पीएमए ने दी चेतावनी, पाकिस्तान में 'मानव-निर्मित महामारी' का खतरा
इस्लामाबाद, 2 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) ने देश में एक “मानव-निर्मित महामारी” फैलने की चेतावनी दी है। पीएमए का कहना है कि देशभर में बैन होने के बावजूद फिर से इस्तेमाल होने वाली सीरिंज का निर्माण और उपयोग किया जा रहा है। यह जानकारी शनिवार को स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दी गई।
डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमए ने मांग की है कि पूरे देश में सभी स्टॉक्स की जांच की जाए और जो नियमों के खिलाफ हैं या गलत लेबल वाले हैं, उन्हें जब्त किया जाए। साथ ही पाकिस्तान की ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी (डीआरएपी) और प्रांतीय अधिकारियों को इस बड़ी नाकामी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
पीएमए ने कहा कि ऐसे सीरिंज जो ऑटो-डिसेबल का लेबल लगाकर बेचे जा रहे हैं लेकिन असल में वे दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं, यह एक गंभीर धोखाधड़ी और अपराध है। संगठन ने कहा कि जिन संस्थाओं की जिम्मेदारी मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, उनका इस तरह असफल होना बेहद चिंताजनक है।
पीएमए ने मांग की है कि सभी सीरिंज बनाने वाली फैक्ट्रियों की जांच की जाए और नियमों का पालन न करने वाले सभी सामान को तुरंत जब्त किया जाए। साथ ही, यह भी कहा कि इस बात की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए कि कैसे गलत लेबल वाली सीरिंज जांच पास करके बाजार तक पहुंच गईं।
इसके अलावा, पीएमए ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि एक आपातकालीन जागरुकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोगों को यह बताया जा सके कि असली ऑटो-डिसेबल सीरिंज की पहचान कैसे की जाए।
एसोसिएशन ने 2021 में लगाए गए सामान्य डिस्पोजेबल सीरिंज पर बैन को लेकर भी चिंता जताई है। यह बैन संक्रमण रोकने के लिए लगाया गया था, लेकिन अब पीएमए का कहना है कि यह नीति सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है।
पीएमए ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं है बल्कि लाखों लोगों की जान से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो पाकिस्तान में एचआईवी के मामले एक बड़े और बेकाबू राष्ट्रीय संकट में बदल सकते हैं।
पीएमए के अनुसार, पाकिस्तान में करीब 3,50,000 से 3,69,000 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं।
साल 2026 की पहली तिमाही में ही सिंध में 894 नए मामले सामने आए, जिनमें 329 बच्चे शामिल हैं। 0 से 14 साल के बच्चों में एचआईवी संक्रमण 2010 में 530 मामलों से बढ़कर हर साल 1,800 से ज्यादा हो गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2023 में एड्स से जुड़ी जटिलताओं के कारण 1,100 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई, जिसका कारण बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की गई सीरिंज और असुरक्षित मेडिकल प्रैक्टिस मानी जा रही है।
पीएमए ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया में हेपेटाइटिस-सी के मामलों के मामले में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो 2030 तक यह संख्या 1.26 करोड़ तक पहुंच सकती है।
इसके साथ ही बताया गया कि ग्लोबल फंड की एक टीम जल्द ही इस स्थिति का जायजा लेने इस्लामाबाद आएगी। पिछले दो दशकों में इस संस्था ने पाकिस्तान में एचआईवी, टीबी और मलेरिया से लड़ने के लिए एक अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा निवेश किया है।
--आईएएनएस
एवाई/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बाजार की पाठशाला: सोने के विभिन्न विकल्पों में निवेश पर कैसे और कितना लगता है टैक्स? आसान भाषा में समझें
नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। भारत में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश का एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता रहा है। आज के समय में निवेशक सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) और डिजिटल गोल्ड जैसे कई विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। हालांकि, इन सभी विकल्पों में निवेश का तरीका अलग है और इन पर लगने वाला टैक्स भी अलग-अलग होता है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि किस विकल्प पर कितना टैक्स लगता है।
पहले जानते हैं फिजिकल गोल्ड के टैक्स के बारे में। फिजिकल गोल्ड यानी गहने, सिक्के या बिस्किट को आयकर नियमों के अनुसार कैपिटल एसेट माना जाता है। अगर आप इसे खरीदने के 2 साल के अंदर बेचते हैं, तो उस पर मिलने वाला मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी) कहलाता है और इस पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
वहीं, अगर आप इसे 2 साल से ज्यादा समय तक रखते हैं, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) माना जाता है और इस पर 12.5 प्रतिशत फ्लैट टैक्स देना होता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अब इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। साथ ही, ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज को टैक्स में अलग से नहीं घटाया जा सकता।
वहीं गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो यह एक ऐसा निवेश विकल्प है, जिसमें आप बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे सोने की कीमत में निवेश कर सकते हैं। इसे खरीदने और बेचने के लिए डिमैट अकाउंट जरूरी होता है।
टैक्स के मामले में, अगर आप ईटीएफ को 1 साल के अंदर बेचते हैं, तो उस पर एसटीसीजी लगेगा और यह आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगा। वहीं, 1 साल से ज्यादा रखने पर एलटीसीजी माना जाएगा और 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होगा।
इसके अलावा, अगर डिजिटल गोल्ड की बात करें तो यह विकल्प आजकल काफी लोकप्रिय हो रहा है, जहां आप मोबाइल ऐप्स के जरिए डिजिटली थोड़ा-थोड़ा सोना खरीद सकते हैं। इसमें कंपनियां आपके लिए सोना सुरक्षित रखती हैं।
टैक्स के मामले में, यह फिजिकल गोल्ड जैसा ही माना जाता है। यानी 2 साल से कम होल्ड करने पर एसटीसीजी और 2 साल से ज्यादा रखने पर 12.5 प्रतिशत एलटीसीजी टैक्स लगता है। लेकिन ध्यान रखें कि यह निवेश अभी पूरी तरह से आरबीआई या सेबी द्वारा रेगुलेट नहीं है, इसलिए इसमें थोड़ा जोखिम भी रहता है।
वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और यह सोने में निवेश का सबसे अलग तरीका है। इसमें आपको 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलता है।
जानकारों के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर आप एसजीबी को उसकी पूरी अवधि (8 साल) तक रखते हैं, तो उस पर मिलने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। हालांकि, बीच में बेचने पर टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसे में 12.5 प्रतिशत एलटीसीजी या स्लैब के अनुसार एसटीसीजी लागू होगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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