PM Narendra Modi से NCP सांसदों का मिलना सही, बोले Prithviraj Chavan
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के अगले राजनीतिक कदम को लेकर जारी अटकलों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सोमवार को कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी के सांसदों द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने में कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि, जब उनसे हाल में शरद पवार और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात तथा पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई बैठक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राकांपा (शरद चंद्र पवार) में ‘‘कुछ चल रहा है’’,। शरद पवार के नेतृत्व वाले राकांपा धड़े के सभी लोकसभा सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले के नेतृत्व में मोदी से मुलाकात की और महाराष्ट्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
राकांपा (शरद चंद्र पवार) ने कहा कि सांसदों ने लंबित मामलों पर चर्चा की और प्रधानमंत्री को महाराष्ट्र के लोगों की समस्याओं से अवगत कराया। हाल में शरद पवार ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने फडणवीस से मुलाकात की थी, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई थीं। चव्हाण ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘राकांपा (शरद चंद्र पवार) के अंदर क्या चर्चा हो रही है या उसकी दिशा क्या होगी, मैं निश्चित तौर पर नहीं कह सकता।
लेकिन मैं समझता हूं कि यदि कोई सांसद प्रधानमंत्री से मिलता है और अपने निर्वाचन क्षेत्र या राज्य के मुद्दे उठाता है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और यदि वह पार्टी से जुड़े मामलों पर बात करता है, तो वह भी निजी तौर पर किया जा सकता है। इसे सार्वजनिक करने की कोई जरूरत नहीं है।’’ हालांकि, चव्हाण ने कहा कि राकांपा (शरद चंद्र पवार) के भीतर कुछ चल रहा है। उन्होंने पार्टी के कुछ सांसदों के उन बयानों का उल्लेख किया कि उन्हें पर्याप्त धन नहीं मिल रहा है और विकास कार्यों की गति धीमी हो रही है।
Allahabad High Court: विधवा का गोद लिया पुत्र पति की संपत्ति का भी उत्तराधिकारी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति की मृत्यु के बाद यदि कोई विधवा एक बच्चे को गोद लेती है, तो वह बच्चा मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा और उसे पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा। न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने प्रयागराज के राम कृपाल द्वारा 1983 में दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में चकबंदी अधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मोती रानी और उनके दिवंगत पति मुरलीधर के गोद लिए हुए पुत्र रामजी को मुरलीधर की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया था।
मामले के अनुसार, मुरलीधर की मृत्यु के समय उसकी कोई संतान नहीं थी, जिसके बाद उनकी संपत्ति का हिस्सा उनकी पत्नी मोती रानी को मिला। रामजी ने दावा किया कि मोती रानी ने दो अगस्त 1960 को विधिवत गोद लेने के विलेख के माध्यम से उन्हें गोद लिया था, इसलिए वह मुरलीधर की संपत्ति के उत्तराधिकारी हैं। अदालत ने अपने 30 जुलाई के निर्णय में उच्चतम न्यायालय के ‘सावन राम बनाम कलावंती’ मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चकबंदी अधिकारियों द्वारा यह निष्कर्ष निकालने में कोई अवैधता नहीं है कि रामजी, मोती रानी और मुरलीधर के गोद लिए हुए पुत्र के रूप में उत्तराधिकार प्राप्त करेंगे।
उच्च न्यायालय ने ‘सुभाष मिसिर’ मामले के एक अन्य निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि विधवा द्वारा गोद लिया गया पुत्र, उसके मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा और विधवा की मृत्यु के बाद वह पति की संपत्ति का वैध उत्तराधिकारी होगा। अदालत ने इसी आधार पर राम कृपाल की याचिका खारिज कर दी।
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