बिजली के झटके, यौन शोषण... रूस की जेल में यूक्रेनी कैदियों के साथ कैसे होता है टार्चर? रिपोर्ट में हुए बड़े खुलासे
Ukrainian Prisoners in Russian Jails: रूस और यूक्रेन युद्ध को लंबा समय हो गया है. दोनों देशों में शांति के लिए कई बार प्रयास हो चुक है लेकिन सभी असफल रहे. सुपर पॉवर अमेरिका ने भी दोनों देशों के राष्ट्रपतियों को व्हाइट हाउस में बुलाकर बात की, कुछ दिन शांति रही लेकिन वही असफलता हाथ लगी. रूस और यूक्रेन में दोनों देशों के कैदी है. रूस में यूक्रेन के कैदियों के साथ किस तरह का भयावह व्यवहार टार्चर मिलता है. रिपोर्ट में इस पर बड़े खुलासे हुए हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के पूर्व कैदियों और अधिकारियों ने सोमवार को रूस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि रूस युद्धबंदियों और नागरिकों को व्यवस्थित तरीके से प्रताड़ित करता है. उन्हें लंबे समय तक अकेले रखा जाता है और मारपीट, बिजली के झटके और यौन शोषण जैसी यातनाएं दी जाती हैं. उनके मुताबिक, अभी भी हजारों यूक्रेनी नागरिक और युद्धबंदी रूस की हिरासत में हैं.
क्यूबा मूल के पिता के बेटे एक यूक्रेनी नागरिक ने बताया कि उसके लैटिन नाम की वजह से गार्ड उसे खास तौर पर निशाना बनाते थे. गार्ड उस पर “किराए का सैनिक” और “अमेरिकी जासूस” होने का आरोप लगाते थे. क्रीमियन तातार कार्यकर्ता लेनी उमेरोवा ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने क्रीमिया जाते समय उन्हें हिरासत में लिया गया था. उन्होंने कहा कि उन्हें सात अलग-अलग हिरासत केंद्रों में रखा गया और यातनाएं दी गईं.
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यूक्रेन की जवान की आपबीती
यूक्रेनी सेना के जवान खुआन अल्बर्टो लेव्या गार्सिया ने बताया कि उन्हें 1,183 दिनों तक रूसी कैद में रखा गया और इस दौरान उन्हें कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ीं. संयुक्त राष्ट्र की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके साथ मारपीट, बिजली के झटके, बेहद ठंडे मौसम में जबरन कड़ी कसरत और यौन शोषण किया गया. उन्होंने बताया कि उन्हें रोज पीटा जाता था और मानसिक रूप से तोड़ने के लिए भी कई तरह की यातनाएं दी जाती थीं. गार्सिया के मुताबिक, उनके साथ-साथ उनके कई अन्य साथियों को भी इसी तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ी.
कई कैदियों की हुईं हत्याएं
यूक्रेन के अधिकारी ओलेग गुशिन ने दावा किया कि रूस में यूक्रेनी कैदियों को यातना दी गई और कई लोगों की हत्या भी हुई. उनके मुताबिक, 300 से ज्यादा हिरासत केंद्रों की पहचान की गई है और 9,000 से अधिक यूक्रेनियन को वापस लाया जा चुका है, जबकि हजारों अब भी रूसी कैद में हैं.
भूख और बीमारी से जूझे कैदी
यूक्रेनी सेना के जवान गार्सिया ने बताया कि वह किसी तरह जिंदा बच गए, लेकिन उनके दो दोस्तों की डोनेट्स्क क्षेत्र के हिरासत केंद्रों में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कहा कि कैदियों को भीड़भाड़ वाली बैरकों में रखा जाता था, जहां जरूरी सुविधाएं भी नहीं थीं. उनके मुताबिक, लगभग सभी युद्धबंदी पेचिश जैसी बीमारी से पीड़ित थे और कई कैदी भूख से भी जूझ रहे थे.
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क्या बोला रूस?
रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनौपचारिक बैठक में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया. रूस की उप संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने इन आरोपों को “दुष्प्रचार अभियान” बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन में रूसी युद्धबंदियों के साथ यातना, अपमान और शारीरिक व मानसिक दुर्व्यवहार किया गया.
UN ने भी माना- 2022 से अब तक 129 हत्याएं
संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी क्लाउडिया फुएंतेस जूलियो ने कहा कि रूसी अधिकारियों पर यूक्रेनी युद्धबंदियों और नागरिक बंदियों को व्यवस्थित तरीके से यातना देने और दुर्व्यवहार करने के आरोप हैं. इसमें यौन हिंसा भी शामिल है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, फरवरी 2022 से अब तक 129 यूक्रेनी युद्धबंदियों की हिरासत की शुरुआत में ही हत्या की गई, जबकि 48 लोगों की मौत यातना, इलाज न मिलने या हिरासत की खराब परिस्थितियों के कारण हुई.
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