AAP का दावा, पंजाब ने अब तक का सबसे अधिक GST कलेक्शन किया, विकास दर में सबसे आगे
पंजाब के वित्त, योजना, आबकारी एवं कराधान मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा का दावा है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अप्रैल 2026 के लिए कर राजस्व में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है और राज्य ने जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक का अपना सबसे अधिक मासिक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) हासिल किया है. इसके साथ ही कुल जीएसटी राजस्व बढ़ोतरी में देश भर में पहला स्थान प्राप्त किया है.
2987.38 करोड़ का कुल जीएसटी दर्ज की
यहां जारी एक प्रेस रिपोर्ट में इस अभूतपूर्व उपलब्धि का विवरण देते हुए, वित्त मंत्री हरपाल सिंह ने कहा, "राज्य ने 2725.08 करोड़ के शुद्ध जीएसटी के साथ 2987.38 करोड़ का कुल जीएसटी दर्ज किया है. यह शानदार प्रदर्शन वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर शुद्ध जीएसटी में 70.70% की जबरदस्त वृद्धि को दर्शाता है, जो अप्रैल 2025 की हमारी प्राप्ति की तुलना में लगभग 1,129 करोड़ रुपये के प्रभावशाली वृद्धि में परिवर्तित हुआ."
जीएसटी में 66% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की
राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब की स्थिति के बारे में विवरण देते हुए,आबकारी एवं कराधान मंत्री ने कहा, "भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने पोस्ट-सेटलमेंट जीएसटी में 66% की शानदार वृद्धि दर्ज की है, जो पिछले वर्ष के 1,795 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,987 करोड़ रुपये हो गई है. यह हमें देश में सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्य के रूप में स्थापित करता है, जो सर्व-भारतीय विकास औसत को काफी पीछे छोड़ता है और सभी उत्तरी भारतीय राज्यों में अग्रणी है."
वित्तीय आंकड़ों के संदर्भ में जानकारी देते हुए, वित्त मंत्री हरपाल सिंह ने कहा, "हालांकि वर्ष-दर-वर्ष की तुलना अप्रैल 2025 से 859 करोड़ रुपये के असाधारण आईजीएसटी समायोजन(एडजस्टमेंट) से प्रभावित है, इस कारक को निष्पक्ष करने पर 12.57% का समायोजित कुल वृद्धि और 10.97% का समायोजित शुद्ध वृद्धि सामने आती है. यह स्पष्ट रूप से कर प्रशासन और अनुपालन में हमारे निरंतर सुधारों को दर्शाता है."
175 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना
इस वित्तीय उपलब्धि का श्रेय कठोर प्रशासनिक उपायों को देते हुए, आबकारी एवं कराधान मंत्री ने कहा, "हमारे मजबूत जीएसटी वृद्धि का श्रेय पूरे पंजाब में तेज की गई प्रवर्तन गतिविधियों को जाता है. डेटा एनालिटिक्स का व्यापक उपयोग, समन्वित फील्ड कार्रवाई और खुफिया जानकारी पर आधारित निरीक्षणों के माध्यम से, हम 175 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाने में सफल रहे हैं. इसके अलावा, इस अप्रैल में आयरन एंड स्टील सेक्टर में एक विशेष टैक्स चोरी विरोधी अभियान के दौरान, हमने एक ही दिन में लगभग 200 वाहनों को जब्त करके एक रिकॉर्ड प्रवर्तन ड्राइव चलाई है."
टैक्स चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की राज्य के राजस्व आधार को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जोर देकर कहा, "जीएसटी राजस्व संग्रह में पंजाब का शीर्ष स्थान कर विभाग की केंद्रित रणनीति का प्रमाण है, जो प्रौद्योगिकी-संचालित प्रवर्तन को वास्तविक करदाताओं की सुविधा के साथ सहज रूप से जोड़ता है. हम सभी नियमों का पालन करने वाले करदाताओं के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और सहायक कर प्रणाली सुनिश्चित करते हुए टैक्स चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं."
खसरे की चपेट में बांग्लादेश, यूनुस सरकार की नीतिगत बदलाव बना कारण
ढाका, 2 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश इस समय खसरे (मीजल्स) की गंभीर महामारी से जूझ रहा है। मार्च मध्य से अब तक देश में 32,000 से अधिक संदिग्ध मामले और 250 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकोप के चलते देशभर के अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल है। पिछले महीने ढाका के संक्रामक रोग अस्पताल में बच्चों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई बच्चे सांस लेने के लिए संघर्ष करते दिखे, जबकि कुछ निढाल अवस्था में पड़े थे। बेड की कमी के कारण कई मरीजों का इलाज फर्श पर करना पड़ा।
‘साइंस एडवाइजर’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह महामारी जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद वैक्सीन खरीद व्यवस्था में आई “विनाशकारी टूट” का नतीजा है, जिससे देशभर में टीकों की भारी कमी हो गई और टीकाकरण दर में तेज गिरावट आई।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में कुपोषण की ऊंची दर और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था ने मौतों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इससे यह भी सामने आया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति कितनी जल्दी कमजोर पड़ सकती है।
2024 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार बनी थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में वैक्सीन कवरेज व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद की व्यवस्था समाप्त कर खुली निविदा प्रणाली लागू कर दी। इस प्रक्रिया में सरकार आपूर्तिकर्ताओं से बोलियां मंगाती है और प्रस्तावों का मूल्यांकन कर ऑर्डर देती है।
यूनिसेफ ने इस कदम का कड़ा विरोध किया था और चेतावनी दी थी कि इससे टीकाकरण व्यवस्था बाधित हो सकती है तथा महामारी फैल सकती है। बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को बार-बार आगाह किया था और तत्कालीन अंतरिम स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम से भी इस फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निविदा प्रक्रिया नौकरशाही देरी में फंस गई, जिससे वैक्सीन आपूर्ति ठप हो गई और देशभर में स्टॉक खत्म होने लगा। इससे नियमित टीकाकरण बुरी तरह प्रभावित हुआ।
खसरा-रूबेला (एमआर) का विशेष टीकाकरण अभियान, जो पहले 2024 में होना था और राजनीतिक अशांति के कारण 2025 तक टाल दिया गया था, उसे भी रद्द कर दिया गया। मार्च के अंत तक सरकारी आंकड़ों में सामने आया कि 2025 में केवल 59 प्रतिशत पात्र बच्चों को ही खसरे का टीका लग पाया।
बांग्लादेश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद ने चेतावनी दी कि मौजूदा गति से चल रहा आपातकालीन टीकाकरण अभियान महामारी को जल्दी नहीं रोक पाएगा।
ढाका स्थित महामारी विज्ञान, रोग नियंत्रण एवं अनुसंधान संस्थान (आईईडीसीआर) के सलाहकार मोहम्मद मुश्तुक हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश सरकार को स्थिति की गंभीरता देखते हुए औपचारिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह पहले से ही आपात स्थिति है, फिर इसे आधिकारिक रूप से घोषित करने में हिचकिचाहट क्यों?”
--आईएएनएस
डीएससी
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