकी “नाकेबंदी” खत्म हो सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत को बाद के लिए टाल दिया गया है—जिसे ट्रंप ने फिलहाल अस्वीकार कर दिया है।
इस बीच, ट्रंप ने प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, “मैं जल्द ही उस योजना की समीक्षा करूंगा जो ईरान ने हमें भेजी है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगी, क्योंकि उन्होंने पिछले 47 वर्षों में मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।”
कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उप विदेश मंत्री (कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाकबादी ने तेहरान में विदेशी दूतों को संबोधित करते हुए अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव कम करने के लिए एक नई पहल की जानकारी दी।
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया, जो तेहरान और वाशिंगटन के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ब्रीफिंग के दौरान गरीबाकबादी ने जोर देकर कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी सैन्य बढ़त का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने इस प्रस्ताव को “थोपी गई दुश्मनी” का “स्थायी अंत” करने की कोशिश बताया और कहा कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह टकराव जारी रखता है या सार्थक बातचीत का रास्ता चुनता है।
-- आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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