FDI In Insurance: इंश्योरेंस में 100% और LIC में 20% विदेशी निवेश, सरकार ने बदल दिए नियम, इससे क्या होगा?
बीमा क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया। केंद्र सरकार ने बीमा कंपनियों में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दे दी। यह निवेश ऑटोमैटिक रूट के तहत होगा, यानी विदेशी कंपनियों को अलग से सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, एलआईसी के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है, जहां विदेशी निवेश की सीमा 20 फीसदी ही रहेगी।
सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश इंश्योरेंस एक्ट 1938 के प्रावधानों के तहत होगा। साथ ही, जिन कंपनियों में विदेशी निवेश आएगा, उन्हें बीमा और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ईरडा से जरूरी लाइसेंस या मंजूरी लेनी होगी।
एलआईसी के मामले में भी साफ किया गया है कि इसमें निवेश लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन एक्ट 1956 और संबंधित कानूनों के तहत ही होगा। एलआईसी में विदेशी निवेश पर 20 फीसदी की सीमा पहले की तरह लागू रहेगी।
यह फैसला उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की प्रेस नोट 1 (2026 सीरीज) के जरिए लागू किया गया। इसके तहत घरेलू बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश, जिसमें पोर्टफोलियो निवेश भी शामिल है, अब ऑटोमैटिक रूट के जरिए संभव होगा, बशर्ते नियामकीय मंजूरी और जांच पूरी हो।
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में संसद ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा को 74 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने वाले विधेयक को मंजूरी दी थी। 'सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025' को दोनों सदनों से पारित किया गया था। विपक्ष की ओर से इसे संसदीय समिति के पास भेजने जैसे कई संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि इससे बीमा क्षेत्र में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में बीमा की पहुंच बढ़ाने की अभी भी काफी गुंजाइश है और यह कदम उस दिशा में मदद करेगा।
सरकार का मानना है कि 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति मिलने से ज्यादा विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार में आएंगी। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बीमा प्रीमियम कम हो सकते हैं और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर, यह फैसला बीमा क्षेत्र को और अधिक खुला और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका फायदा उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को मिल सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
Digital gold: क्या होता है डिजिटल गोल्ड, इसमें क्या है जोखिम और कितना टैक्स लगता है?
Digital gold: डिजिटल दौर में सोना खरीदना अब पहले जैसा मुश्किल नहीं रहा। जहां पहले ज्वेलर की दुकान पर जाना पड़ता था, वहीं अब कुछ ही सेकंड में मोबाइल से डिजिटल गोल्ड खरीदा जा सकता। यही वजह है कि छोटे निवेशकों के बीच डिजिटल गोल्ड तेजी से लोकप्रिय हो रहा। लेकिन आसान होने के बावजूद इसमें निवेश करने से पहले इसकी पूरी समझ होना जरूरी।
दरअसल, डिजिटल गोल्ड में आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सोना खरीदते हैं, जो MMTC-PAMP या सेफगोल्ड जैसी कंपनियों के साथ जुड़े होते। आपके द्वारा खरीदे गए सोने के बराबर मात्रा असल में वॉल्ट में सुरक्षित रखी जाती। आप चाहें तो बाद में इसे सिक्कों या बार में बदल सकते हैं या प्लेटफॉर्म पर बेच सकते।
हालांकि, इसमें एक छिपी हुई लागत भी होती है, जिसे कई निवेशक नजरअंदाज कर देते हैं। डिजिटल गोल्ड में खरीद और बिक्री कीमत के बीच अंतर (स्प्रेड) होता है। यानी आप जिस कीमत पर खरीदते हैं, वह ज्यादा होती है और बेचते समय कम मिलती है। इसके अलावा खरीद पर करीब 3% जीएसटी भी लगता है। ऐसे में अगर सोने की कीमत स्थिर रहे, तब भी तुरंत बेचने पर नुकसान हो सकता है।
डिजिटल गोल्ड की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुविधा है। आप कम रकम से निवेश शुरू कर सकते हैं और कभी भी खरीद-बिक्री कर सकते हैं। लेकिन यह सुविधा मुफ्त नहीं है। स्टोरेज और बीमा का खर्च कीमत में ही जुड़ा होता है, जो आपको अलग से दिखाई नहीं देता। लंबे समय में यह निवेश थोड़ा महंगा पड़ सकता है, खासकर जब इसकी तुलना गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से की जाए।
सुरक्षा की बात करें तो डिजिटल गोल्ड पूरी तरह नियामकीय दायरे में नहीं आता। यह सेबी या रिजर्व बैंक के सीधे नियंत्रण में नहीं होता, जैसा कि म्यूचुअल फंड या बॉन्ड होते हैं। इसलिए इसमें प्लेटफॉर्म पर निर्भरता का जोखिम भी बना रहता है।
लिक्विडिटी यानी खरीद-बिक्री आसान जरूर है, लेकिन यह उसी प्लेटफॉर्म तक सीमित रहती है। आप इसे किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर नहीं कर सकते या खुले बाजार में बेच नहीं सकते।
टैक्स के लिहाज से डिजिटल गोल्ड पर वही नियम लागू होते हैं जो फिजिकल गोल्ड पर होते हैं। तीन साल से पहले बेचने पर लाभ आपकी आयकर स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है, जबकि तीन साल बाद 20% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (इंडेक्सेशन के साथ) लगता है। इसमें कोई खास टैक्स छूट नहीं मिलती।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल गोल्ड उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो धीरे-धीरे और छोटी रकम से सोना खरीदना चाहते हैं। लेकिन अगर आपका मकसद सिर्फ निवेश से बेहतर रिटर्न कमाना है, तो अन्य विकल्प ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं। कुल मिलाकर, डिजिटल गोल्ड खरीदना आसान जरूर है, लेकिन समझदारी के साथ ही इसमें निवेश करना बेहतर रहता है।
(प्रियंका कुमारी)
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